'यूपीए ने आधी कीमत पर तय किया था राफेल सौदा'
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कांग्रेस का कहना है कि चीन और पाकिस्तान अपनी सामरिक शक्ति बढ़ा रहे हैं उसे देखते हुए मात्र 36 लड़ाकू विमान अपर्याप्त हैं। फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे पर सरकार की घेरेबंदी के लिए कांग्रेस ने पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी को मैदान में उतारा है।
एंटनी ने सवाल उठाया कि दक्षिण एशिया की सामरिक परिस्थिति में भारत को देखते हुए 36 लड़ाकू विमान नाकाफी हैं। एयरफोर्स में 42 स्क्वाड्रन की क्षमता स्वीकृत है।
वर्तमान में 32 स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हैं जो 2022 तक घटकर 25 रह जाएंगे। यूपीए सरकार के समय से ही एयरफोर्स को 126 एयरक्राफ्ट की आवश्यकता है। क्या 36 एयरक्राफ्ट एयरफोर्स की जरूरत को पूरा कर पाएंगे।
'राफेल डील ने बजाया मेक इन इंडिया का बाजा'
पूर्व रक्षामंत्री ने सरकार से इसका जवाब मांगा है। उन्होंने बताया कि यूपीए के दौरान तय हुआ था कि शुरुआती 18 एयरक्राफ्ट वहीं से तैयार होकर आएंगे और 108 भारत के एचएएल में बनेंगे। जबकि अब 36 विमान वहीं से तैयार होकर आएंगे।
इस सौदे ने प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के नारे का बाजा बजा दिया है। उनका कहना है कि जब भी कोई सौदा होता है तो तकनीक का ट्रांसफर जरूरी होता है। कीमत को लेकर भी साफ होना चाहिए कि बातचीत करने से कीमतें कितनी कम हुईं।
मीडिया विभाग के प्रभारी मनीष तिवारी ने कहा कि खुद को पारदर्शी बताने वाली सरकार को राफेल सौदे से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार इस सौदे को लेकर बातचीत कर रही थी तो उसकी कीमत 700 करोड़ रखी गई थी। जबकि आज एक विमान 1600 करोड़ में मिलेगा।