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'ईरानी को हस्तक्षेप ही करना है तो किसी एमपी को ही कुलपति बना दें'

Wed, 11 May 2016 12:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 11 May 2016 12:17 PM IST
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an mp should be made the vice chancellor of the university
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार

कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने ऑफलाइन के मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विकास में बाधा बताया है। उनका कहना है कि मंत्रालय को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए थे।

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इसमें पॉलिटिक्स हुई है। इसमें अलग-अलग गुटों के अलावा एमपी, एमएलए, संघ चालक आदि शामिल रहे। इस तरह के बयान के बाद कुलपति के इस्तीफा तथा छह महीने के लिए छुट्टी पर भेजे जाने की भी चर्चा रही, लेकिन उन्होंने इसे बकवास बताया।
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कुलपति का कहना है कि चार लोगों ने अनशन शुरू किया। उनकी खुद की परेशानी है, इसलिए अनशन पर बैठे। ज्यादा लोग नहीं थे, लेकिन राजनीति हुई। मुझे बताया गया है कि कुछ गुट हैं। इनका पैसा कमाना मकसद है। वही लोग यूनिवर्सिटी को बरबाद करने पर तुले हैं।
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चार लोगों के अनशन में भाजपा, कांग्रेस, सपा, एबीवीपी के नेता शामिल हो गए। मंत्रालय ने ही ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा था। अब उसका हस्तक्षेप ठीक नहीं है। इससे विश्वविद्यालय आगे नहीं बढ़ पाएगा।

विश्वविद्यालय का पुराना गौरव पाने के लिए जो प्रयास शुरू हुए हैं, उसे धक्का लगा है। उन्होंने कहा कि अगर गवर्नमेंट चाहे तो किसी भी वक्त इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। सरकार चाहे तो किसी एमपी को कुलपति बना सकती है।

यह बयान चैनलों पर चलने के बाद कुलपति के इस्तीफा की चर्चा होने लगी। यह भी चर्चा रही कि कुलपति को छह महीने की छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, कुलपति प्रोफेसर हांगलू ने इन चर्चाओं को बकवास बताया।

प्रवेश परीक्षा में मिलेगा ऑफलाइन का विकल्प

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स्मृति ईरानी ने किया हस्तक्षेप - फोटो : PTI

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों के प्रवेश परीक्षा में अभ्यर्थियों को ऑफलाइन का विकल्प दिया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का इस आशय का पत्र विश्वविद्यालय को सोमवार को मिल गया। कुलपति ने भी मंत्रालय के इस पत्र के आधार पर प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इसके बाद प्रवेश पीरक्षा को लेकर बना असमंजस दूर हो गया। परीक्षा के नए प्रारूप तथा कार्यक्रम पर निर्णय के लिए कमेटी ऑफ एडमिशन की बुधवार को दिन में एक बजे बैठक बुलाई गई है।

सोमवार को भाजपा सांसद विनोद सोनकर की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से वार्ता हुई थी। मंत्रालय से ही उन्होंने अनशन पर बैठे छात्रसंघ अधिकारियों को मोबाइल पर जानकारी दी थी कि मंत्री ने ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग मान ली है। इसके बाद मंत्रालय के अफसरों ने कुलपति को फोन करके इसकी जानकारी दे दी थी लेकिन मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने तथा लिखित में कोई निर्देश नहीं होने की वजह से दुविधा बनी रही।

सोमवार को इस आशय का पत्र भी मिल गया। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय को ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। इसलिए मंत्रालय को भी आपत्ति नहीं है। पत्र के इस प्रारूप को लेकर भी विश्वविद्यालय में गतिरोध बना रहा। हालांकि कुलपति की ओर से प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को निर्देश जाने के बाद सभी तरह की दुविधा दूर हो गई है। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने बताया कि मंत्रालय से पत्र मिल गया है। निर्देश का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को कहा गया है।

प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि पत्र में ऑफलाइन का विकल्प सभी पाठ्यक्रमों में दिया जाएगा। इसके लिए परीक्षा प्रारूप और कार्यक्रम में व्यापक परिवर्तन करना पड़ेगा। इस पर निर्णय के लिए बुधवार को कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया है।

अब जुलाई से पहले दाखिला होना मुश्किल

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बीत चुकी है आवेदन की आखिरी तारीख

विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने के फैसले के बाद नया सत्र शुरू होने से पहले दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद धूमिल हो गई है। इस फैसले के बाद दाखिले की पूरी प्रक्रिया बदल जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को इसके लिए नए सिरे से नोटिफिकेशन करना होगा। आवेदन की आखिरी तारीख बीत चुकी है।

25 से 30 मई के बीच प्रवेश परीक्षा घोषित थी लेकिन अब उसमें परिवर्तन करना होगा। आवेदन के लिए छात्र-छात्राओं को अतिरिक्त मौका देना होगा। जो आवेदन कर चुके हैं उनसे नए सिरे से परीक्षा मोड के लिए विकल्प मांगा जाएगा।

ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने के बाद परीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया भी लंबी हो जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा के लिए टीसीएस से समझौता किया है। इस फैसला के बाद अब टीसीएस से भी नए सिरे से समझौता करना पड़ेगा। ऐसे में पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी।

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