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आखिर खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू क्यों नहीं आ रहा भारतीय एजेंसियों की गिरफ्त में, पढ़ें क्या है वजह

Fri, 05 Feb 2021 07:47 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Feb 2021 07:47 PM IST
सार

एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि वह हमारे देश का नागरिक नहीं है, इसी वजह से जांच एजेंसियों के हाथ बंध जाते हैं। विभिन्न देशों के साथ बहुपक्षीय संधियां और समझौते होते हैं। अगर पन्नू दुबई या बांग्लादेश में होता तो उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकती थी...

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Apart from NIA, cases are also registered against gurpatwant singh pannu Punjab and Haryana
gurpatwant singh pannu - फोटो : File Photo

विस्तार

किसान आंदोलन में लोगों को तोड़फोड़ के लिए उकसाने वाला आतंकवादी एवं सिख फॉर जस्टिस का संस्थापक और कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नू को लेकर एक बात तो साफ है कि उसे पकड़ना आसान नहीं है। अमेरिका या कनाडा में बैठकर वह आग उगलता रहेगा और इधर पुलिस एवं दूसरी जांच एजेंसियों के पास उसके खिलाफ केवल अधर काटने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।

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एनआईए के अलावा पंजाब और हरियाणा में भी पन्नू के खिलाफ केस दर्ज हैं। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस मामले में कहा, वह हमारे देश का नागरिक नहीं है, इसी वजह से जांच एजेंसियों के हाथ बंध जाते हैं। विभिन्न देशों के साथ बहुपक्षीय संधियां और समझौते होते हैं। अगर पन्नू दुबई या बांग्लादेश में होता तो उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकती थी। पन्नू जहां से फोन कॉल करता है, वहां इस तरह की आजादी है। उन देशों की पुलिस को लगता है कि यह उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। उसके खिलाफ कार्रवाई का मतलब, मानवाधिकार का उल्लंघन होगा, ऐसा कुछ उन देशों में माना जाता है। यही वजह है कि किसान आंदोलन में गणतंत्र दिवस पर हुए उपद्रव के बाद भी वह लगातार पंजाब के युवाओं को खालिस्तान की मांग के लिए उकसा रहा है।
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आईबी में लंबे समय तक रहे पूर्व आईपीएस प्रदीप भारद्वाज कहते हैं, आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत लाना बहुत मुश्किल है। वहां के कानून इस तरह की छूट नहीं देते। यह बात गौर करने लायक है कि जिसे हमारे देश में क्राइम माना जाता है तो क्या उस देश में भी वैसी ही व्यवस्था है। बहुत से देशों में ऐसा नहीं होता। मसलन, कोई ऐसा मामला जो भारत में अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन अमेरिका में वह अभिव्यक्ति का हिस्सा हो सकता है। भले ही किसी भी राज्य में पन्नू के खिलाफ कितने ही मामले दर्ज क्यों न हों, लेकिन कार्रवाई तो केंद्र और इसकी एजेंसियों के मार्फत ही होनी है।
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जिस देश के साथ ऐसे मामलों को लेकर कोई संधि नहीं है, वहां द्विपक्षीय संबंध भी देखे जाते हैं। ऐसे मामलों में संबंध खराब होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में कूटनीतिक बातचीत का रास्ता बचता है। यह भी तभी संभव है, जब कोई भारतीय नागरिक उस देश में जाकर छिप गया हो या उसने वहां शरण ले ली हो। पन्नू के मामले में ऐसा नहीं है। वजह, वह हमारे देश का नागरिक नहीं है। आतंकी गुरपतवंत सिंह के पास विदेशी नागरिकता है। उसके खिलाफ कार्रवाई में यही सबसे बड़ी बाधा बन गई है।

आईबी के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एवं कैबिनेट सचिवालय में सेक्रेटरी सिक्योरिटी के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने कहा, पन्नू के केस में यह भी देखने वाली बात है कि दूसरा देश जहां का वह नागरिक है, वहां उसकी गतिविधियों को अपराध माना जाता है या नहीं। एनआईए ने पन्नू की जमीन और दूसरी प्रॉपर्टी जब्त की है। उसमें यह आधार था कि वह देश-विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग करता है। कनाडा के पीएम तक किसानों के मुद्दे पर बयान देकर आलोचना का शिकार हो चुके हैं। मौजूदा समय में उस देश के साथ भारत के संबंध बेहद अच्छे नहीं हैं। दिल्ली पुलिस ने पता लगाया था कि पाकिस्तान में बैठकर साढ़े तीन सौ ट्वीटर हैंडल्स से किसान आंदोलन में माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।


एनआईए के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी विदेश में जाकर पन्नू से पूछताछ कर सकती है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है। इसके लिए वहां की पुलिस की मदद चाहिए होती है। उस देश के साथ हमारे संबंध कैसे हैं, ये भी देखा जाएगा। ये बहुत लंबी प्रक्रिया है। जटिल भी है और इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से कई तरह के प्रस्ताव दूसरे देश को भेजे जाते हैं। ऐसे में उपाय यही है कि देश में पन्नू की गतिविधियों पर सख्त निगरानी की जाए। वह कहां और किसे फोन कर रहा है, इस पर नजर रखी जाए। युवाओं को समझाया जाए कि खालिस्तान नाम का कोई आंदोलन या संगठन नहीं है। ये संगठन उन्हें गुमराह कर मुसीबत में फंसा सकता है।

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