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बजट में नेशनल हाइड्रोजन मिशन का एलान: इस स्वच्छ ईंधन से चलेंगे वाहन

Tue, 02 Feb 2021 05:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 02 Feb 2021 05:38 PM IST
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Announcement of National Hydrogen Mission in the budget: vehicles will run with this clean fuel
दक्षिण कोरिया में हाइड्रोजन चलित बस - फोटो : Social Media

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पेश देश के आम बजट 2021 में नेशनल हाइड्रोजन मिशन शुरू करने का एलान किया है। ब्रह्मांड में प्रचुर मात्रा में मौजूद हाइड्रोजन का स्वच्छ ईंधन के तौर पर वाहनों आदि में इस्तेमाल करना इस मिशन का मकसद है। इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए टाटा, रिलायंस, महिन्द्रा जैसी कंपनियां एकजुट होकर सामूहिक प्रयास कर सकती हैं। 

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पीएम मोदी ने नवंबर 2020 में जताया था इरादा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2020 में तीसरे 'रि-इन वेस्ट' सम्मेलन में देश में एक समग्र नेशनल हाइड्रोजन मिशन शुरू करने की योजना प्रस्तावित की थी। अब वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट पेश करते हुए वर्ष 2020-21 में इस मिशन को शुरू करने की घोषणा की है। 
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क्यों जरूरी है यह मिशन
दरअसल पेट्रोलियम ईंधन के निरंतर महंगे होने व इससे होने वाले प्रदूषण को देखते हुए हरित व नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना देश के लिए जरूरी हो गया है। हाइड्रोजन का ईंधन के तौर पर इस्तेमाल इसी उद्देश्य से किया जाएगा। यह मिशन इस्पात व सीमेंट उद्योग जैसे उद्योग को कार्बन मुक्त करने के लिए भी जरूरी है। 
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हरित ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए साझेदारी जरूरी
मुंबई स्थित थिंक टैंक गेटवे हाउस के अध्येता चैतन्य गिरि के अनुसार हाइड्रोजन मिशन के लिए देश की कुछ बड़ी कंपनियां जैसे-रिलायंस, टाटा, महिन्द्रा, इंडियन आइल, आईशर आदि एकजुट हो सकती हैं। ऐसी साझेदारी यूरोपीयन हाइड्रोजन कोएलिशन या हाइड्रोजन काउंसिल की तर्ज पर हो सकती है। इससे मिशन जल्दी कामयाब हो सकता है। इन कंपनियों की भागीदारी इसलिए जरूरी है, क्योंकि कोई भी अकेली कंपनी यह काम नहीं कर सकती। वाहन कंपनियों और ईंधन कंपनियों की साझेदारी जरूरी है। 

हाइड्रोजन चलित वाहन बनाने होंगे
सिर्फ हाइड्रोजन से काम नहीं चलेगा, वाहन कंपनियों को इनसे चलने वाले वाहन भी बनाने होंगे। इसके फ्यूल स्टेशन बनाने होंगे व सुरक्षित प्रौद्योगिकी तैयार करना होगी, क्योंकि हाइड्रोजन मूल रूप से विस्फोटक गैस है। इसलिए वाहन, ईंधन व प्रौद्यागिकी कंपनियां मिलकर इसे सफल बना सकती हैं। जर्मनी में ऐसा गठबंधन बना है। वहां 2023 तक हाइड्रोजन भरने वाले पंप स्थापित हो जाएंगे। दक्षिण कोरिया में हाइड्रोजन चलित बसें दौड़ रही हैं।

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