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आंध्र प्रदेश: पारंपरिक लाठी लड़ाई उत्सव के दौरान खून-खराबा, 4 की मौत, 100 घायल;10 ड्रोन, 1000 पुलिसकर्मी तैनात

Fri, 03 Oct 2025 11:26 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवरगट्टू (आंध्र प्रदेश)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवरगट्टू (आंध्र प्रदेश) Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 03 Oct 2025 11:26 PM IST
सार

देवरागट्टू बन्नी त्योहार विजयदशमी पर माला मल्लेश्वर स्वामी के विवाह के बाद शुरू होता है। इसमें ग्रामीण प्रतीकात्मक लाठी लड़ाई करते हैं, और मामूली चोटें आने पर एक दूसरे को हल्दी लगाते हैं।

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Andhra Pradesh: 4 killed, 100 injured in bloodshed during traditional stick-fighting festival
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में देवरगट्टू बन्नी त्योहार के दौरान हुई लाठीबाजी में 4 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा घायल हो गए। उप-जिलाधिकारी मौर्य भारद्वाज ने शुक्रवार को बताया कि एक व्यक्ति की मौत गंभीर सिर की चोट से हुई, जबकि दूसरे की हृदय का दौरा पड़ने से हुई। जिलाधिकारी डॉ ए सीरी ने फोन पर कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया।

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देवरागट्टू बन्नी त्योहार विजयदशमी पर माला मल्लेश्वर स्वामी के विवाह के बाद शुरू होता है। इसमें ग्रामीण प्रतीकात्मक लाठी लड़ाई करते हैं, और मामूली चोटें आने पर एक दूसरे को हल्दी लगाते हैं। पुलिस अधीक्षक विक्रांत पाटिल ने बताया कि झगड़ों को कम करने के लिए 1,000 पुलिसकर्मी और 10 ड्रोन तैनात किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में चोटों की संख्या कम रही है।
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अधिकारियों ने बताया कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना से लगभग तीन लाख श्रद्धालु सदियों पुराने इस अनुष्ठान के लिए श्री माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर में उमड़ पड़े। लगभग 3,500 श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के भैरव रूप में मणि और मल्लासुर राक्षस का वध करने का प्रतीकात्मक अभिनय करते हुए लाठियों से प्रहार किया। भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। गंभीर रूप से घायल सात श्रद्धालुओं को अदोनी सरकारी अस्पताल ले जाया गया जबकि ज्यादातर का इलाज अलुरु अस्पताल में चल रहा है।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष जी. श्रीनिवासुलु ने बताया श्रद्धालुओं का मानना है कि इस अनुष्ठान में लगने वाली चोटें ईश्वरीय आशीर्वाद का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि नेराडिकी, कोथापेटा और आस-पास के गांवों के लोग भगवान शिव के अनुयायियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। दूसरे गांवों के लोग राक्षसों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके परिणामस्वरूप भयंकर झड़पें होती हैं।

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