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लोकपाल को ‘लोगो’, आदर्श वाक्य मिला
Tue, 26 Nov 2019 03:17 PM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अजय सिंह
Updated Tue, 26 Nov 2019 03:17 PM IST
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लोकपाल जस्टिस पिनाकी घोष
- फोटो : PTI
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भ्रष्टाचार रोधी संस्था लोकपाल को मंगलवार को इसका ‘लोगो’ और ‘आदर्श वाक्य’ मिल गया। कार्मिक मंत्रालय के बयान के मुताबिक इसके लिए एक खुली प्रतियोगिता के जरिए 6,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी।
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खुली प्रतियोगिता के तहत देश के विभिन्न हिस्से से विभिन्न आयु वर्ग के लोगों से ‘लोगो’ के लिए 2,236 तथा ‘आदर्श वाक्य’ के लिए 4,705 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। कार्मिक मंत्रालय ने बताया कि ‘लोगो’ का डिजाइन प्रविष्टियों में से चुना गया, लेकिन आदर्श वाक्य के लिए किसी भी प्रविष्टि को उपयुक्त नहीं पाया गया और इसे स्वयं लोकपाल ने चुना।
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बयान में बताया गया है कि त्रिस्तरीय चयन प्रक्रिया के आधार पर उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद के रहने वाले प्रशांत मिश्र की डिजाइन को लोकपाल के लोगो के लिए चुना गया है। मिश्र ने बताया कि ‘लोगो’ लोकपाल के शाब्दिक पर आधारित है। इसमें ‘लोक’ का अर्थ जनता और ‘पाल’ का मतलब देखभाल करने वाला है।
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उन्होंने कहा कि ‘‘लोगो’’ दर्शाता है कि लोकपाल किस तरह से कानून के मुताबिक देश की जनता की रक्षा और देखभाल करता है। उन्होंने बताया कि ‘‘लोगो’’ में तीन रंग हैं जो लोकपाल के राष्ट्रीय तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।उन्होंने बताया कि में हमेशा से एक ग्राफिक डिजाइनर बनना चाहता था, पर कुछ कारणों के चलते ऐसा नहीं हो सका। मैं बहुत खुश हूं कि मेरा डिजाइन लोकपाल के 'लोगो' के लिए चुना गया। ये मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। बता दें कि प्रशांत मिश्रा रेलवे विभाग में नौकरी करते हैं।
लोकपाल के आदर्श वाक्य के लिए कोई भी प्रविष्टि उपयुक्त नहीं पाई गई, जिसके बाद खुद लोकपाल ने इसे चुना। 17 अक्टूबर को लोकपाल ने अपनी पूरी बेंच की बैठक में ईशावास्य उपनिषद से अपना आदर्श वाक्य चुना। संस्कृत भाषा के इस वाक्य का अर्थ है, किसी के भी धन के प्रति लालची नहीं होना। लोकपाल के ‘‘लोगो’’ और आदर्श वाक्य के लिए 13 जून 2019 तक प्रविष्टियां मांगी गई थी और विजेता को 25 हजार रुपये नकद इनाम मिलेगा।
लोकपाल शीर्ष निकाय है जो राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के मामलों से निपटता है। इसे केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ निर्धारित समय सीमा के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी होगी। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 23 मार्च को न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के चेयरपर्सन के रूप में शपथ दिलाई थी। इसके बाद लोकपाल के आठ सदस्यों को न्यायमूर्ति घोष ने शपथ दिलाई।