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आम्रपाली के सीएमडी, डायरेक्टर्स ने खरीदारों के पैसे से खरीदी ज्वैलरी, कारें और घर

Fri, 03 May 2019 09:46 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 03 May 2019 09:46 AM IST
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Amrapali CMD and directors used homebuyers money to acquire luxury cars, houses, jewellery
फाइल फोटो - फोटो : Twitter

आम्रपाली के मुख्य प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा और अन्य निदेशक रीयल एस्टेट कंपनी को अपनी निजी जागीर के तौर पर चला रहे थे। फोरेंसिक ऑडिटर्स मे उच्चतम न्यायालय को बताया कि खरीदारों के पैसों का इस्तेमाल एक शादी में लगा दिया गया। इसके अलावा उनके पैसों से लग्जरी कारें, घर, ज्वैलरी खरीदी गई और शेयर और म्युचुअल फंड्स में निवेश किया गया।

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ऑडिटर्स पवन कुमार अग्रवाल और रवि भाटिया ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी हैं। उन्होंने यह फोरेंसिक रिपोर्ट आम्रपाली समूह की 46 पंजीकृत कंपनियों और बहुत सी शेल (फर्जी) कंपनियों के निदेशकों और बैंक अकाउंट की जांच के बाद जमा कराई है। उन्होंने बताया है कि कैसे खरीददारों के 3,500 करोड़ रुपये को निर्माण कार्य में लगाने की बजाए अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया।
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रिपोर्ट का कहना है कि शर्मा और निदेशक शिव प्रिया को 2016 में नोटबंदी के समय नकद 12 करोड़ रुपये अस्पष्ट राशि के तौर पर मिले थे। 2500 पेजों की इस रिपोर्ट में ऑडिटर्स का कहना है कि निदेशकों और उनके परिवार के सदस्यों को इससे फायदा पहुंचा। रिपोर्ट में कहा गया है कि शर्मा और चार निदेशकों को अवैध तरीके से प्रोफेशनल फीस के तौर पर 67 करोड़ रुपये मिले जबकि उन्हें कंपनी से तनख्वाह मिलती थी और वह ऐसी किसी भी फीस के हकदार नहीं थे।
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रिपोर्ट में कहा गया है, 'एक शख्स या तो कंपनी का कर्मचारी हो सकता है या फिर उसे प्रोफेशनल सेवा प्रदान कर सकता है। हालांकि कोई भी शख्स एक ही समय पर एक ही कंपनी से तनख्वाह और प्रोफेशनल फीस नहीं ले सकता है। आम्रपाली समूह से निदेशकों को बहुत बड़ी राशि प्रोफेशनल चार्ज के तौर पर मिली थी जिसके लिए न तो ऐसा कोई समझौता था और न ही सेवा का कोई सबूत उनके द्वारा प्रदान किया गया।'

आम्रपाली के वकीलों को फीस में मिले फ्लैट और पेंटहाउस 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आम्रपाली समूह के वकीलों को फीस के तौर पर फ्लैट और पेंटहाउस दिए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि यह कानून का उल्लंघन है। फोरेंसिक लेखा परीक्षक अग्रवाल ने गुरुवार को अदालत में किसी वकील का नाम लिए बिना कहा, मैं ऐसे वकीलों से आग्रह करता हूं कि वे ये फ्लैट और पेंटहाउस जल्द से जल्द लौटा दें। चक्कर काटने पड़ते हैं।

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