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दूर नहीं मुजफ्फराबाद!: भारत के इस दांव से पीओके में बढ़ी चिंता, पाकिस्तान के इस सबसे बड़े नेता ने कहा- अब बचाना मुश्किल

Thu, 31 Mar 2022 02:53 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 31 Mar 2022 02:53 PM IST
सार

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने अमर उजाला डॉट कॉम से फोन पर हुई बातचीत में इस बात को स्वीकार किया कि सिर्फ मुजफ्फराबाद ही नहीं बल्कि समूचे बलूच इलाके में जिस तरह से लोगों में पाकिस्तान सरकार और इमरान खान के प्रति नाराजगी बढ़ी है वह पाकिस्तान सरकार की कमजोर नीतियों को ही उजागर करती है...

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Amidst the no confidence motion against Imran khan government, may leaders believe that it is very difficult to save PoK Muzaffarabad
मुजफ्फराबाद - फोटो : Agency

विस्तार

पाकिस्तान में मचे सियासी घमासान के बीच उनके ही मुल्क के कद्दावर नेता यह मानने लगे हैं कि आज नहीं तो कल पीओके और मुजफ्फराबाद को बचा पाना बहुत मुश्किल होगा। पीओके में भी पाकिस्तान से आजाद होने के आंदोलन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि पाकिस्तान के अंदरूनी राजनीतिक हालात के बीच अवाम और उनके नेताओं की ओर से पीओके पर कमज़ोर पड़ती पकड़ और इसकी स्वीकारोक्ति भारत की स्थिति को मजबूत कर रही है।

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बिलावल भुट्टो ने कही ये बड़ी बात

पाकिस्तान इमरान खान की सरकार को अपना कार्यकाल पूरा करने के लाले पड़े हुए हैं। इसी बीच पाकिस्तान के ही कद्दावर नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस बात को खुलकर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की कमजोर नीतियों के चलते ही मुजफ्फराबाद और पीओके को बचा पाना उनके लिए बड़ा मुश्किल हो रहा है। दरअसल बिलावल भुट्टो ने इससे पहले भी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर ऐसी ही बयानबाजी की थी। पाकिस्तान में पीओके पर कमजोर पड़ती पकड़ पर रक्षा मामलों के विशेषज्ञ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल एचएस रावत कहते हैं कि बीते कुछ दिनों में ऐसे हालात बनने शुरू हुए हैं जिससे पूरे पाकिस्तान में इस बात की चर्चा खुलेआम होने लगी है।

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वे कहते हैं, दरअसल भारत ने बीते कुछ समय में जिस तरीके से कश्मीर घाटी में लोगों की समृद्धि, जीवन शैली और उनकी जिंदगी में सुधार को लेकर जो कदम उठाए हैं, वह पूरी दुनिया में सराहे जा रहे हैं। रावत कहते हैं, जिस तरीके से 370 को खत्म किया है उसके बाद से तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से फैलाए जाने वाले आतंकवाद पर अंकुश लगा है। यही कुछ बड़ी वजह है जिससे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों को अहसास भी हो रहा है कि आने वाले वक्त में पूरे कश्मीर में और ज्यादा अमन कायम होगा।

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पाकिस्तान सरकार और इमरान खान से जनता नाराज

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने अमर उजाला डॉट कॉम से फोन पर हुई बातचीत में इस बात को स्वीकार किया कि सिर्फ मुजफ्फराबाद ही नहीं बल्कि समूचे बलूच इलाके में जिस तरह से लोगों में पाकिस्तान सरकार और इमरान खान के प्रति नाराजगी बढ़ी है वह पाकिस्तान सरकार की कमजोर नीतियों को ही उजागर करती है। उनका कहना है कि बीते कुछ दिनों में अगर आप पाकिस्तान के सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की भाषा को समझें, तो उनके अंदर हताशा भी नजर आ रही है। इसके पीछे उनके दो तर्क थे। पहला तर्क सत्तापक्ष के नेताओं की हताशा को लेकर यह था कि उनके हाथ से सत्ता जा रही है, इसलिए वे हताश हैं। दूसरी तरफ, भारत से प्रतिस्पर्धा के मामले में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त तरीके से पिछड़ रहे हैं, इसलिए भी उनके अंदर हताशा भरी हुई है। विपक्षी इस बात को लेकर नाराज है कि कमजोर नीतियों के चलते मुजफ्फराबाद और बलूचिस्तान में सरकार के खिलाफ ही आवाज बुलंद हो रही है। उनको डर है कि अगर ऐसी नीतियां रहीं, तो उनके हाथ से मुजफ्फराबाद तो जाएगा ही जाएगा बल्कि बलूचिस्तान भी पाकिस्तान से टूट कर अलग हो सकता है।



इस पूरे मामले में भारत के एक पूर्व राजनयिक का कहना है कि हमारा देश किसी भी मुल्क के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देता है। इसलिए पाकिस्तान के अंदर क्या चल रहा है, उससे भारत को कोई लेना-देना नहीं है। इतना जरूर है कि उसका असर हमारे देश पर या राजनीतिक परिदृश्य पर क्या होगा, उसका दुनिया के सभी देश और उनकी एजेंसियां बारीकी से अध्ययन करती रहती हैं। उक्त राजनयिक का मानना है कि जिस तरीके से पीओके में पाकिस्तान की सरकार के प्रति जबरदस्त नाराजगी बनी हुई है। उससे एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि वहां की स्थानीय जनता पाकिस्तान सरकार से पीछा छुड़ाना चाहती है। बाकी बिलावल भुट्टो और उनके जैसे कई अन्य पाकिस्तानी नेताओं के बयान साबित कर देते हैं कि अब पाकिस्तान का पीओके पर अवैध कब्जा बहुत ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है।

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