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महिला का आरोप, 'मेघालय के गवर्नर ने मुझे खींचा और जबरन किस किया'

Sat, 28 Jan 2017 04:51 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Jan 2017 04:51 PM IST
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Another sexual harassment charges on ex meghalaya governor

बीते नवंबर में मेघालय के गर्वनर रहे वी षणमुगनाथन ने एक महिला को नौकरी के लिए अपने कार्यालय में बुलाया था। महिला के अनुसार राज्यपाल का यह नियंत्रण उसके लिए एक दुस्वप्न सरीखा रहा। 

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न्यूज चैनल एनडीटीवी को भेजे खत में महिला ने आरोप लगाया कि, "जब मैं वहां पहुंची उन्होंने मेरे निजी जीवन को लेकर मुझसे सवाल पूछे ....इसके बाद उन्होनें मुझे जबरन पकड़ा और चूमने लगे।" 
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महिला की शिकायत के साथ ‌शिलांग स्थित राजभवन के 98 कर्मचारियों ने अत्प्रत्याशित कदम उठाते हुए राज्यपाल के खिलाफ सीधे प्रधानमंत्री को खत लिखा है। खत में उन्होंने आरोप लगाया है कि षणमुगनाथन ने राजभवन की शुचिता के साथ समझौता करते हुए इसे लेडीज क्लब में तब्दील कर दिया। यहां कुछ दिनों के लिए केवल महिलाओं को ही नियुक्ति दी गई। 
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यह खत मिलने के बाद बीते सप्ताह केंद्र की ओर से षणमुगनाथन को जवाब देने के लिए कहा गया। हालांकि यह मामला उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया जब मीडिया में इसकी खबरें तेजी से उछलने लगीं।

यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे राज्यपाल ने दिया इस्तीफा

Another sexual harassment charges on ex meghalaya governor

मामला बढ़ता देख राज्यपाल ने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा और 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया जिसे बीती रात उन्होंने स्वीकार कर लिया। शुक्रवार को दिल्‍ली पहुंचने से पहले 67 वर्षीय पूर्व राज्यपाल ने गुवाहाटी के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में दर्शन किए।

बता दें कि राजभवन के कर्मचारियों द्वारा प्रधानमंत्री को लिखा खत सोशल मीडिया में भी वायरल हो गया। जिसमें पूर्व आरएसएस नेता रहे राज्यपाल पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसमें कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उनका उत्पीड़न और मानसिक शोषण किया।

राज्यपाल पर आरोप थे कि पिछले कुछ समय में उन्होंने राजभवन में वि‌भिन्न पदों पर केवल जवान महिलाओं की ही नियुक्ति की। जिससे वह एक ऐसी जगह के रूप में तब्दील हो गया जहां राज्यपाल के आदेश से जवान महिलाओं की सीधे एंट्री थी और महिलाओं की पहुंच सीधे उनके बेडरूम तक थी।

इसके कारण बाकी स्टाफ को मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, यहां तक की उप सचिव स्तर के एक अधिकारी को इसकी वजह से ब्रेन स्ट्रोक तक का सामना करना पड़ा। कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई। 

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