जम्मू-कश्मीर : बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच अमरनाथ यात्रियों का चौथा जत्था रवाना
जम्मू कश्मीर में बाढ़ के हालात के बीच रविवार को अमरनाथ यात्रियों का चौथा जत्था रवाना हुआ है। भारी बारिश से बालटाल और पहलगाम ट्रैक पर तीन दिनों से यात्रा रुकी हुई थी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच रवाना हुए इस जत्थे में करीब 3 हजार अमरनाथ यात्री बेस कैंप की ओर निकले। उनके साथ 90 गाड़ियां भी रवाना हुईं। इससे पहले शुक्रवार को उधमपुर हाईवे पर फंसे तीसरे जत्थे के करीब दो हजार यात्रियों को पहलगाम के लिए शनिवार सुबह रवाना किया गया था। इस बीच शनिवार तीसरे दिन शाम तक 587 यात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए।
रविवार को मौसम खुलने के बाद बेस कैंप से यात्रियों को आगे बढ़ने की मंजूरी मिली है। वहीं बिना रजिस्ट्रेशन वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें रामबन और बनिहाल में ही रोक लिया गया है। राज्य में पिछले तीन दिनों से लगातार हुई बारिश से झेलम नदी उफान पर है। इससे मध्य व दक्षिणी कश्मीर में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए नदी-नालों के किनारे पर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने रविवार को मौसम में सुधार की उम्मीद की थी।
गृहमंत्री ने की राज्यपाल से बात
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में झेलम नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहां बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल एन. एन. वोहरा से फोन पर बात की है। उन्होंने राज्य को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
Union Home Minister had a telephonic conversation with the Governor of Jammu and Kashmir NN Vohra on the flood situation in certain parts of the state. He assured all possible support & cooperation to the state in dealing with the situation. (File pic) pic.twitter.com/Y2byTjNyhP
— ANI (@ANI) July 1, 2018
राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी पड़ सकता है असर
एक अधिकारी के मुताबिक बाढ़ के साथ साथ भूस्खलन, फिसलन भरे मार्ग और पत्थर गिरने से यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा को रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि किसी भी तीर्थयात्री को पैदल गुफा की ओर बढ़ने नहीं दिया जा रहा है। नदी के बांधों को रेत के बैग से प्लग किया गया ताकि पानी बांध को ना तोड़ सके। श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पांपोर और संगम इलाके में भी बांध में दरार पड़ने से पानी सड़कों पर आ गया जिसे तुरंत मौके पर पहुंची पुलिस टीमों ने प्लग कर दिया। हाइवे पर कुछ जगहों पर पानी भर जाने से ट्रैफिक को नए बाईपास से डायवर्ट किया गया है।
दक्षिण कश्मीर में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा की 60 दिवसीय यात्रा का समापन 26 अगस्त को होगा। यात्रा में खराब मौसम बार बार यात्रियों के लिए मुसीबत बन रहा है। इस बीच राजयपाल ने भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने कई राहत केंद्रों और कंट्रोल रूम की स्थापना भी की है। उन्होंने लोगों को डरने की बजाय सतर्क रहने को कहा है।
राज्य में करीब 17 एसडीआरएफ और 2 एनडीआरएफ की टीमों को तैयार किया गया है। सभी सुरक्षा एजेंसियों को भी तैयार रहने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सके। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण के चीफ इंजीनियर एम एम शाहनवाज ने बताया कि खतरे के निशान से ऊपर बह रही झेलम को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी कर ली गई है।
वहीं मौसम विभाग का कहना है कि राज्य में 2014 जैसे हालात नहीं हैं लेकिन बारिश जरूर ज्यादा हुई है। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार जमीन गीली है। लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि भूस्खलन की संभावना है। इस बीच अमरनाथ यात्रियों को भी अगले 24 घंटों तक नहीं जाना चाहिए। इसका असर राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी पड़ सकता है।