{"_id":"6a397ed445216619890b6f69","slug":"anna-hazare-to-launch-fast-if-amendments-to-right-to-information-rules-not-revoked-2026-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाराष्ट्र: अन्ना हजारे का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- RTI नियमों बदलाव वापस नहीं लिए तो करूंगा अनशन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
महाराष्ट्र: अन्ना हजारे का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- RTI नियमों बदलाव वापस नहीं लिए तो करूंगा अनशन
Mon, 22 Jun 2026 11:59 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, पुणे।
पीटीआई, पुणे।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 22 Jun 2026 11:59 PM IST
सार
महाराष्ट्र में आरटीआई नियमों में बदलावों का विरोध करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने उन्हें पारदर्शिता के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से सूचना प्राप्त करना अधिक जटिल और महंगा हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो वह पांच जुलाई से रालेगण सिद्धि में अनशन शुरू करेंगे। पढ़ें रिपोर्ट-
विज्ञापन
अन्ना हजारे, सामाजिक कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विस्तार
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र सरकार सूचना का अधिकार (आरटीआई) के नियमों में किए गए 'गैरकानूनी' संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लेती है, तो वह पांच जुलाई से अहिल्यानगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में हजारे ने कहा कि महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026, आरटीआई कानून की धार को कमजोर कर देंगे और नागरिकों को जानकारी से दूर रखेंगे। उनका दावा है कि 12 जून को किए गए संशोधन आरटीआई अधिनियम, 2005 की भावना के खिलाफ हैं और पारदर्शिता को कमजोर करते हैं।
शुल्क बढ़ाने का विरोध विरोध किया
हजारे ने शुल्क बढ़ाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई तर्कसंगत कारण या वित्तीय विश्लेषण नहीं दिया गया है। उन्होंने पत्र में लिखा, आरटीआई कोई राजस्व कमाने वाला कानून नहीं है। यदि 20 साल बाद शुल्क बढ़ाया जाता है, तो जानकारी देने से इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाले जुर्माने को भी बढ़ाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
पहचान पत्र अनिवार्य करने पर आपत्ति जताई
उन्होंने पहचान पत्र को अनिवार्य बनाए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 6(2) के तहत आवेदकों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी या सूचना मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी शर्त भ्रष्टाचार या गलत कामों का खुलासा करने वाले लोगों (व्हिसल ब्लोअर्स) और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती है।
'एक विषय, एक आवेदन' नियम की आलोचना की
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े हजारे ने 'एक विषय, एक आवेदन' नियम की भी आलोचना की। उन्होंने इसे अनावश्यक तथा लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार किए गए आवेदनों को सीधे बंद करने का प्रावधान लोगों को पूरी या अपडेट की गई जानकारी प्राप्त करने से रोक देगा।
इन प्रावधानों पर भी विरोध किया
उन्होंने अन्य प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें सूचना मांगने का उद्देश्य पूछना, आवेदक के अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज करना, आवेदक की मृत्यु होने पर मामले को स्वतः बंद करना और सूचना आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान कानूनी सहायता पर रोक शामिल हैं।
नए नियमों से नागरिकों पर बढ़ेगा बोझ: हजारे
हजारे ने कहा कि ये नियम व्यवस्था की खामियों को दूर करने के बजाय नागरिकों पर ही बोझ डालते हैं। उन्होंने बताया कि आरटीआई अधिनियम की धारा 4 अभी भी सही तरीके से लागू नहीं हो रही है, जिसके तहत सरकारी संस्थाओं को स्वेच्छा से जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। इसी कारण नागरिकों को आवेदन देने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ये भी पढ़ें: Bidadi Township Row: बिदादी टाउनशिप परियोजना पर बढ़ा सियासत, CM शिवकुमार ने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया
उन्होंने कहा, प्रक्रिया को अधिक तकनीकी, महंगी और प्रशासन-केंद्रित बनाने से पारदर्शिता कम होगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ये संशोधन जनता से कोई सलाह-मशविरा किए बिना लागू किए गए हैं।
'मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं...'
हजारे ने 1998 से महाराष्ट्र में आरटीआई के लिए कई आंदोलन किए और मुंबई, रालेगण सिद्धि तथा आलंदी में अनशन किए। उन्होंने कहा कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। पत्र में कहा गया है, यदि 12 जून के संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो मैं 5 जुलाई से रालेगण सिद्धि के यादव बाबा मंदिर में अनशन शुरू करूंगा, चाहे इसकी कीमत मेरी जान ही क्यों न हो।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में हजारे ने कहा कि महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026, आरटीआई कानून की धार को कमजोर कर देंगे और नागरिकों को जानकारी से दूर रखेंगे। उनका दावा है कि 12 जून को किए गए संशोधन आरटीआई अधिनियम, 2005 की भावना के खिलाफ हैं और पारदर्शिता को कमजोर करते हैं।
विज्ञापन
शुल्क बढ़ाने का विरोध विरोध किया
हजारे ने शुल्क बढ़ाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई तर्कसंगत कारण या वित्तीय विश्लेषण नहीं दिया गया है। उन्होंने पत्र में लिखा, आरटीआई कोई राजस्व कमाने वाला कानून नहीं है। यदि 20 साल बाद शुल्क बढ़ाया जाता है, तो जानकारी देने से इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाले जुर्माने को भी बढ़ाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
पहचान पत्र अनिवार्य करने पर आपत्ति जताई
उन्होंने पहचान पत्र को अनिवार्य बनाए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 6(2) के तहत आवेदकों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी या सूचना मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी शर्त भ्रष्टाचार या गलत कामों का खुलासा करने वाले लोगों (व्हिसल ब्लोअर्स) और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती है।
'एक विषय, एक आवेदन' नियम की आलोचना की
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े हजारे ने 'एक विषय, एक आवेदन' नियम की भी आलोचना की। उन्होंने इसे अनावश्यक तथा लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार किए गए आवेदनों को सीधे बंद करने का प्रावधान लोगों को पूरी या अपडेट की गई जानकारी प्राप्त करने से रोक देगा।
इन प्रावधानों पर भी विरोध किया
उन्होंने अन्य प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें सूचना मांगने का उद्देश्य पूछना, आवेदक के अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज करना, आवेदक की मृत्यु होने पर मामले को स्वतः बंद करना और सूचना आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान कानूनी सहायता पर रोक शामिल हैं।
नए नियमों से नागरिकों पर बढ़ेगा बोझ: हजारे
हजारे ने कहा कि ये नियम व्यवस्था की खामियों को दूर करने के बजाय नागरिकों पर ही बोझ डालते हैं। उन्होंने बताया कि आरटीआई अधिनियम की धारा 4 अभी भी सही तरीके से लागू नहीं हो रही है, जिसके तहत सरकारी संस्थाओं को स्वेच्छा से जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। इसी कारण नागरिकों को आवेदन देने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ये भी पढ़ें: Bidadi Township Row: बिदादी टाउनशिप परियोजना पर बढ़ा सियासत, CM शिवकुमार ने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया
उन्होंने कहा, प्रक्रिया को अधिक तकनीकी, महंगी और प्रशासन-केंद्रित बनाने से पारदर्शिता कम होगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ये संशोधन जनता से कोई सलाह-मशविरा किए बिना लागू किए गए हैं।
'मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं...'
हजारे ने 1998 से महाराष्ट्र में आरटीआई के लिए कई आंदोलन किए और मुंबई, रालेगण सिद्धि तथा आलंदी में अनशन किए। उन्होंने कहा कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। पत्र में कहा गया है, यदि 12 जून के संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो मैं 5 जुलाई से रालेगण सिद्धि के यादव बाबा मंदिर में अनशन शुरू करूंगा, चाहे इसकी कीमत मेरी जान ही क्यों न हो।