फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Anantnag Attack Who is breaking intelligence network Hi-tech mask sending military movement video to Pakistan

Anantnag Attack: कौन लगा रहा खुफिया नेटवर्क में सेंध? सैन्य मूवमेंट का वीडियो पाकिस्तान भेज रहे हाइटेक मुखौटे

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 15 Sep 2023 04:17 PM IST
विज्ञापन
सार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की स्थानीय विंग 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' और दूसरे समूह, ओवर ग्राउंड वर्कर के जरिए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। ये ग्राउंड वर्कर ही आतंकियों को हथियार, गोला बारूद एवं दूसरे सामान की सप्लाई करते हैं।
loader
Anantnag Attack Who is breaking intelligence network Hi-tech mask sending military movement video to Pakistan
अनंतनाग आतंकी हमला। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों ने 'सैन्य मूवमेंट' की जानकारी हासिल करने के लिए अपने 'हाइटेक मुखौटे' तैयार कर रखे हैं। ये ऐसे मुखौटे हैं, जिन पर किसी को शक नहीं होता। ये लोग सड़क पर बैठे रहते हैं। वहां से जैसे ही सेना/अर्धसैनिक बलों के वाहन गुजरते हैं तो वे उसका वीडिया बना लेते हैं। इस वीडियो को डार्क वेब, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्किंग और एन्क्रिप्टेड मैसेंजर सेवाएं, मसलन सिग्नल आदि के माध्यम से पाकिस्तान के नंबर पर भेज देते हैं।



इन मुखौटों को 'ओवर ग्राउंड वर्कर' कहा जाता है। इनके द्वारा भेजी गई सूचना या वीडियो के आधार पर ही पाकिस्तान में 'आईएसआई' की टेरर विंग के एक्सपर्ट, जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकियों को यह बताते हैं कि उन्हें किस तरह से ऑपरेशन को अंजाम देना है। जब कहीं पर कोई बड़ा ऑपरेशन शुरु होता है तो सड़क पर मौजूद 'हाइटेक मुखौटों' के बीच की दूरी कम होती चली जाती है। यानी दस किलोमीटर पहले कोई मुखौटा है तो उसके बाद तीन या चार किलोमीटर पर दूसरा मुखौटा बैठा रहता है। सैन्य दस्ता, जहां से अपने वाहन छोड़कर पैदल चलना शुरु करते हैं, वहां तक की जानकारी जुटाई जाती है। 


सुरक्षा एजेंसियों के रडार से दूर रहते हैं ये मुखौटे 
पाकिस्तान के आतंकी संगठनों की सेना/अर्धसैनिक बलों के वाहनों पर सदैव नजर रहती है। इस काम के लिए उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 'ओवर ग्राउंड वर्कर' तैयार किए हैं। ये लोग सड़क किनारे टायर पंक्चर मेकेनिक, चाय की दुकान, फल सब्जी का ठेला या फिर किसी अन्य कामधंधे के नाम पर बैठे रहते हैं। इन्हें ही 'हाइटेक मुखौटे' कहा जाता है। इन्हें सेना या अर्धसैनिक बलों के काफिलों का फोटो खींचने और वीडियो बनाने की जिम्मेदारी दी जाती है।

ये मुखौटे, सैन्य काफिले में कुल कितने वाहन हैं, कितने ट्रक हैं, बसों की संख्या क्या है, कौन से वाहन में जवान सवार हैं, आदि जानकारी जुटाकर उसे पाकिस्तान स्थित कमांडर के साथ साझा करते हैं। ओवर ग्राउंड वर्कर, इंटरनेट की ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें सुरक्षा एजेंसियों के रडार से दूर रखती है। इनमें डार्क वेब, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्किंग और एन्क्रिप्टेड मैसेंजर सेवाएं जैसे सिग्नल आदि शामिल हैं। 



एनआईए ने किया था ऐसे मामलों का खुलासा
पाकिस्तान के आतंकी संगठनों द्वारा हाइटेक मुखौटों के समूहों को कंट्रोल किया जाता है। कहां, कब किसे टारगेट करना है, यह सब सीमा पार से तय होता है। एनआईए ने इस तरह के कई मामलों का खुलासा किया है। कुछ माह पहले ही एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के एक सदस्य को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ में कई खुलासे हुए।

आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहा कुपवाड़ा निवासी मोहम्मद उबैद मलिक ने जांच एजेंसी को बताया कि ओवर ग्राउंड वर्कर, पाकिस्तान स्थित कमांडर के संपर्क में रहते हैं। उबैद मलिक के मामले में दाखिल चार्जशीट में जांच एजेंसी ने कहा था, आरोपी, पाक स्थित कमांडर को गुप्त सूचनाएं भेजता था। किस मार्ग पर सेना या अर्धसैनिक बलों के वाहनों की आवाजाही हो रही है। कितने वाहन हैं, जवान ट्रक या बस में बैठे हैं, जैसे तथ्य नोट करता था। मौका मिलने पर वाहनों की तस्वीर और वीडियो भी बनाए जाते थे। एनआईए ने आरोपी के कब्जे से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में उसकी संलिप्तता को दर्शाने वाले विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए थे। 

'पीएएफएफ' और 'टीआरएफ' का फैला है जाल
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने जम्मू-कश्मीर में अपने सहयोगी समूह 'प्रॉक्सी विंग' खड़े किए हैं। जैश-ए-मोहम्मद की प्रॉक्सी विंग, 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) है, जबकि 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ), 'लश्कर-ए-तैयबा' की 'प्रॉक्सी विंग' है। खास बात है कि इन दोनों 'प्रॉक्सी विंग' को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आतंकी संगठनों की सूची में शामिल कर रखा है। इन दोनों समूहों के लिए काम कर रहे ओवर ग्राउंड वर्करों को पकड़ने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस और एनआईए सक्रिय है। एनआईए ने आतंकी फंडिंग और ओवर ग्राउंड वर्करों की जड़ों तक पहुंचने के लिए कई बार घाटी में रेड की है। इसके तहत कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए हैं। 

आतंकियों तक पहुंचाते हैं आईईडी और दूसरे विस्फोटक  
पाकिस्तान स्थित कमांडर से इन मुखौटों को निर्देश मिलता था कि कब और कहां से उन्हें हथियार, नशीले पदार्थ, नकदी, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (आईईडी) और स्टिकी बम/चुंबकीय बम हासिल करने हैं। घाटी में कौन कहां पर इन्हें तैयार करता है, इनका कच्चा माल कहां से लेना है, आदि जानकारी पाकिस्तानी कमांडर के जरिए मिलती थी। तैयार आईईडी व स्टिकी बम/चुंबकीय बम कहां पर रखे जाएंगे। उन्हें कौन से मार्ग और किस वाहन में ले जाना है, ये सब जानकारी भी कमांडर से ही मिलती है। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भी तैयार आईईडी और दूसरे विस्फोटक पहुंचाए जाते हैं।

आतंकियों का निशाना मुख्य तौर से अल्पसंख्यक समुदाय और सुरक्षा बल होते हैं। पुंछ में सेना के वाहन पर हुए आतंकी हमले का होमवर्क भी इसी तर्ज किया गया था। उस हमले में सेना के पांच जवान शहीद को गए थे। ये आतंकी संगठन, एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया तकनीक का सहारा ले रहे हैं। डार्क नेट जैसी तकनीक तक इन आतंकियों की पहुंच बताई गई है। इन तकनीक के जरिए सुरक्षा एवं जांच एजेंसियां, इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पाती। टॉर ब्राउजर में आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस लगातार बदलता रहता है। 

सप्लाई का काम देखते हैं 'ओवर ग्राउंड वर्कर'
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की स्थानीय विंग 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' और दूसरे समूह, ओवर ग्राउंड वर्कर के जरिए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। ये ग्राउंड वर्कर ही आतंकियों को हथियार, गोला बारूद एवं दूसरे सामान की सप्लाई करते हैं। जम्मू के पीर मीठा पुलिस स्टेशन इलाके का रहने वाला फैजल मुनीर उर्फ अली भाई हथियार और विस्फोटकों की सप्लाई के लिए 'ट्रांसपोर्ट' का कामकाज संभालता था।

एनआईए की पूछताछ में उसने बताया कि इस काम के लिए उसे और दूसरे साथियों को लश्कर-ए-तैयबा से धन प्राप्त होता था। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए सांबा/कठुआ के सीमा क्षेत्र में  हथियारों और बारूद की खेप पहुंचती थी। किसी को शक न हो, इसके लिए उन हथियारों को किसी सुनसान जगह पर रखने की बजाए ओवर ग्राउंड वर्कर के घर में छिपा देते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed