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अपील: जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा- असहमति को दबाने में न हो आपराधिक कानूनों का दुरुपयोग

Wed, 14 Jul 2021 03:47 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 14 Jul 2021 03:47 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा- नागरिकों को परेशान करने और स्वतंत्रता छीनने वाला कानून नहीं बनाया जा सकता

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Anti terror laws not to quell dissent says Supreme Court Judge Chandrachud
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : twitter

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जज डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि आतंकवाद विरोधी कानून सहित किसी भी आपराधिक कानून का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा, ऐसा कोई कानून नहीं बनाया जा सकता, जिसका मकसद नागरिकों को परेशान करना ओर उनकी स्वतंत्रता छीनना हो। उन्होंने न्यायालयों से स्वतंत्रता से वंचित करने के खिलाफ ‘रक्षा की पहली पंक्ति’ के रूप में कार्य करने की अपील की।
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने भारत-अमेरिका कानूनी संबंधों पर संयुक्त ग्रीष्मकालीन सम्मेलन में कहा, नागरिकों के असंतोष या उत्पीड़न को दबाने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून आदि आपराधिक कानूनों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। मैंने अर्णब गोस्वामी बनाम राज्य मामले में अपने फैसले के दौरान इसका जिक्र किया है।
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उन्होंने कहा कि एक दिन के लिए भी स्वतंत्रता से वंचित करना ‘बहुत ज्यादा’ है और न्यायाधीशों को हमेशा अपने निर्णय देते समय इसके प्रति सचेत रहना चाहिए। उन्होंने कहा, आज दुनिया का सबसे पुराना व सबसे बड़ा लोकतंत्र एक बहुसांस्कृतिक, बहुलवादी समाज के आदर्शों का प्रतिनिधित्व करता है, जहां संविधान, मानव अधिकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और सम्मान पर केंद्रित हैं।

इस मौके पर जस्टिस चंद्रचूड ने अमेरिकी कानून व्यवस्था की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका का प्रभाव भारत के न्यायशास्त्र पर देखा जा सकता है। अमेरिका का प्रभाव भारत के संविधान के दिल और आत्मा पर देखा जा सकता है।

उन्होंने अनुच्छेद-21 का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में नागरिक को व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा का अधिकार है, वहीं अमेरिका का बिल ऑफ राइट्स भी कहता है कि हर व्यक्ति को कानून की उचित प्रक्रिया पाने का अधिकार है।

स्टेन स्वामी की मौत के बीच आई है टिप्पणी
जस्टिस चंद्रचूड का यह बयान 84 वर्षीय कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की मौत पर उपजी नाराजगी के बीच आया है। स्टेन स्वामी को यूएपीए कानून के तहत माओवादियों से संबंधों को लेकर एल्गर परिषद मामले में गिरफ्तार किया गया था।


करीब दो साल तक जेल में रहने के दौरान वह खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पाने की लड़ाई लड़ रहे थे। लेकिन हिरासत के दौरान ही उनका मुंबई में निधन हो गया। पिछले हफ्ते असम के एक नेता अखिल गोगाई भी 17 महीने जेल में रहने के बाद रिहा हुए हैं।

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