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Lok Sabha: कश्मीर पर नेहरू ने ऐतिहासिक भूल की...पीओके हमारा, लोकसभा में बोले गृह मंत्री अमित शाह

Thu, 07 Dec 2023 12:15 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 07 Dec 2023 12:15 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक और जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पर बुधवार को चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने अनुच्छेद 370 और 35 ए को राज्य में आतंकवाद की भेंट चढ़े 45,000 लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहराया। 

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Amit Shah blames Jawaharlal Nehru for Jammu-Kashmir blunders says Pok is Part of india in Lok sabha
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : एजेंसी

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियों से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) बना, लेकिन यह हमारा है। शाह ने कश्मीर समस्या के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार की ओर से जल्द संघर्ष विराम और मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने को नेहरू की दो ऐतिहासिक गलतियां बताईं।  

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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक और जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पर बुधवार को चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने अनुच्छेद 370 और 35 ए को राज्य में आतंकवाद की भेंट चढ़े 45,000 लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहराया। शाह ने पूर्व पीएम नेहरू के शेख अब्दुल्ला को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा, नेहरू ने खुद माना था कि संघर्ष विराम व  संयुक्त राष्ट्र में जाना उनकी गलती थी। शाह ने कहा, जब आजादी के बाद 560 रियासतों के विलय में जनमत संग्रह का प्रश्न नहीं आया तो कश्मीर के लिए यह मांग कहां तक उचित थी।
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दोनों विधेयकों पर चर्चा के बाद लोकसभा की मुहर लग गई। पुनर्गठन विधेयक में विधानसभा सीटें बढ़ाकर 114 करने, विस्थापितों के लिए दो व पीओके के लिए एक सीट आरक्षित करने व एसटी सुरक्षित सीटों का प्रावधान है। आरक्षण संशोधन बिल में कमजोर वर्ग के लिए पहली बार अन्य पिछड़ी जातियों का उपयोग हुआ है।
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आप में हिम्मत नहीं थी, हमने उखाड़ फेंका
शाह ने कहा कि संविधान में भी अनुच्छेद 370 को अस्थायी व्यवस्था बताया गया था। मगर राज्य पर अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए किसी ने इसे खत्म करने की जरूरत महसूस नहीं की। इसके उलट सब इसे बचाने में लगे रहे। हमने आजादी के बाद ही इसे खत्म करने की प्रतिज्ञा की थी। हमें मौका मिला, हममें साहस था, इसलिए हमने इसे उखाड़ फेंका।

खून की नदियों की बात, पर कंकड़ तक फेंकने की हिम्मत नहीं
शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 व 35 ए राज्य में समानता का अधिकार, विकास और शांति के लिए नासूर की तरह थे, इन्हें हटाना कई लोगों को जूते में कंकड़ की तरह महसूस होता है। इसी सदन में कहा गया कि अगर यह हटा तो राज्य में खून की नदियां बह जाएंगी। मगर ऐसा कहने और सोचने वाले वहां कंकड़ तक फेंकने की हिम्मत नहीं कर पा रहे।

लंदन घूमने वाले करते हैं कुर्बानी की बात
शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, आतंकवाद के कारण हजारों लोग विस्थपित हुए। सैकड़ों मारे गए। उनकी संपत्ति हथिया ली गई। शासन-प्रशासन या किसी दल ने उनका साथ नहीं दिया। उस दौरान कोई लंदन घूम रहा था, मगर यही लोग अब राज्य के लिए कुर्बानी देने वाले इतिहास की याद दिला रहे हैं। आजादी के 70 वर्ष बाद तक एक बड़े वर्ग को सुविधा विहीन रखने की याद नहीं दिलाते।


शाह की टिप्पणी से भड़की कांग्रेस, बहिर्गमन
संघर्ष विराम व मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने को नेहरू की ओर से खुद भूल बताने पर कांग्रेस सांसदों ने हंगामे के बाद संसद से बहिर्गमन किया। कांग्रेस के नेता अधीररंजन चौधरी ने कहा कि शाह गलतबयानी कर रहे हैं। कांग्रेस के बहिर्गमन पर शाह ने कहा, मुझे पता था कि कश्मीर के जरूरी सवालों का कांग्रेस सामना नहीं कर पाएगी। यदि संघर्ष विराम के लिए तीन दिन इंतजार किया गया होता तो पीओके भारत का होता।

राज्य में पहली बार एसटी के लिए नौ सीटें

  • जम्मू और कश्मीर के इतिहास में पहली बार 9 सीटें एसटी के लिए आरक्षित की गई हैं और अनुसूचित जाति के लिए भी सीटों का आरक्षण किया गया है।
  • पहले जम्मू में 37 सीटें थीं जो अब 43 हो गई हैं, कश्मीर में पहले 46 सीटें थीं वो अब 47 हो गई हैं और पाक-अधिकृत कश्मीर की 24 सीटें रिजर्व रखी गई हैं।
  • शाह ने कहा, पहले जम्मू और कश्मीर विधानसभा में 107 सीटें थीं, अब 114 सीटें हो गई हैं। पहले विधानसभा में दो नामित सदस्य होते थे, अब 5 होंगे।  
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