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Russia-Ukraine War: यूक्रेन में फंसे जगुआर-पैंथर, आंध्र प्रदेश के डॉक्टर ने पीएम मोदी से लगाई बचाने की गुहार
Wed, 05 Oct 2022 12:58 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आंध्र प्रदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आंध्र प्रदेश
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 05 Oct 2022 12:58 PM IST
सार
युद्ध के 7 महीने बाद गिरिकुमार के लिए बहुत कुछ बदल गया। वे जिस कस्बे में रहते थे, वह युद्ध में बर्बाद हो चुका है। जिस हॉस्पिटल में काम करते थे, वह युद्ध शुरू होते ही बंद हो गया और कुछ हफ्ते बाद ही मलबे के ढेर में बदल गया।
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जगुआर और पैंथर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच चल रही जंग के बीच लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। भारत से भी बड़ी संख्या में वहां लोग फंसे। जिन्हें सबकुछ वहां छोड़कर भागना पड़ा। इन्हीं में एक है आंध्र प्रदेश के रहने वाले भारतीय मूल के डॉक्टर गिदिकुमार पाटिल। गिदिकुमार ने बताया कि जिस अस्पताल में बतौर हड्डी रोग चिकित्सक के रूप में तैनात थे, वह युद्ध शुरू होते ही बंद हो गया और कुछ हफ्ते बाद ही मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। मजबूरी में उन्हें यूक्रेन छोड़ना पड़ा, लेकिन उनके दो पालतू जानवर जगुआर और पैंथर वहीं रह गए।
गिदिकुमार पाटिल पूर्वी यूक्रेन में लुहांस्क के कस्बे स्वावतोव में रहते थे। गिदिकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने दोनों पालतू जानवरों को बचाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि दोनों ही उनके बच्चे हैं। युद्ध के दौरान हालात खराब हैं, इस बीच उनके दोनों बच्चे के वहां फंसे हुए है। 24 महीने का एक मेल जगुआर और 14 महीने की फीमेल ब्लैक पैंथर है। दोनों को 2020 में यूक्रेन की राजधानी कीव से खरीदा था। उन्होंने पीएम मोदी से गुहार लगाते हुए कहा कि वे किसी भी तरह जगुआर और पैंथर को भारत मंगवा लें। भले ही उन्हें आंध्र प्रदेश, हैदराबाद या अन्य किसी चिड़ियाघर में रखवा दें। उनकी जान बचनी चाहिए, भले ही दोनों उनसे दूर रहे।
गिदिकुमार ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध से पहले जगुआर और ब्लैक पैंथर की देखभाल में रोजाना 100 से 150 डॉलर का खर्च होता था, लेकिन अब रोजाना 300 डॉलर से ज्यादा खर्च होते हैं। उनकी देखभाल में जमीन का एक हिस्सा, दो घर, दो कारें एवं अन्य सामान बेचना पड़ा था। बेरोजगार होने और जीवनयापन का साधन न होने की वजह यूक्रेन छोड़ना पड़ा। नौकरी की तलाश में पोलैंड आते समय उन्हें रुसी सेना ने पकड़ लिया। 9 सितंबर अपने शहर से निकले थे। 10 सितंबर को एक रुसी सैनिकों ने गिदिकुमार को पकड़ लिया और कीव का पासपोर्ट होने की वजह से जासूस समझकर कैद कर लिया गया।
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उन्होंने बताया कि एक रूसी अधिकारी को अपने कुछ कागजात, पत्नी एवं जानवरों के वीडिया दिखाए। जिसके बाद रुसी सैनिकों ने उन्हें पोलैंड बॉर्डर पर छोड़ दिया। यहां उनका पासपोर्ट रख लिया और पहचान पत्र जारी किया। उन्होंने बताया कि 90 दिनों का वीजा जारी किया गया। अब उन्हें अपने दोनों पालतू जानवर देखने को नहीं मिल रहे हैं।
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गिदिकुमार पाटिल पूर्वी यूक्रेन में लुहांस्क के कस्बे स्वावतोव में रहते थे। गिदिकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने दोनों पालतू जानवरों को बचाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि दोनों ही उनके बच्चे हैं। युद्ध के दौरान हालात खराब हैं, इस बीच उनके दोनों बच्चे के वहां फंसे हुए है। 24 महीने का एक मेल जगुआर और 14 महीने की फीमेल ब्लैक पैंथर है। दोनों को 2020 में यूक्रेन की राजधानी कीव से खरीदा था। उन्होंने पीएम मोदी से गुहार लगाते हुए कहा कि वे किसी भी तरह जगुआर और पैंथर को भारत मंगवा लें। भले ही उन्हें आंध्र प्रदेश, हैदराबाद या अन्य किसी चिड़ियाघर में रखवा दें। उनकी जान बचनी चाहिए, भले ही दोनों उनसे दूर रहे।
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गिदिकुमार ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध से पहले जगुआर और ब्लैक पैंथर की देखभाल में रोजाना 100 से 150 डॉलर का खर्च होता था, लेकिन अब रोजाना 300 डॉलर से ज्यादा खर्च होते हैं। उनकी देखभाल में जमीन का एक हिस्सा, दो घर, दो कारें एवं अन्य सामान बेचना पड़ा था। बेरोजगार होने और जीवनयापन का साधन न होने की वजह यूक्रेन छोड़ना पड़ा। नौकरी की तलाश में पोलैंड आते समय उन्हें रुसी सेना ने पकड़ लिया। 9 सितंबर अपने शहर से निकले थे। 10 सितंबर को एक रुसी सैनिकों ने गिदिकुमार को पकड़ लिया और कीव का पासपोर्ट होने की वजह से जासूस समझकर कैद कर लिया गया।
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उन्होंने बताया कि एक रूसी अधिकारी को अपने कुछ कागजात, पत्नी एवं जानवरों के वीडिया दिखाए। जिसके बाद रुसी सैनिकों ने उन्हें पोलैंड बॉर्डर पर छोड़ दिया। यहां उनका पासपोर्ट रख लिया और पहचान पत्र जारी किया। उन्होंने बताया कि 90 दिनों का वीजा जारी किया गया। अब उन्हें अपने दोनों पालतू जानवर देखने को नहीं मिल रहे हैं।