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Amar Ujala: मन को झकझोर देगा अमर उजाला का युद्ध कथा विशेषांक, वरिष्ठ साहित्यकारों ने चुनीं 13 क्लासिक कहानियां

Thu, 19 Jun 2025 06:46 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 19 Jun 2025 06:46 AM IST
सार

विशेषांक में, वरिष्ठ साहित्यकारों - देवशंकर नवीन, हेतु भारद्वाज, महेश दर्पण और हरि भटनागर ने युद्ध पृष्ठभूमि से क्लासिक कहानियां चुनी हैं, और वरिष्ठ कवि निरंजन श्रोत्रिय ने विलक्षण कविताओं का चयन कर विशेषांक में पिरोया है। इसमें 13 कहानियां हैं।

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Amar Ujala war story special issue will shake your mind available for sale
युद्ध कथा विशेषांक - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

कविताओं और कहानियों में अनुभवों की लपट होती है और वे नीति और करुणा की बातों को केंद्र में लाकर कुछ दर्पण आपके सामने रख देती हैं। अमर उजाला की नई प्रस्तुति युद्ध कथा विशेषांक ऐसा ही दर्पण है, जो युद्धरत दुनिया के समक्ष मूल व निर्मूल के अंतर को व्यक्त करने का विनम्र प्रयास है। विशेषांक बिक्री के लिए उपलब्ध है।

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विशेषांक में, वरिष्ठ साहित्यकारों - देवशंकर नवीन, हेतु भारद्वाज, महेश दर्पण और हरि भटनागर ने युद्ध पृष्ठभूमि से क्लासिक कहानियां चुनी हैं, और वरिष्ठ कवि निरंजन श्रोत्रिय ने विलक्षण कविताओं का चयन कर विशेषांक में पिरोया है। इसमें 13 कहानियां हैं, जिसके कथाकारों में सआदत हसन मंटो से लेकर चंद्रधर शर्मा गुलेरी, अल्फोंस दोदे, ऋत्विक घटक, अर्नेस्ट हेमिंग्वे, मर्जान रियाही, मिखाइल शोलोखोव, एम्ब्रोस बियर्स, आर्थर सी. क्लार्क, स्टीफन क्रेन, हर्नाडो टेलेज और लायम ओ फ्लैहर्टी शामिल हैं।
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बंदूक किसी को पसंद नहीं
अमर उजाला समूह के सलाहकार यशवंत व्यास कहते हैं, संदेश बस यही है-बंदूक किसी को पसंद नहीं है। उस पर बैठी चिड़िया और उसकी नली में खोंसा हुआ फूल फौजी को भी अच्छा लगता है। अमर उजाला शब्द सम्मान जैसी महत्वपूर्ण पहल की पृष्ठभूमि में अमर उजाला ने समकालीन परिस्थितियों में स्वाभाविक ही इस विशेषांक को जिम्मेदारी के तहत प्रस्तुत किया, क्योंकि ये कहानियां ही हैं जो युद्ध के समय में सच को समझने की सलाहियत देती हैं।
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22 कविताएं और क्लासिक चित्र
मानवीय करुणा और अस्तित्व की रक्षा के द्वंद्व को रेखांकित करने वाले क्लासिक युद्ध-चित्रों के साथ 22 कविताएं भी इसमें हैं।

  • रवीन्द्रनाथ टैगोर से लेकर बर्तोल्त ब्रेख्त, विष्णु खरे, मंगलेश डबराल, हरिवंश राय बच्चन, कुंवर नारायण, श्रीकांत वर्मा, शमशेर बहादुर सिंह, रामधारी सिंह दिनकर, राजेश जोशी, विनोद कुमार शुक्ल, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, मदन कश्यप, रघुवीर सहाय, अज्ञेय, कैलाश वाजपेयी, नवीन सागर, केदारनाथ अग्रवाल, निराला, अरुण कमल, उदय प्रकाश और नीलोत्पल सरीखे कवियों के चयनित सृजन कर्म से इसे बुना गया है।
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