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अमर उजाला पोल: फाइनल ईयर में इंजीनियरिंग छात्रों का एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट कराना सही
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 12 Jan 2017 06:42 PM IST
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इंजीनियरिंग छात्रों को जल्द ही फाइलन ईयर में एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट का सामना करना पड़ सकता है। इस टेस्ट को करवाने के पीछे का उद्देस्य है कि हर साल ज्यादा तादात में इंजीनियरिंग छात्र पास होते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर ऐसे होते हैं जो लायक नहीं होते। इसी कारण सरकार एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट यानि गेट के अंक नियोक्ताओं के साथ साझा करने का मन बना रही है।
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बता दें कि हर वर्ष लगभग सात लाख छात्र देशभर के तीन हजार संस्थानों से पास होकर निकलते हैं। हालांकि आंकड़ों के अनुसार केवल 20 से 30 फीसदी छात्र ही अच्छी नौकरी पाते हैं। छात्रों का एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट करवाना कहा तक सही है, इस पर अमर उजाला डॉट कॉम ने पोल किया। पोल में सवाल पूछा कि फाइनल ईयर में इंजीनियरिंग छात्रों का एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट कराना सही है?
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कुल 4,617 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। सबसे अधिक 73.97 फीसदी यानि 3,415 पाठकों ने माना कि सरकार अगर ऐसा मन बना रही है तो यह एक सही फैसला होगा। 23.85 फीसदी यानि 1,101 पाठकों ने माना कि सरकार को छात्रों पर एक नया बोझ नहीं डालना चाहिए। वहीं 2.19 फीसदी यानि 101 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।
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