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अमेरिका भारत को देना चाहता है अपने आधुनिक एफ-18 लड़ाकू विमान, नौसेना की जरूरतें होंगी पूरी
Wed, 28 Oct 2020 01:56 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 28 Oct 2020 01:56 PM IST
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F-18 Fighter Jet
- फोटो : For Reference Only
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भारत के साथ संबंधों को और घनिष्ठ करने की इच्छा से, अमेरिका ने बुधवार को भारत को विमान वाहकों के लिए लड़ाकू जेट की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय नौसेना को अपने एफ-18 नौसैनिक लड़ाकू जेट देने की पेशकश की है।
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कुछ साल पहले, भारतीय नौसेना ने मौजूदा आईएनएस विक्रमादित्य और निर्माणाधीन स्वदेशी विमान वाहक सहित नौसेना के विमान वाहकों से अपने संचालन के लिए 57 नौसैनिक लड़ाकू जेट खरीदने की इच्छा जताई थी।
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सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया, "अमेरिकी सरकार ने टू प्लस टू वार्ता के दौरान दोनों देशों के रक्षा प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक में एक सरकारी प्रस्ताव के तहत भारतीय नौसेना के लिए अपने नौसैनिक लड़ाकू विमान एफ-18 देने की पेशकश की है।"
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रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना को मानवरहित विमान 'सी गार्जियन' के साथ-साथ कई अन्य प्रणालियों के साथ अपने एफ-18 लड़ाकू विमानों को खरीदने की पेशकश की गई है।
फिलहाल, भारतीय नौसेना अपनी वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए एफ-18 और राफेल नौसेना लड़ाकू विमानों का आकलन कर रही है, क्योंकि इसके मौजूदा लड़ाकू विमानों के इस दशक के आखिर तक या अगले दशक की शुरुआत में बाहर होने की संभावना है।
अमेरिकी सरकार द्वारा पेशकश की जा रही विमान को उस विमान का उन्नत संस्करण बताया जा रहा है, जिसकी 126 मल्टीरोल मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की जरूरतों के लिए भारतीय वायु सेना को पेशकश की गई थी। उसमें सिर्फ राफेल और यूरोपीय यूरोफाइटर ही गुणात्मक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम पाए गए और आखिर में फ्रांसीसी विमान को चुना गया था।
राफेल और एफ-18 दोनों ही भारतीय नौसेना के लिए आईएनएस विक्रमादित्य विमान वाहक पोत से उड़ाने भरने और उतरने के लिए अपने संबंधित लड़ाकू विमान की क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसके अलावा, चीन के साथ भारत के गतिरोध के दौरान अमेरिकियों ने चीनी सेना की तैनाती और गतिविधियों के बारे में बहुत सारी जानकारी भी साझा की है।