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अमर उजाला: जनता की नजर में नोटबंदी 'खोदा पहाड़, निकली चुहिया' बिल्कुल नहीं
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 14 Dec 2016 05:29 PM IST
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नोटबंदी के बाद एक तरफ जहां लोग कैश की किल्लत छेल रहे हैं, वहीं आयकर विभाग समेत बड़े विभाग छापेमारी कर करोड़ों के नए नोट पकड़ रहे हैं। ऐसे में एक सवाल उठ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी बैंक और सरकारी कर्मियों की वजह से असफल साबित हो रही है।
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हाल ही में पीए मोदी ने दावा किया था कि 50 दिन में हालात पूरी तरह ठीक हो जाएंगे, लेकिन विपक्ष मोदी सरकार पर संसद और बाहर निशाना साधा हुआ है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का दावा है कि केंद्र सरकार के दावे हवा हवाई हैं हालात सुधरने में कम से कम छह से सात महीने लगेंगे तब तक लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी होगी।
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प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा एक महीने में 300 करोड़ से ज्यादा कैश नहीं छप सकता ऐसे में सरकार किस आधार पर कैश की किल्लत दूर करने का दावा कर रही है। चिदंबरम ने नोटबंदी को देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया। इस बीच उन्होंने पीएम मोदी की नोटबंदी पर तंज कसा और कहा, 'खोदा पहाड़ और निकली चुहिया'।
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इसी पर अमर उजाला ने ऑनलाइन पोल किया। पोल में सवाल पूछा, 'क्या वाकई नोटबंदी 'खोदा पहाड़, निकली चुहिया' है?' पोल में कुल 10,132 पाठकों ने हिस्सा लिया और ज्यादातर ने पीएम मोदी की नोटबंदी को सही ठहराया। सबसे अधिक 55.20 फीसदी यानि 5,593 पाठकों ने माना कि नोटबंदी एक सही फैसला है और इससे सकारात्मक निष्कर्ष निकल कर आएगा। 42.96 फीसदी यानि 4,353 पाठकों ने माना ये फैसला खोदा पहाड़, निकली चुहिया के बराबर ही है। वहीं 1.84 फीसदी यानि 186 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।