फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Answer to all your questions about Hindenburg: Who will be affected the most by this storm?

Hindenburg Report: हिंडनबर्ग को लेकर आपके हर सवाल का जवाबः इस तूफान का सबसे ज्यादा असर किस पर होगा

Thu, 31 Aug 2023 01:31 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 31 Aug 2023 01:31 PM IST
सार

Hindenburg Report: नई रिपोर्ट को लाने का काम 'ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट' (OCCRP) कर रही है। यह कई देशों में फैले स्वतंत्र पत्रकारों का संगठन है जो यह दावा करता है कि वह दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों की आंतरिक सांठगांठ को उजागर करती है और इसके जरिए किए जा रहे आर्थिक अपराध के बारे में लोगों को सचेत करती है।

विज्ञापन
Answer to all your questions about Hindenburg: Who will be affected the most by this storm?
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिंडनबर्ग ने इसी साल की शुरुआत में एक रिपोर्ट प्रकाशित कर भारत के आर्थिक-राजनीतिक जगत में एक तूफान ला दिया था। रिपोर्ट का यह असर हुआ था कि दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति होने का तमगा हासिल करने की ओर तेजी से बढ़ रहे गौतम अदाणी को 37वें स्थान पर खिसक जाना पड़ा था तो उनकी कंपनी को 60 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था। 

विज्ञापन


सूत्रों का कहना है कि स्वतंत्र पत्रकारों की एक संस्था ओसीसीआरपी जल्द ही एक रिपोर्ट प्रकाशित करने जा रही है जो भारत की कुछ शीर्ष कंपनियों से संबंधित हो सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस रिपोर्ट का भी हिंडनबर्ग 1.0 जैसा असर हो सकता है और इससे देश की कई शीर्ष कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 
विज्ञापन


चूंकि, हिंडनबर्ग रिपोर्ट 1.0 के कारण विपक्ष ने केंद्र सरकार पर भी जमकर निशाना साधा था, माना जा रहा है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट 2.0 से भी विपक्ष केंद्र को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो लोकसभा चुनावों के ठीक पहले सत्ता पक्ष पर यह बड़ी चोट हो सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रिपोर्ट के पीछे कौन

नई रिपोर्ट को लाने का काम 'ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट' (OCCRP) कर रही है। यह कई देशों में फैले स्वतंत्र पत्रकारों का संगठन है जो यह दावा करता है कि वह दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों की आंतरिक सांठगांठ को उजागर करती है और इसके जरिए किए जा रहे आर्थिक अपराध के बारे में लोगों को सचेत करती है। ओसीसीआरपी को अमेरिकी निवेशक और उद्योगपति जॉर्ज सोरोस आर्थिक मदद देते हैं। इन पर आरोप लगाया जाता है कि वे भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध एजेंडा चलाते हैं। पिछली बार जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट 1.0 में भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अदाणी पर निशाना साधा गया था, तब भी इसके पीछे जॉर्ज सोरोस का नाम सामने आया था।  

हिंडनबर्ग रिपोर्ट 1.0 में क्या हुआ

हिंडनबर्ग ने 24 जनवरी 2023 को अदाणी ग्रुप से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में कंपनी पर संदिग्ध लेनदेन कर कृत्रिम तरीके से शेयरों के मूल्यों में परिवर्तन कर बैंकों से भारी भरकम कर्ज हासिल करने के आरोप लगाए गए थे। इस रिपोर्ट का अर्थ यह था कि कंपनी ने अपनी असली स्थिति से बहुत अधिक लगभग 2.20 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हासिल कर लिया था। यदि किसी कारण कंपनी की स्थिति खराब होती है तो इससे बैंकों का पैसा वापस मिलना संभव नहीं रह जाएगा और बैंकों के सामने दिवालिया होने की स्थिति आ सकती है। इससे पूरी अर्थव्यवस्था के दिवालियेपन के भंवर में फंसने का डर है।
 
रिपोर्ट का यह असर हुआ था कि दो महीने के अंदर कंपनी के शेयर 80 प्रतिशत तक टूट गए। इससे कंपनी और अदाणी को भारी नुकसान हुआ। बाद में कंपनी ने कुछ वापसी अवश्य की, लेकिन आज तक वह उस नुकसान से नहीं उबर पाई। रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद भारत के आर्थिक-राजनीतिक जगत में तूफान आ गया। स्वयं गौतम अदाणी इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने से पहले दुनिया के चौथे नंबर के अमीर व्यक्ति बन चुके थे। वे तेजी से नंबर एक की कुर्सी की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन रिपोर्ट आने के बाद वे 37वें स्थान पर खिसक गए। गौतम अदाणी की नेटवर्थ में 60 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच कर रही सेबी को जल्द अपनी रिपोर्ट साझा करने का निर्देश दिया था। सेबी ने 25 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में पेश किया था। इस पर 29 अगस्त को सुनवाई होनी थी, लेकिन फिलहाल इसे आगे के लिए टाल दिया गया है।     

क्या हो सकते हैं नतीजे

हिंडनबर्ग ने अदाणी की कंपनी से संबंधित 88 सवाल खड़े किए थे। इनमें टैक्स हैवेन पांच देशों में गलत तरीके से शेल कंपनियां बनाकर पैसे का हेरफेर करने का आरोप भी शामिल है। सेबी के पास दूसरे देशों में हुए आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की जांच का अधिकार नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय इस तरह के मामलों की जांच कर सकता है। लेकिन दूसरे देशों का मामला होने के कारण इन मामलों में भी बहुत अधिक प्रमाण मिलने की संभावना नहीं है। संभवतः यही कारण है कि अभी से कुछ रिपोर्ट में इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि सेबी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में जमा की गई रिपोर्ट में अदाणी ग्रुप को 24 में 22 मामलों में राहत मिल चुकी है। शेष दो मामलों में जांच जारी है। 

आर्थिक निवेश को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ अरुण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि अभी ओसीसीआरपी की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि यह किसके विरुद्ध है और किसे इससे लाभ हो सकता है। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि इस रिपोर्ट से इस बात का खुलासा होगा कि भारत में उन कंपनियों को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलता है जो सरकार या सत्ता पक्ष के करीब होती हैं। यह एक बुरा संकेत है और इससे देश के निवेश पर सीधा असर पड़ सकता है।  

जार्ज सोरोस की सोच पर भी सवाल

हिंडनबर्ग रिपोर्ट पूरी तरह जार्ज सोरोस की कंपनी द्वारा प्रायोजित था तो ओसीसीआरपी को भी जार्ज सोरोस ही आर्थिक मदद उपलब्ध करा रहे हैं। सोरोस पर ये आरोप हमेशा से लगते रहे हैं कि वे किसी कंपनी के विरुद्ध समाचार फैलाकर उसके शेयरों के दाम गिराते हैं, गिरी हूई कीमतों पर स्वयं शेयर खरीदते हैं, और बाद में ऊंचे मूल्य पर वही शेयर बेचकर भारी लाभ कमाते हैं। यदि इस बार ओसीसीआरपी की रिपोर्ट भी इस तरह की शॉर्ट सेलिंग का परिणाम हो तो इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट की टाइमिंग पर भी सवाल

ओसीसीआरपी की रिपोर्ट ऐसे समय में आ रही है जब भारत जी-20 का आयोजन कर पूरी दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन समेत दुनिया के 40 राष्ट्राध्यक्ष भारत में हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि यह रिपोर्ट इस समय भारत की साख को प्रभावित कर यहां हो रहे निवेश को निशाना बनाने की कोशिश हो सकती है। 
चूंकि, अमेरिका अपनी कंपनियों को धीरे-धीरे चीन से खींचकर भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, इसका सीधा नुकसान चीन जैसे देश को हो रहा है, रिपोर्ट के जरिए भारत में निवेश के अनुकूल माहौल न होने का भय भी खड़ा किया जा सकता है। यानी आशंका जताई जा रही है कि इस रिपोर्ट को लाने के पीछे अंतरराष्ट्रीय जगत के बड़े खिलाड़ी हो सकते हैं।  

कोई नुकसान नहीं- भाजपा

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद जफर इस्लाम ने कहा कि जिस समय दुनिया की बड़ी आर्थिक शक्तियां जूझ रही हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। दुनिया की जीडीपी बढ़त का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले भारत से आ रहा है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। जफर इस्लाम ने कहा कि यही कारण है कि जॉर्ज सोरोस जैसे कुछ लोग भारत विरोधी एजेंडा चलाकर भारत की बढ़त को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट 2.0 को लोकसभा चुनावों से पहले लाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही हो सकती है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य संदेहास्पद है।


 
उन्होंने कहा कि किसी अर्थव्यवस्था के आंकने के तीन प्रमुख आधार होते हैं। इनमें जीडीपी ग्रोथ रेट, महंगाई पर नियंत्रण और कर संग्रह प्रमुख होता है। देश की जीडीपी बेहतर गति से आगे बढ़ रही है, महंगाई दर में जहां दुनिया संघर्ष कर रही है, भारत में महंगाई दर लगभग नियंत्रण में है। जीएसटी टैक्स संग्रह लगातार 1.5 लाख करोड़ रुपये की सीमा के ऊपर बना हुआ है। यह प्रमाणित करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और यह लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच से प्रभावित होकर रिपोर्ट प्रकाशित करने से भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करना संभव नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed