देश में बने 1,200 कोरोना कंटेनमेंट जोन, जानें कोरोना हॉटस्पॉट से कितने अलग होते हैं कंटेनमेंट जोन?
- कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए बनाए कंटेनमेंट जोन
- देशभर में 1,200 से ज्यादा जोन, महाराष्ट्र में 401
- दिल्ली में 20, यूपी में 104 हॉटस्पॉट को किया गया सील
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विस्तार
कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। कोरोना जैसी महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में 1,200 से ज्यादा कंटेनमेंट जोन तैयार किए गए हैं। हाल ही में कोरोना से लड़ने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश ने कुछ इलाकों को हॉटस्पॉट बनाकर सील कर दिया है लेकिन कंटेनमेंट जोन, हॉटस्पॉट केंद्रों से थोड़ा अलग हैं। कंटेनमेंट जोन का आधार कुछ किलोमीटर के क्षेत्र माना गया है यानि कि अगर किसी क्षेत्र में एक या एक से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज पाए जाते हैं तो कम से कम पांच किलोमीटर तक के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है।
ये सवाल सबके मन में पैदा होते हैं कि आखिर कोरोना हॉटस्पॉट है क्या? क्या हॉटस्पॉट जोन में रहते हुए लोग घरों में बाहर निकल सकते हैं, किसी जगह को हॉटस्पॉट कब कहा जाता है? इस रिपोर्ट में आपको हॉटस्पॉट और कंटेनमेंट जोन से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिलेंगे।
क्या है कोरोना हॉटस्पॉट?
कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए कुछ इलाकों को हॉटस्पॉट बनाए गए हैं। ये ऐसे इलाके हैं जहां छह या उससे ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हैं और जहां संक्रमण के तेजी से फैलने की ज्यादा संभावना है। दिल्ली में बुधवार को 20 इलाको और उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में 104 हॉटस्पॉट को चिन्हित किया गया है जिन्हें पूरी तरह से सील कर दिया है। फिलहाल ये आदेश 15 अप्रैल तक जारी रहेंगे। इसी के साथ इन दोनों राज्यों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है।
हॉटस्पॉट वाले इलाकों में राज्य सरकारें ये सुनिश्चित करेंगी कि घरों तक खाने-पीने के जरूरी सामानों की होम डिलिवरी हो। इसके अलावा आपको ये जानना भी जरूरी है कि हॉटस्पॉट वाले इलाको में क्या किया जा सकता है और क्या नहीं...
हॉटस्पॉट में क्या हो सकता है?
- इलाके के हर घर की सख्त निगरानी
- राशन, जरूरी सामान की होम डिलिवरी
- मेडिकल इमरजेंसी में एंबुलेंस की सुविधा
- इलाके का सैनिटाइजेशन
हॉटस्पॉट में क्या नहीं हो सकता?
- आवाजाही की इजाजत नहीं
- मेडिकल, दुकानों पर जाने की अनुमति नहीं
- इलाके में मीडिया कवरेज की अनुमति नहीं

हॉटस्पॉट इलाकों का आकार
- घरों से लेकर सेक्टर तक
- कोई मोहल्ला या कॉलोनी
- अपॉर्टमेंट भी हॉटस्पॉट हो सकता है
हॉटस्पॉट के चलते सील किए इलाके
दिल्ली में 20 इलाके सील
- मरकज मस्जिद
- निजामुद्दीन बस्ती
- शाहजहांबाद सोसाइटी
- मयूर विहार के कुछ इलाके
- पटपड़गंज
- मालवीय नगर
- संगम विहार
- सीमापुरी
- वसुंधरा एनक्लेव
- दिलशाद गार्डन
- गांधी पार्क
- मंडालवी गली नंबर एक
- पांडव नगर एच ब्लॉक गली नंबर एक
- खिचड़ीपुर गली नंबर एक-तीन
- किशन कुंज
- आगरा - 22
- गाजियाबाद - 13
- गौतमबुद्ध नगर - 12
- लखनऊ- 13
- कानपुर - 12
- मेरठ - 7
- महाराजगंज - 4
- सहारनपुर - 4
- वाराणसी - 4
- बुलंदशहर - 3
- बरेली - 1
- भीलवाड़ा
- जोधपुर
- टोंक
- जयपुर
- झुंझुनूं
- कोटा
- बीकानेर
- मुंबई
- पुणे
- नवी मुंबई
- सांगली
- अहमदनगर
- लातुर
- रत्नागिरी
- कोल्हापुर
- नासिक
- कसारागोड़
- कन्नूर
- कोजिकोड़े
- मल्लापुरम
- त्रिशूर
- एर्नाकुलम
- त्रिरूवनंतपुरम
- अहमदाबाद
- जवाहरपुर
लोगों की आवाजाही पर सख्ती
कोरोना के खतरे को देखते हुए सरकार ने देश में 1,200 कंटेनमेंट जोन तैयार किए हैं। जिन राज्यों में 100 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज हैं, वहां सरकार ने लोगों की आवाजाही पर सख्ती कर दी है। इन इलाकों में लॉकडाउन से भी ज्यादा सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अकेले महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कंटेनमेंट जोन तैयार किए गए हैं। आइए जानते हैं कि देश के अलग अलग राज्यों में कितने कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं...
किस राज्य में कितने कंटेनमेंट जोन
- महाराष्ट्र - 401
- उत्तर प्रदेश - 105
- राजस्थान - 38
- मध्य प्रदेश - 180
- तमिलनाडु - 220
- दिल्ली - 23
- तेलंगाना - 125
- हैदराबाद - 36
- आंध्र प्रदेश - 121
आंकड़ों में देखा जा सकता है कि महाराष्ट्र में 400 से ज्यादा कंटेनमेंट जोन हैं जिसमें अकेल मुंबई में 381 और पुणे में 20 जोन तैयार किए गए हैं। कंटेनमेंट जोन और हॉस्पॉट में मामूली सा अंतर है, एक विशेष किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन कहा जा सकता है जबकि हॉटस्पॉट कई किलोमीटर तक फैला हो सकता है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी एक जगह पर एक मरीज भी कोरोना से संक्रमित पाया जाता है तो उस जगह को कंटेनमेंट जोन माना जाएगा। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए वहां और ज्यादा सख्ती की जाएगी।
कंटेनमेंट जोन में क्या होगा?
- इलाके की निगरानी को लेकर सख्ती
- ड्रोन और CCTV कैमरा से निगरानी
- जरूरी सामान की घर तक डिलिवरी
- स्वास्थ्य कर्मी सैनिटाइज करेंगे
- स्थानीय लोगों के आने-जाने पर रोक
- मोबाइल एप के जरिए गैर कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच
सैनिटाइज करते स्वास्थ्य कर्मचारी
अलग-अलग राज्यों ने कंटेनमेंट जोन के लिए अलग रणनीतियां अपनाई हैं। उड़ीसा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने सोशल मीडिया पर एक नक्शा जारी किया है जिसमें कंटेनमेंट जोन की सीमाएं देखी जा सकती है।
चेन्नई ने दो परतों वाला कंटेनमेंट जोन तैयार किया है जिसमें नौ बड़े जोन हैं और 70 छोटे जोन बनाए गए हैं। ये दोनों जोन पांच किलोमीटर के दायरे में बने हुए हैं जहां लोगों के बाहर निकलने पर रोक है और रोजाना उस इलाके को सैनिटाइज किया जाता है।
मुंबई में सबसे ज्यादा कंटेनमेंट जोन बनाए गए है। मुंबई में अगर एक इलाके के किसी व्यक्ति को कोरोना है तो उस पूरे इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है। ऐसे इलाके के हर व्यक्ति के घरों में जाकर उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है।
दिल्ली में दो किलोमीटर के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बताया गया है। दिल्ली में पुलिस ने जगह जगह पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं और स्थानीय कंट्रोल रूम से लोगों की आवाजाही पर निगरानी की जा रही है। वहीं जयपुर में ऐसे जोन के 20 घरों को दिन में दो बार सैनिटाइज किया जा रहा है।
भोपाल में 70 कंटेनमेंट जोन में तीन लाख से ज्यादा लोगों को सीमित कर दिया गया है। जबकि इंदौर में पांच लाख से ज्यादा लोगों को 90 कंटेनमेंट जोन के दायरे में रखा गया है। वहीं भुवनेश्वर नगर पालिका ने कंटेनमेंट जोन के लिए डेढ़ किलोमीटर का दायरा बनाया है।