Amritpal Singh: गिरफ्तारी से पहले यह बड़ी गलती कर बैठा अमृतपाल, पहले भी कुछ ऐसा ही किया था इस कट्टरपंथी ने
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विस्तार
खालिस्तान की मांग करने वाले कट्टरपंथी अमृतपाल ने अपनी गिरफ्तारी के दिन ऐसी गलती कर दी, जिसका खामियाजा उसे अब हमेशा भुगतना पड़ेगा। दरअसल उसने यह गलती भिंडरावाले की तस्वीर के सामने बैठकर अरदास करने की है। सिख संगत से जुड़े विद्वानों का मानना है कि जिस गुरुद्वारे में अमृतपाल ने भिंडरावाले की तस्वीर के सामने बैठकर अरदास की है, वहां पर पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाशमान हैं। इसलिए सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अमृतपाल ने भिंडरावाले की तस्वीर के सामने अरदास करके सिख समुदाय में गलत संदेश दिया है। सिख समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अमृतपाल पहले से ही देश विरोधी बातें करता था, बल्कि धर्म की आड़ लेकर उसने ऐसा कृत्य करके धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया है।
अमृतपाल का कृत्य माफी लायक नहीं
अमृतपाल की गिरफ्तारी को लेकर समूचे देश में चर्चाएं हो रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर अमृतपाल ने अपनी गिरफ्तारी के दिन भिंडरावाले के गांव को ही क्यों चुना? सियासी जानकारों का मानना है कि वह अलगाववादी आंदोलन 'मिशन खालिस्तान' को जिंदा रखना चाहता था, इसीलिए उसने खालिस्तान के समर्थक रहे भिंडरावाले के गांव में जाकर आत्मसमर्पण किया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य रहे सरदार तेजपाल सिंह कहते हैं कि भिंडरावाले की तस्वीर को सामने रखकर अरदास करना वह भी गुरुद्वारे के भीतर बिल्कुल ठीक नहीं है। उनका कहना है गुरुद्वारे में पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाशमान हैं। ऐसे में अमृतपाल का यह कृत्य माफी लायक भी नहीं है।
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तेजपाल कहते हैं कि सिख धर्म में मान्यता है कि अपने दस गुरुओं और गुरु ग्रंथ साहिब के सिवा और कहीं नतमस्तक नहीं होना है। ऐसे में गुरुद्वारा साहिब के भीतर भिंडरावाले की तस्वीर को सामने रखना पूरी तरीके से गलत ही है। सिख समुदाय से जुड़े विद्वानों का मानना है कि अमृतपाल ने जिस तरीके से पंजाब के युवाओं को बरगलाने और भड़काने का काम किया है, वह पूरी तरीके से गलत तो था ही, अब उसने गुरुद्वारे के भीतर भिंडरावाले की तस्वीर रखकर अरदास करके धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया है। सिख समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अमृतपाल शुरुआत से ही इसी तरह के कृत्य करता आया है।
धर्म को आगे रखकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश
सिख समुदाय से जुड़े विद्वानों का मानना है कि अमृतपाल ने शुरुआत से ही सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने की कुटिल साजिश रचनी शुरू कर दी थी। इन लोगों का कहना है कि जिस तरीके से अजनाला थाने पर हमले के दौरान वह पालकी लेकर पहुंचा, उससे उसके इरादे स्पष्ट हो गए थे कि वह किस तरीके से धर्म को आगे रखकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। अजनाला थाने पर हमले के दौरान अमृतपाल के इस तरह से थाने पर हमला करने को लेकर सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भर के सिख समुदाय ने विरोध भी किया था। अपनी गिरफ्तारी वाले दिन भी उसने रोड़े गांव में जाकर भिंडरावाले की तस्वीर के सामने अरदास की।
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अमृतपाल की गिरफ्तारी और उसके इरादों को लेकर सुरक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि उसकी मंशा बहुत पाक साफ नहीं है। सुरक्षा मामलों से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ बताते हैं कि अमृतपाल ने धर्म की आड़ में न सिर्फ अपनी गिरफ्तारी का पूरा ताना-बाना बुना। बल्कि "मिशन खालिस्तान" के संदेश को जिंदा रखने का प्रोपेगेंडा भी तैयार किया। हालांकि इस पूरे मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अमृतपाल के किसी भी नापाक मंसूबों को कामयाब तो नहीं होने दिया जाएगा, बल्कि उसने अब तक जितना भी जहर बोया है, उसे भी पूरी तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा।