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New Criminal Laws: अमित शाह ने की नए कानूनों की समीक्षा, बोले- बायोमैट्रिक तकनीक से करें अज्ञात शवों की पहचान
Tue, 24 Dec 2024 01:30 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Tue, 24 Dec 2024 01:30 PM IST
सार
गृह मंत्री ने कहा कि पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए सभी आपराधिक मामलों के पंजीकरण से लेकर उसको निपटाने तक सभी चरणों के लिए समयसीमा तय की जाए। इसके अलावा जांच अधिकारियों के साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी समय सीमा के मुताबिक अलर्ट भेजे जाएं। ताकि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
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एनसीआरबी अधिकारियों के साथ बैठक करते गृह मंत्री अमित शाह।
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अधिकारियों के साथ नए आपराधिक कानूनों को लेकर समीक्षा बैठक की। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अज्ञात शवों और अज्ञात लोगों की पहचान बायोमैट्रिक तकनीक से की जाए। साथ ही आपराधिक मामलों की जांच में भी तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए।
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Union Home Minister Amit Shah chaired a review meeting on the implementation of three new criminal laws with National Crime Records Bureau (NCRB) in New Delhi. pic.twitter.com/P3tsjukAuZ
— ANI (@ANI) December 24, 2024विज्ञापन
गृह मंत्री ने कहा कि पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए सभी आपराधिक मामलों के पंजीकरण से लेकर उसको निपटाने तक सभी चरणों के लिए समयसीमा तय की जाए। इसके अलावा जांच अधिकारियों के साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी समय सीमा के मुताबिक अलर्ट भेजे जाएं। ताकि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
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बैठक में अखिल भारतीय स्तर पर अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस 2.0), फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस), जेल, न्यायालय, अभियोजन और फॉरेंसिक को आईसीजेएस 2.0 के साथ जोड़ने को लेकर चल रही प्रक्रिया को लेकर हुई प्रगति की समीक्षा की गई। गृह मंत्री ने एनसीआरबी से आईसीजेएस 2.0 में नए आपराधिक कानूनों को लागू करने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, ई-साइन और ई-सम्मन एप के उपयोग पर जोर दिया जाए। इसके साथ ही गृह मंत्रालय और एनसीआरबी अधिकारियों की टीम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा करे। टीमें एप समेत नई तकनीकी जानकारियां देने और उन्हें लागू करने में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की मदद करे। इसके साथ ही राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस संरचनाओं के साथ नियमित बातचीत की जाए। उन्होंने कहा कि एनसीआरबी को जांच अधिकारियों और आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों की मदद के लिए विस्तृत डाटा तैयार करना चाहिए।
कब लागू हुए तीन नए आपराधिक कानून
एक जुलाई से तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनयम देशभर में लागू हो गए हैं। इन कानूनों ने क्रमशः भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) और पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। आईपीसी की जगह लेने वाली भारतीय न्याय संहिता में अब 511 धाराओं के स्थान पर 358 धाराएं हैं। इसमें 21 नए अपराध जोड़े गए हैं, 41 अपराधों में कारावास की अवधि बढ़ाई गई है, 82 अपराधों में दंड बढ़ाया गया है, 25 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा की शुरुआत की गई है, 6 अपराधों में सजा के रूप में सामुदायिक सेवा का प्रावधान है और 19 धाराओं को समाप्त किया गया है।