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Amit Shah on Census: 'देश में बहुत जल्द कराई जाएगी जनगणना', अमित शाह ने किया बड़ा एलान

Tue, 17 Sep 2024 01:57 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 17 Sep 2024 01:57 PM IST
सार

भारत में 1881 से हर 10 साल में जनगणना की जाती है। इस दशक की जनगणना का पहला चरण एक अप्रैल, 2020 को शुरू होना था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टालना पड़ा था।
 

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Amit Shah says a decision on caste census will be made public with Census announcement news in hindi
अमित शाह - फोटो : ANI

विस्तार

देश में जनगणना कराए जाने पर आए दिन राजनीति हो रही है। अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इसके संकेत दे दिए हैं कि भारत में जल्द जनगणना होने जा रही है। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में तारीख को लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा है। 

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हाल ही में खबरें आई थीं कि देश में जनगणना की तैयारियां चल रही हैं। जनगणना के बारे में सवाल पूछे जाने पर शाह ने कहा कि हम बहुत जल्द इसकी घोषणा करेंगे। बता दें, साल 2011 के बाद से देश में जनगणना नहीं हुई है। 

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मोदी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ अमित शाह ने एक संवाददाता सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने जाति आधारित जनगणना पर भी बता की। उन्होंने कहा, ‘जब हम जनगणना की घोषणा करेंगे तो हम सभी जानकारियां सार्वजनिक करेंगे।’

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इसलिए नहीं हुई जनगणना
भारत में 1881 से हर 10 साल में जनगणना की जाती है। इस दशक की जनगणना का पहला चरण एक अप्रैल, 2020 को शुरू होना था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टालना पड़ा था।

शाह की यह टिप्पणी जाति आधारित जनगणना कराने की राजनीतिक दलों की मांग के बीच आई है। नए आंकड़ों के अभाव में सरकारी एजेंसियां अब भी 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नीतियां बना रही हैं और सब्सिडी आवंटित कर रही हैं।




पहली बार होगी डिजिटल जनगणना
अधिकारियों ने बताया कि पूरी जनगणना और एनपीआर प्रक्रिया पर सरकार के 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की संभावना है। यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसके जरिए नागरिकों को स्वयं गणना करने का अवसर मिलेगा। इसके लिए जनगणना प्राधिकरण ने एक स्व-गणना पोर्टल तैयार किया है, जिसे अभी लॉन्च नहीं किया गया है। स्व-गणना के दौरान आधार या मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से जुटाया जाएगा।
 

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