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अमर उजाला शब्द सम्मान: पंडित हरिप्रसाद चौरसिया आज करेंगे शब्द साधकों का सम्मान, विशेष संगीत प्रस्तुति भी देंगे

Wed, 13 Mar 2024 01:52 PM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 13 Mar 2024 01:52 PM IST
सार

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया इस अवसर पर ग्रैमी पुरस्कार विजेता बांसुरी वादक राकेश चौरसिया के साथ विशेष संगीत प्रस्तुति भी देंगे। प्रवेश निमंत्रण पत्र के आधार पर ही मिलेगा।

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Amar Ujala Shabd Samman Winners Shabd Sadhak Pandit Hariprasad Chaurasia Rakesh Chaurasia musical presentation
अमर उजाला शब्द सम्मान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रख्यात संगीतज्ञ और बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया आज (13 मार्च) अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को अलंकृत करेंगे। कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम सभागार में शाम 5:30 बजे से शुरू होगा। पंडित हरिप्रसाद इस अवसर पर ग्रैमी पुरस्कार विजेता बांसुरी वादक राकेश चौरसिया के साथ विशेष संगीत प्रस्तुति भी देंगे। प्रवेश निमंत्रण पत्र के आधार पर ही मिलेगा। 

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अलंकरण प्रतीक चिह्न अनुकृति: गंगा
एक संस्कृति है गंगा, जो सदियों से हमारे मन में और हमारी धरती पर बह रही है। गंगा इतिहास की नदी है। गंगा हमारे वर्तमान की धारा है और गंगा में हमारे लिए भविष्य की लहरें हैं। यह जीवनदायिनी है, जहां-जहां गुजरती है, जीवन हरा होता चला जाता है। इसी गंगा को हमने    शब्द सम्मान अलंकरण के प्रतीक चिह्न के रूप में चुना।
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राष्ट्रीय संग्रहालय में संग्रहित सेनवंशकालीन
गंगा की यह प्रतिमा बारहवीं सदी की है, जो महानद क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिली थी। विश्व प्रसिद्ध शिल्पी रामसुतार ने शब्द सम्मान के लिए इसकी अनुकृति तैयार की है, जिन्होंने हमारे देश की संसद सहित दर्जनों देशों में महात्मा गांधी की मूर्तियां बनाई हैं, और हाल में विश्व की सबसे ऊंची ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ तैयार की है।
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उपशीर्षक: श्रेष्ठ कृति सम्मान छाप (कविता)
निर्णायक वक्तव्य

ये नगरीय परिवेश, मध्य वर्गीय जीवन और गहरे विडंबना बोध की कविताएं हैं। बेधक दृष्टि, उदासी और दबा हुआ आक्रोश इन कविताओं की अंतर्वस्तु है। -नरेश सक्सेना, प्रख्यात कवि  

कुमार अम्बुज
मैं कविता क्यों लिखता हूं?

इस सवाल का कोई चमकदार, सर्वस्वीकार्य और तार्किक उत्तर मुश्किल है सिवाय इसके कि संसार में यदि एक चींटी के होने का कोई अर्थ है, मधुमक्खी होने या एक कमजोर आदमी के बने रहने की कोई अर्थवत्ता, व्यर्थता या संघर्ष है तो वही अर्थ मेरे कवि होने का भी है। मैं जानता हूं, मुझे अपने हिस्से का कण ढोना है, अपने हिस्से का शहद बनाना है। फिर यह सहज आदत की तरह होता जाता है। जिद की तरह भी। इस असहायताबोध के साथ कि मैं और किसी तरह नहीं, लेकिन इसी तरह अपना हस्तक्षेप कर सकता हूं।

दहन: श्रेष्ठ कृति सम्मान छाप (कथा)
निर्णायक वक्तव्य

हर कहानी में लेखक ने नए विषयों को नई दृष्टि से देखा है। मानवीय संबंधों की अलग दृष्टि है। गढ़न, दृश्यात्मकता एवं वाक्य विन्यास भी अद्भुत है। -चित्रा मुद्गल, जानी-मानी कथाकार

मनोज रूपड़ा
हर जिंदगी एक किस्सा है

मुझे खुशी है कि मैंने अपने किरदारों की अंदरूनी कश्मकश को कहानी में लाने की जो कोशिश की थी, उसे और उन कहानियों में व्यक्त विचारों और भावनाओं को एक व्यापक स्वीकृति मिली है। लेखन-कर्म लेखक से यह मांग करता है कि वह जवाबदारी, जिम्मेदारी, दृष्टिकोण और अपने खुद के अमल के जरिये कहानी में अपनी बात सामने रखे। मेरी भी यही कोशिश होती है। मेरी कहानियों के शिल्पकाराें ने बताया है कि अगर तुम्हारे हाथों में गज-फीता न हो तो हर इंसान की जिंदगी एक किस्सा है।

सुन्दर के स्वप्न: श्रेष्ठ कृति सम्मान छाप (कथेतर)
निर्णायक वक्तव्य

लेखक ने अपने विषय के साथ और अपने लक्ष्य के साथ न्याय किया है। यह एक ऐसी यात्रा है, जो हमारे युग तक और हमारे सरोकार तक पहुंचती है। -शाज़ी ज़मां, विख्यात रचनाकार

दलपत सिंह राजपुरोहित
परम सत्य का आत्मानुभव
औपनिवेशिक आधुनिकता से पहले विद्यमान भारत की अपनी आधुनिकता के संदर्भ में दादूपंथ के पिछली पांच सदियों के इतिहास का बयान यह किताब है। कोशिश यही रही है कि भक्ति-रीति के साहित्यिक-सामाजिक परिवेश को उसी देश-काल के संदर्भ में पढ़ा-समझा जाए। सुन्दरदास का काव्य विश्वव्यापी परम सत्य के आत्मानुभव की सतत यात्रा है। ‘सुन्दर के स्वप्न’ संत-कविता में उपस्थित वेदांत, योग और भक्ति के संवाद तथा हिंदू धर्म की विकसित हो रही अस्मिता पर पड़े उसके गहरे प्रभाव का अध्ययन है।

अपनी कही: श्रेष्ठ कृति सम्मान थाप (पहली किताब)
निर्णायक वक्तव्य
संग्रह में विन्यस्त कविताएं आवाजों की लताओं में लिपटे शोर और संगीत के बीच-आवाजों के जंगल से-अनहद नाद के फूल की कामनाओं से भरी हैं। -अष्टभुजा शुक्ल, प्रख्यात कवि

चिन्मयी त्रिपाठी
लेखन मेरी बुनियादी जरूरत

सच कहूं तो मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि यह सम्मान मुझे मिलेगा या मेरा संग्रह ऐसे किसी भी सम्मान के लिए चुना जा सकता है। मैंने पुरस्कार के लिए कभी कोई अलग से कोशिश नहीं की, न ही इस तरह की कोई उत्सुकता रही है। बावजूद इसके अपने पहले कविता संग्रह का ‘अमर उजाला थाप सम्मान’ के लिए चुनाव मेरे लिए बहुत गौरवपूर्ण उपलब्धि है। ‘अपनी कही’ मेरे लिए एक शुरुआत है, क्योंकि कविता लिखना मेरे लिए एक बुनियादी जरूरत है और यह सिलसिला मेरे जीवन भर चलता रहेगा।

गुजराती दलित कविता: श्रेष्ठ अनुवाद भाषाबंधु
निर्णायक वक्तव्य

मालिनी के हिंदी पाठ कड़े उच्चारण, व्यंग्यात्मक लहजे, क्रोध से भरी लय के साथ पीड़ा और आशा की कहानियों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करते हैं। -आलोक भल्ला, प्रख्यात लेखक


मालिनी गौतम
बेचैनी से मुक्ति का अनुवाद

तीन दशक से गुजरात के एक अंतरिम आदिवासी विस्तार संतरामपुर के महाविद्यालय में अध्यापन का कार्य करते हुए मैंने आदिवासियों और दलितों के जीवन को नजदीक से देखा और जाना है। गुजराती दलित कविताएं दलितों पर हुए अत्याचार, दमन, शोषण, अन्याय, अपमान, उपेक्षा और अवहेलना का जीता-जागता दस्तावेज हैं। इन कविताओं ने मेरे मन को बेचैन किया। इसी बेचैनी से बाहर निकलने के लिए मैंने इनका अनुवाद शुरू किया। यह सम्मान मेरे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर आया है।

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