अमित शाह के बस्ती दौरे से पहले शुरू हुई पोस्टर वार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 1 जुलाई को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जाएंगे जहां वो गोरक्ष प्रांत के बूथ अध्यक्ष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन को लेकर एक ओर जहां पार्टी के कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय प्रभारियों ने पूरी ताकत झोंक दी है वहीं दूसरी ओर यहां भी इलाहाबाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक की तरह पोस्टर वार शुरू हो चुका है।
आलम ये है कि आगामी 2017 विधानसभा चुनावों के लिए टिकट के दावेदारों ने पूरे शहर को पोस्टर से रंग दिया है। इतना ही नहीं शहर में जिनते भी स्थानों पर स्वतंत्रता सेनानियों और अन्य विभूतियों की मूर्तियां लगी हैं उन्हें भी इस कदर पोस्टर से ढक दिया है कि कोई चाह कर भी प्रत्याशी के पोस्टर के अलावा मूर्ति को नहीं देख सकता।
इस संबंध में नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता ने अमर उजाला को बताया कि शाह के आने से कार्यकर्ताओं में जोश है और वो कोई कमी नहीं रखना चाह रहे हैं।
स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां हुई गायब
उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया कि टिकट के दावेदार भी कोई कमी नहीं रखना चाहते लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों समेत शहर में लगे अन्य विभूतियों की मूर्तियों पर इस तरह से पोस्टर का अतिक्रमण गलत है। गौरतलब है कि बस्ती आ रहे शाह की रणनीति में प्रमुखतः दलित और पिछड़े वर्ग के लोग शामिल है जिन्हें प्रायः बसपा का मतदाता माना जाता रहा है।
बता दें कि 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा कोई कमी नहीं रखना चाहती इसलिए खुद शाह कार्यकर्ताओं में जोश जगाने के लिए यात्रा कर रहे हैं। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल भी महत्तवपूर्ण क्षेत्र है।
शाह पूर्वांचल के हर उस इलाके का दौरा कर रहे हैं जहां भाजपा की स्थिति खराब है। पूर्वांचल से भाजपा के कुल 17 विधायक ही हैं वहीं सपा के 106, कांग्रेस के 13 और बसपा के 23 विधायक सदन में है। मौजूदा आंकड़ो से यह साफ जाहिर है कि पूर्वांचल में भाजपा की सीधी लड़ाई सपा से है।