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अंशुल छत्रपति: पिता के रिकॉर्डिड बयान से पुलिस ने डिलीट किया था डेरा प्रमुख का नाम
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार
Updated Sun, 27 Aug 2017 02:18 AM IST
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Anshul Chhatrapati
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डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरुमीत राम रहीम की दरिंदगी का काला चिठ्ठा अपने अखबार में छापने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति इंसाफ के लिए अपना दिन रात एक कर रहे हैं। 2002 में पत्रकार रामचंद्र ने साध्वी द्वारा पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी गई चिठ्ठी को अपने अखबार में छापकर राम रहीम की घिनौनी हरकत का देशभर में पर्दाफाश किया था।
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अंशुल ने बताया कि उसके पिता एक पत्रकार होने से पहले एक वकील थे। उन्होंने कई मीडिया संस्थानों के साथ काम भी किया। लेकिन पत्रकार रामचंद्र उस समय के बिकाऊ मीडिया से बेहद नाखुश थे। इसलिए उन्होंने अपना 'पूरा सच' नामक अखबार निकाला जिसमें उन्होंने साध्वी की पीएम को लिखी गई चिठ्ठी को छापा।
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अंशुल ने आगे बताया कि उसके पिता को साध्वी की चिठ्ठी अखबार में छापने के बाद कई बार उन्हें जान से मारने की धमकी मिली। हाईकोर्ट ने भी इस मामले में सीबीआई को जांच के आदेश दे दिए। फिर 24 अक्टूबर 2002 में पत्रकार रामचंद्र पर उनके घर के बाहर हमला किया गया जिसमें दो अज्ञात लोगों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलिया बरसाई।
अंशुल ने बताया कि उस समय वे 21 साल के थे लेकिन पुलिस ने राम रहीम के खिलाफ रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया इसके बाद उन्हें मालूम नहीं था कि न्याय के लिये वे कहां जाए। अंशुल ने कहा कि उसके पिता हमले के बाद 28 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे।
उन्होंने आगे कहा कि उसके पिता ने अस्पताल में पुलिस को दिए बयान में राम रहीम को उन पर हमले का जिम्मेदार बताया था। लेकिन पुलिस ने एफआईआर में डेरा प्रमुख का नाम नहीं लिखा। जिस पिस्टल से रामचंद्र पर हमला किया गया वे पिस्टल राम रहीम के लाईसेंस से थी।
पुलिस ने अंशुल के पिता से कोई लिखित बयान नहीं लिया। लेकिन मीडिया और लोगों के घोर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने पत्रकार रामचंद्र का बयान रिकॉर्ड किया। पुलिस ने लोगों के दवाब में आकर रामचंद्र का बयान रिकॉर्ड किया लेकिन बयान से डेरा प्रमुख का नाम डिलीट कर दिया। उसके बाद अंशुल ने सीबीआई जांच के लिए एक याचिका दायर की।
वहीं, 2014 में जांच के आदेश दिए गए जिसे डेरा सच्चा सौदा ने चुनौती दी और सीबीआई पर डेरा प्रमुख को छोड़ने के लिए दवाब बनाया गया। अंशुल ने बताया कि पहले डेरा के लोगों ने उसे केस बंद कराने के लिए दवाब डाला।
अंशुल ने बताया कि डेरा प्रमुख और उसके समर्थकों ने लोगों को बहुत उकसाया। लेकिन अंशुल ने कहा कि डेरा प्रमुख संत की आड़ छुपा एक अपराधी है उसे आजीवन कारावास की सजा मिलनी चाहिए। आज अंशुल की कानूनी लड़ाई ने असली रूप ले लिया जिसके चलते 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने उसे रेप का दोषी करार दिया है।
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बता दें कि जनवरी 2003 में अंशुल ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच के लिए एक याचिका दायर की। नवंबर 2003 में हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए। इसके बाद जुलाई 2007 में सीबीआई ने डेरा प्रमुख के खिलाफ एक चार्जशीट दाखिल की। फिर नवंबर 2014 में सबूतों को पेश किया गया।