Amrit Bharat Scheme: रेलवे स्टेशन नहीं अब ‘सिटी सेंटर’, 172 स्टेशनों का मेकओवर हुआ पूरा, जानें क्या हुआ बदलाव
भारतीय रेलवे अपने स्टेशनों के मेकओवर को लेकर तेजी से काम कर रहा है। इसी दिशा में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 172 रेलवे स्टेशनों की आधुनिकीकरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
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भारतीय रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण को लेकर लगातार काम कर रहा है। अब तक देश में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 172 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास का काम पूरा कर लिया गया है। रेल मंत्री ने लोकसभा में बताया कि,इन स्टेशनों को अब पहले से ज्यादा आधुनिक, सुविधाजनक और यात्रियों के लिए अधिक आरामदायक बनाया गया है। योजना का उद्देश्य सिर्फ स्टेशन का सौंदर्यीकरण नहीं है, बल्कि इन्हें सिटी सेंटर के रूप में विकसित करना है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत तैयार किए गए 172 स्टेशनों पर अब यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इन स्टेशनों पर यात्री संख्या के हिसाब से चौड़े फुटओवर ब्रिज, एस्केलेटर और लिफ्ट लगाए गए हैं। रेलवे ने स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया है कि वे शहर के दोनों हिस्सों को जोड़ने में मदद कर सकें। यहां रूफ प्लाजा, बेहतर वेटिंग हॉल और साफ-सुथरे शौचालय बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन, कियोस्क, और हाईटेक पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम भी लगाया गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना की यह सिर्फ शुरुआत है। इस योजना के तहत देशभर में कुल 1,337 स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चुना गया है। सभी स्टेशनों पर टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए चौड़े फुटओवर ब्रिज, एस्केलेटर और लिफ्ट, बेहतर पार्किंग, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके साथ ही मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन और यात्रियों के लिए कियोस्क जैसी व्यवस्था भी योजना का हिस्सा हैं।
यात्री सुविधाओं के साथ साथ रेलवे ने सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2022 से दिसंबर 2025 के बीच 8,626 रेलवे पुलों की मरम्मत, मजबूती और पुनर्निर्माण का काम पूरा किया गया है। रेलवे के पुलों की जांच साल में दो बार अनिवार्य रूप से की जाती है। एक बार मानसून से पहले और दूसरी बार मानसून के बाद। जरूरत पड़ने पर चीफ ब्रिज इंजीनियर की सलाह पर कुछ पुलों की जांच अधिक बार भी कराई जाती है। वहीं, सब वे और रोड अंडर ब्रिज में जलभराव की समस्या कम करने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं।