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Armed Forces Tribunal: एएफटी के आदेशों का पालन न करना अब अफसरों को पड़ सकता है भारी, हो सकता है ये बड़ा एक्शन
Mon, 05 Aug 2024 06:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 05 Aug 2024 06:04 PM IST
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विस्तार
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) ने फैसला सुनाया है कि जानबूझकर आदेशों का पालन न करने की स्थिति में एएफटी के पास अपने आदेशों को लागू करवाने के लिए वह अफसरों के खिलाफ अवमानना का मामला चला सकता है। आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) का यह फैसला उस समय आया है, जब उसके आदेशों की रक्षा मंत्रालय की तरफ से नियमित रूप से अनदेखी की जाती रही है।
एएफटी की बड़ी बेंच का गठन 2014 में किया गया था। इस बड़ी बेंच में जस्टिस अनु मल्होत्रा, लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती और रियर एडमिरल धीरेन विग शामिल थे। 2014 में दिल्ली की दो सदस्यीय बेंच ने केरल हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद आशंका जताई थी, जिसमें एएफटी की कोच्चि बेंच को रक्षा अधिकारियों की तरफ से आदेशों की तामील न किए जाने की स्थिति में अवमानना की शक्तियों का प्रयोग करने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद बडी बेंच का गठन किया गया था।
2014 में कोलकाता बेंच में लेफ्टिनेंट कर्नल (बाद में कर्नल) मुकुल देव की तरफ से कंटेप्ट (अवमानना) को लेकर कई मामले दायर किए गए थे और एएफटी की चंडीगढ़ बेंच ने भी सुओ मोटो लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी, जिसके बाद ये सभी मामले बड़ी बेंच को भेजे गए थे। इस साल अप्रैल और मई में इन मामलों में मैराथन सुनवाई हुई थी, जिसमें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी के साथ अनिल गौतम ने सरकार का पक्ष रखा था। वहीं, कर्नल राजीव मांगलिक (सेवानिवृत्त) ने पीटिशनर्स का पक्ष रखा था। अदालत ने दिल्ली और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से वकील राजशेखर राव और नवदीप सिंह को बड़ी बेंच की मदद के लिए न्यायमित्र के तौर पर नियुक्त किया था।
एएफटी के इतिहास में अब तक के सबसे लंबे 500 पेजों के फैसले में, बड़ी बेंच ने एएफटी अधिनियम की धारा 29 और एएफटी एक्ट के नियम 25 की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून निर्माताओं का का एएफटी को शक्तिहीन बनाए रखने का कोई इरादा नहीं था। बेंच ने पाया कि एएफटी के 5,000 से अधिक आदेशों पर अफसरों की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है, जबकि उन पर किसी भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई भी स्टे ऑर्डर नहीं दिया गया है। इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को एएफटी के आदेशों का पालन न करने को लेकर कड़ी फटकार भी लगाई थी।
वहीं सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट भी कई मामलों में विकलांग कर्मियों और अन्य पेंशनभोगियों के खिलाफ बेबुनियाद अपील दायर करने को लेकर रक्षा मंत्रालय के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां कर चुकी हैं। वहीं, रक्षा मंत्रालय की इस सोच की आलोचना सरकार के उसके अपने पैनल और समितियां भी कर चुकी हैं।