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व्हाट्सएप कॉल, बांग्लादेशी नंबर और मौत की धमकी: ऋतब्रत बनर्जी के साथ क्या हो रहा है? पुलिस में शिकायत दर्ज

Tue, 11 Aug 2026 09:36 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 11 Aug 2026 09:36 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को पुलिस से संपर्क किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन महीनों के दौरान उन्हें बांग्लादेश के फोन नंबरों से बार-बार जान से मारने की धमकियां मिली हैं।

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Amidst internal infighting within TMC Ritabrata Banerjee received death threat calls from Bangladeshi numbers
ऋतब्रत बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया है कि उन्हें 3 मई से 9 अगस्त के बीच बांग्लादेशी नंबरों से व्हाट्सएप  कॉल के जरिए बार-बार जान से मारने की धमकियां मिलीं। धमकी देने वालों ने कथित तौर पर अभिजीत रॉय की हत्या जैसा अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। बनर्जी ने लगातार धमकियां मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय भवानी भवन में शिकायत की है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में जेईएम के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच चल रही है और टीएमसी के भीतर भी नेतृत्व को लेकर गंभीर राजनीतिक संघर्ष जारी है। हालांकि, पुलिस ने दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध का संकेत नहीं दिया है।

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कब दी गईं बनर्जी को जान से मारने की धमकियां?
बागी TMC नेता के करीबी लोगों के अनुसार, ये धमकियां 3 मई से 9 अगस्त के बीच WhatsApp कॉल के जरिए दी गईं। कॉल करने वालों ने कथित तौर पर बनर्जी को चेतावनी दी कि उनका हश्र भी बांग्लादेशी-अमेरिकी ब्लॉगर अभिजीत रॉय जैसा होगा। अभिजीत रॉय की 2015 में ढाका में हत्या कर दी गई थी।
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शुरुआत में बनर्जी ने धमकियों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया?
सूत्रों ने बताया कि बनर्जी ने शुरुआत में इन कॉल को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, जब लगातार धमकियां मिलती रहीं तो उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया। मंगलवार को वह दिन में राज्य पुलिस मुख्यालय ‘भवानी भवन’ पहुंचे और मामले की शिकायत की।
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क्या इन धमकियों का JeM मॉड्यूल से कोई संबंध है?
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच महत्वपूर्ण हो गया है, खासकर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संदिग्ध ऑपरेटिव हामिम मंडल और उसके कथित साथियों की गिरफ्तारी के बाद। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कहा है कि पाकिस्तान से जुड़े इस मॉड्यूल ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की निगरानी की थी और संभावित ठिकानों तथा स्थानों की टोह ली थी।

क्या पुलिस ने धमकियों और JeM जांच के बीच कोई कड़ी बताई है?
हालांकि, पुलिस ने बनर्जी को मिली धमकियों और JeM की जांच के बीच किसी तरह के संबंध का कोई संकेत नहीं दिया है। दोनों घटनाओं के बीच कोई कड़ी है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

अभिजीत रॉय का नाम लेकर धमकी देना क्यों गंभीर माना जा रहा है?
धमकियों के दौरान अभिजीत रॉय का जिक्र किए जाने से शिकायत की गंभीरता और बढ़ गई है। रॉय एक जाने-माने स्वतंत्र विचारों वाले ब्लॉगर थे। 26 फरवरी 2015 को ढाका विश्वविद्यालय के पास उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उनकी पत्नी रफिदा अहमद बोन्या भी घायल हुई थीं। बाद की जांच में इस हत्या को बांग्लादेश के प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन ‘अंसार अल-इस्लाम’ के सदस्यों से जोड़ा गया था। रॉय की हत्या ने उस समय बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कट्टरपंथ को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी थी। बनर्जी को मिली धमकियों का ‘अंसार अल-इस्लाम’ या किसी अन्य चरमपंथी नेटवर्क से कोई संबंध है या नहीं, यह फिलहाल जांच का विषय है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती धमकी देने वालों की पहचान करना और उनके पीछे की वास्तविक मंशा का पता लगाना है।

राजनीतिक माहौल के बीच यह शिकायत कितनी अहम है?
बनर्जी की पुलिस में शिकायत ऐसे समय में सामने आई है, जब पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गरमाया हुआ है। वह उस बगावत के प्रमुख चेहरों में उभरकर सामने आए हैं, जिसने इस साल विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गहरी दरार पैदा कर दी है। बागी गुट खुद को ‘असली’ TMC बताता है। इस गुट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी है और पार्टी के पुराने नेतृत्व पर लगातार चुनावी हार के बीच अपनी राजनीतिक दिशा खोने का आरोप लगाया है। 

पार्टी की अंदरूनी लड़ाई विधानसभा तक कैसे पहुंची?
TMC के भीतर जारी यह दरार अब विधायी स्तर तक भी पहुंच गई है। ममता बनर्जी खेमे की ओर से विपक्ष के नेता पद के लिए अपना उम्मीदवार आगे किए जाने के बावजूद, TMC के अधिकांश विधायकों का समर्थन मिलने के बाद बनर्जी को विपक्ष का नेता माना गया। इसके बाद से बागी खेमे ने दावा किया है कि पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 65 विधायक उसके समर्थन में हैं।

क्या TMC का विवाद संसद तक भी पहुंच चुका है?
यह विवाद संसद तक भी पहुंच गया है। पार्टी के लोकसभा सदस्यों का एक बड़ा हिस्सा ममता बनर्जी खेमे से अलग हो गया है और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया तथा भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जुड़ गया है।

क्या यह सिर्फ नेतृत्व का विवाद रह गया है?
इस घटनाक्रम से साफ है कि TMC के भीतर चल रही आंतरिक लड़ाई अब केवल नेतृत्व के विवाद तक सीमित नहीं रह गई है। प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी के संगठन, चुनावी पहचान और राजनीतिक विरासत पर नियंत्रण हासिल करने के लिए आमने-सामने हैं। इस पृष्ठभूमि में बनर्जी को मिली कथित जान से मारने की धमकियां पहले से अस्थिर राजनीतिक टकराव में सुरक्षा का एक नया पहलू जोड़ती हैं। पुलिस के सामने तत्काल चुनौती इन कॉल के स्रोत का पता लगाने, कॉल करने वालों की पहचान करने और यह निर्धारित करने की है कि धमकियां महज एक प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को डराने की कोशिश थीं या इनके पीछे किसी व्यापक नेटवर्क की भूमिका है।

विदेश से जुड़े नेटवर्क की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण
बनर्जी का पुलिस से मदद लेना ऐसे समय में हुआ है, जब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेश से जुड़े चरमपंथी नेटवर्क पश्चिम बंगाल में संभावित लक्ष्यों की पहचान करने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार, सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों का किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।


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क्या दोनों घटनाओं के बीच संबंध की पुष्टि हुई है?
फिलहाल दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। बनर्जी को मिली धमकियां और JeM मॉड्यूल की जांच अलग-अलग मामलों के तौर पर सामने आई हैं। इन दोनों घटनाओं के बीच कोई वास्तविक संबंध है या नहीं, इसका पता पुलिस जांच के नतीजों के बाद ही चल सकेगा।

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