फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Amit Shah says National Cooperative Policy announced soon states to be able change it according their own

अमित शाह बोले: राष्ट्रीय सहकारिता नीति जल्द, राज्य अपने हिसाब से बदल सकेंगे; 5 साल में हर गांव में बनेगी समिति

Tue, 01 Jul 2025 05:41 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 01 Jul 2025 05:41 AM IST
सार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को देशभर के सहकारिता मंत्रियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करके ही भारत आजादी के शताब्दी वर्ष तक एक आदर्श सहकारी राष्ट्र बन सकेगा। 
 

विज्ञापन
Amit Shah says National Cooperative Policy announced soon states to be able change it according their own
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार जल्द ही राष्ट्रीय सहकारिता नीति की घोषणा करेगी, जो 2025 से 2045 तक यानी आजादी के शताब्दी वर्ष के कुछ समय पहले तक अमल में रहेगी। इसी राष्ट्रीय सहकारिता नीति के आधार पर सभी राज्य अपनी जरूरतों के अनुरूप सहकारिता नीति तैयार कर लक्ष्य भी तय कर सकेंगे।

विज्ञापन


केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को देशभर के सहकारिता मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करके ही भारत आजादी के शताब्दी वर्ष तक एक आदर्श सहकारी राष्ट्र बन सकेगा। सहकारिता क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए आयोजित मंथन बैठक का उद्देश्य मौजूदा योजनाओं की समीक्षा, उपलब्धियों का आंकलन और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करना है।
विज्ञापन


सहकारिता मंत्रालय की तरफ से आयोजित इस बैठक में शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में पुराने सहकारिता के संस्कार को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ नए परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखकर ही सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की थी। शाह ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच साल में देश में एक भी गांव ऐसा न रहे, जहां एक कोई कोऑपरेटिव न हो और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सहकारी डाटाबेस का उपयोग किया जाना चाहिए। शाह ने कहा कि देश में मोदी सरकार आने के बाद ही सामाजिक परिवर्तन का एक नया परिदृश्य सामने आया। पहले भारत में लगभग 60-70 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनके पास कई पीढ़ियों तक जीवन जीने की मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थीं। 2014 से 2024 तक के कालखंड में ही मोदी सरकार ने करोड़ों लोगों का सपना पूरा कर दिया और इन्हें घर, शौचालय, पीने का पानी, अनाज, स्वास्थ्य, गैस सिलिंडर आदि सुविधाएं मिलने लगीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: बड़ी उपलब्धि: सीआईएसएफ कैडर के आईजी रैंक अफसरों में 50% महिलाएं; लैंगिक समानता की मिसाल बना रक्षा बल

सहकारिता से बदल सकता है जीवन
शाह ने कहा कि करोड़ों लोग अब अपने जीवन को और बेहतर बनाने के लिए उद्यम करना चाहते हैं, लेकिन इनके पास पूंजी नहीं है। इन करोड़ों लोगों की छोटी-छोटी पूंजी से बड़ा काम करने का एकमात्र रास्ता सहकारिता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए दो चीजें बेहद जरूरी हैं-एक, जीडीपी और जीएसडीपी का विकास और 140 करोड़ लोगों के लिए रोजगार का सृजन। देश के हर व्यक्ति को काम मुहैया कराने के लिए सहकारिता के सिवा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
शाह ने कहा, संवेदनशीलता के साथ देश के करोड़ों छोटे किसानों और ग्रामीणों के कल्याण के लिए सहकारिता को पुनर्जीवित करना ही होगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इसे सफल बनाने के लिए भारत सरकार ने 60 पहल की हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण पहल है राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस का निर्माण, जिसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि कमी कहां रह गई है। राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस इसीलिए बनाया गया कि राष्ट्रीय, राज्य, जिला और तहसील स्तर की सहकारी संस्थाएं मिलकर ये देख सकें कि किस राज्य के किस गांव में एक भी सहकारी संस्था नहीं है।


ये भी पढ़ें: आज से रेल का सफर होगा महंगा: MST की कीमतों में बदलाव नहीं; किस श्रेणी में कितना बढ़ा किराया, जानें सबकुछ

त्रिभुवन यूनिवर्सिटी की भूमिका व्यापक बनाएंगे
शाह ने कहा कि भारत में सहकारिता आंदोलन छिन्न-भिन्न होने की तीन वजहें रही हैं। एक तो समय के साथ कानून नहीं बदले गए, सहकारिता गतिविधियों में समय के साथ बदलाव नहीं किए गए और फिर इस क्षेत्र में सारी भर्तियां भाई-भतीजावाद से होती थीं। मोदी सरकार ने इस दिशा में बदलाव किए और त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी स्थापित की गई। शाह ने सभी राज्यों से कहा कि कम से कम एक सहकारिता प्रशिक्षण संस्था को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के साथ जोड़ें। इसके जरिये राज्य के कोऑपरेटिव आंदोलन की ट्रेनिंग की समग्र व्यवस्था त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के माध्यम से की जाए।

नवगठित बहु-राज्य सहकारी समितियों के कामकाज की समीक्षा
बैठक के दौरान तीन नवगठित राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी समितियों-राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लि., राष्ट्रीय सहकारी जैविक लि. और भारतीय बीज सहकारी समिति लि. के कामकाज में राज्यों की भूमिका की समीक्षा की गई। साथ ही एक टिकाऊ और सर्कुलर डेयरी अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से श्वेत क्रांति 2.0 पहल पर विचार विमर्श किया गया।

संबंधित वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed