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Court: 'अमेरिकी नागरिक बच्चे को गोद नहीं ले सकते भारतीय, चाहे रिश्तेदार का ही...', बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

Thu, 17 Jul 2025 02:12 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 17 Jul 2025 02:12 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक को अमेरिकी नागरिक बच्चे को गोद लेने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, भले ही वह रिश्तेदार ही क्यों न हो। कोर्ट ने दंपत्ति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब तक बच्चा देखभाल की जरूरत में न हो, भारतीय कानून ऐसा गोद लेना नहीं मानता। गोद लेने की प्रक्रिया पहले अमेरिका में पूरी करनी होगी।

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American citizens child cannot adopt by Indian even relatives Bombay High Court decision adoption right
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि भारतीय नागरिक का यह कोई मौलिक अधिकार नहीं है कि वह किसी रिश्तेदार के अमेरिकी नागरिक बच्चे को गोद ले सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई बच्चा देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता में नहीं है या कानून के उल्लंघन से जुड़ा नहीं है, तब ऐसे बच्चे को भारतीय कानून के तहत गोद नहीं लिया जा सकता।
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यह फैसला न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने सुनाया। एक भारतीय दंपत्ति ने अपने रिश्तेदार के बेटे को गोद लेने की याचिका दायर की थी। बच्चा जन्म से अमेरिका का नागरिक है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि यह मामला भारतीय कानून की सीमाओं से बाहर है।
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बच्चा ‘जरूरतमंद’ की श्रेणी में नहीं आता: कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि जिस बच्चे को गोद लेने की कोशिश की जा रही है, वह भारत के जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चे या कानून से टकराव में आए बच्चे की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए भारतीय गोद लेने के नियमों और कानूनों के अंतर्गत ऐसा दत्तक ग्रहण वैध नहीं माना जा सकता।
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विदेशी नागरिक को गोद लेने का प्रावधान नहीं
कोर्ट ने साफ कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और एडॉप्शन रेगुलेशन्स में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी विदेशी नागरिक, चाहे वह रिश्तेदार ही क्यों न हो, को भारत में गोद लेने की अनुमति देता हो। जब तक वह बच्चा विशेष श्रेणियों में नहीं आता। इसलिए कोर्ट ने अपने "असाधारण अधिकार" का प्रयोग करते हुए भी दत्तक ग्रहण को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।

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गोद लेने के आवेदन को किया था खारिज
इस मामले में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने पहले ही इस दंपति को ‘संभावित गोद लेने वाले माता-पिता’ के तौर पर पंजीकृत करने से इनकार कर दिया था। सीएआरए का कहना था कि अमेरिका में जन्मे बच्चे को तब तक गोद नहीं लिया जा सकता जब तक वह अमेरिका में वहां के कानूनों के तहत दत्तक नहीं हो जाता।


अमेरिकी कानून के तहत ही करनी होगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दंपत्ति इस बच्चे को गोद लेना चाहते हैं, तो उन्हें पहले अमेरिका में विधिवत रूप से गोद लेने की प्रक्रियान पूरी करनी होगी। इसके बाद ही वे भारत में संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के आधार पर बच्चे को भारत ला सकते हैं। भारत की न्याय व्यवस्था विदेशी नागरिक बच्चों को सीधे गोद लेने की अनुमति नहीं देती।

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याचिका खारिज, कोर्ट ने जताई संवैधानिक सीमा
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि न तो याचिकाकर्ताओं का कोई मौलिक अधिकार बनता है विदेशी नागरिक बच्चे को गोद लेने का, और न ही बच्चे के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में भारतीय कानून की संवैधानिक और कानूनी सीमाओं का पालन अनिवार्य है।



 
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