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आंध्र प्रदेश : अमरावती में फिर विकास कार्य शुरू कराएंगे मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी
Sun, 16 Aug 2020 05:12 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 16 Aug 2020 05:12 PM IST
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जगन मोहन रेड्डी (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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आंध्र प्रदेश की कार्यकारी राजधानी को अमरावती से विशाखापट्टनम प्रतिस्थापित करने को लेकर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यथास्थिति 27 अगस्त तक लागू कर दी थी। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी की सरकार अमरावती में सभी अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने के लिए और इसे महानगरीय इलाके के रूप में विकसित करने के लिए एक प्रस्ताव लाई है।
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बता दें कि मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने राज्य में तीन राजधानियों का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव के अनुसार विशाखापट्टनम को कार्यकारी राजधानी, कुरनूल को न्यायिक राजधानी और अमरावती को विधायी राजधानी बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही रेड्डी इसे करना चाहते थे। लेकिन अब करीब 14 महीने बाद वह विकास कार्य पूरे कराने का फैसला लिया है।
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30 मई 2019 को जगन मोहन रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के साथ विभिन्न स्तरों हजारों करोड़ रुपये के कार्यों पर रोक लग गई थी। इनमें अमरावती को हाईवे से जोड़ने वाली आठ लेन की सड़क, आंतरिक सड़कें, ट्रंक लाइन, पुलिया निर्माण, सचिवालय के लिए इमारतें, विधानसभा और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए आधिकारिक इमारतें और जजों के लिए आवास आदि कार्य शामिल हैं।
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अमरावती के किसानों ने जगन सरकार की इस तीन राजधानी की योजना को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इन किसानों ने राजधानी शहर के लिए करीब 34 हजार एकड़ जमीन दी है। अदालत ने चार अगस्त को अमरावती की यथास्थिति बीते शुक्रवार तक बनी रहने का आदेश दिया था, जिसे शुक्रवार को 27 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पिछली सरकार ने अमरावती में विभिन्न प्रोजेक्ट पर 10 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च किए थे और अगर प्रशासनिक राजधानी को यहां से विशाखापट्टनम स्थानांतरित किया गया तो यह पूरा खर्च बेकार हो जाएगा। हाईकोर्ट ने जगन सरकार से पूछा कि सरकार उन इमारतों और ढांचों का क्या करेगी जिनका निर्माण हो चुका है।
इससे पहले बुधवार को जगन मोहन ने अमरावती महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को अमरावती पर एक कार्य योजना बनाने और सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के निर्देश दिए थे।