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Arbitration Law: मध्यस्थता कानून में संशोधन के लिए मोदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, सदन में पेश किया मसौदा विधेयक

Mon, 28 Oct 2024 06:12 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 28 Oct 2024 06:12 AM IST
सार

Arbitration Law: केंद्र सरकार ने मध्यस्थता कानून में संशोधन और संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने तथा ऐसे मामलों में अदालती हस्तक्षेप को कम करने के लिए सदन में एक मसौदा विधेयक पेश किया है।

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Arbitration Law: Modi government took a big step to amend the Arbitration Law presented the draft in the House
भारतीय संसद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने तथा ऐसे मामलों में अदालती हस्तक्षेप को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक मसौदा विधेयक पेश किया है। विधि मंत्रालय के विधिक मामलों के विभाग ने मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2024 के मसौदे पर टिप्पणियां आमंत्रित की है।
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यह मसौदा विधेयक पूर्व विधि सचिव और पूर्व लोकसभा महासचिव टी के विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की ओर से मध्यस्थता क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों पर अपनी रिपोर्ट विधि मंत्रालय को सौंपे जाने के कुछ महीने बाद आया है। प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है कि मध्यस्थ संस्थाएं अंतरिम उपाय प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यस्थ न्यायाधिकरण के गठन से पहले आपातकालीन मध्यस्थ की नियुक्ति का प्रावधान कर सकती हैं।
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नियुक्त आपातकालीन मध्यस्थ, मध्यस्थता परिषद के निर्दिष्ट तरीके से कार्यवाही का संचालन करेगा। साथ ही मसौदा विधेयक में वर्तमान कानून के कुछ खंडों को भी हटा दिया गया है। हटाए गए खंडों में से एक, संसद सत्र के दौरान प्रस्तावित अधिसूचनाओं को दोनों सदनों में रखे जाने से संबंधित है।
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उपराष्ट्रपति ने पिछले साल जताया था दुख
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पिछले वर्ष इस बात पर दुख जताया था कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने देश की मध्यस्थता प्रणाली को अपनी मुट्ठी में जकड़ रखा है। इससे अन्य योग्य लोगों को मौका नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा था कि भारत अपने समृद्ध मानव संसाधनों के लिए जाना जाता है, लेकिन उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया का फैसला करने के लिए नहीं चुना जाता है।
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