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अमर उजाला ने उन 7 महारथी कंपनियों को दिया CSR अवार्ड, जो मुनाफे के साथ कमा रहीं दुआएं
टीम डिजिटल अमर उजाला नई दिल्ली
Updated Tue, 31 Oct 2017 08:20 AM IST
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अमर उजाला सीएसआर अवार्ड से सम्मानित कंपनियों के प्रतिनिधि
- फोटो : Amar Ujala
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आपके पसंदीदा अखबार अमर उजाला और नवरत्नों में गिनी जाने वाली कंपनी ओएनजीसी ने देश की उन चुनिंदा कंपनियों को सम्मानित किया गया जो मुनाफे के साथ लोगों की दुआएं भी कमा रही हैं। समाज की भलाई में जुटी ऐसी सात कंपनियों को केंद्रीय मंत्रियों और कई प्रबुद्धजनों की मौजूदगी में अमर उजाला कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी (सीएसआर) अवार्ड दिए गए।
बता दें कि अमर उजाला सीएसआर अवार्ड का यह पहला संस्करण है जिसका टाइटल स्पांसर ओएनजीसी है। दिल्ली के होटल शांग्रीला में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय रेल व कोयला मंत्री पीयूष गोयल, संसदीय कार्य एवं सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री विजय गोयल और अमर उजाला के पूर्णकालिक निदेशक प्रबल घोषाल भी उपस्थित रहे।
इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जल संरक्षण के लिए बहुत काम करने की जरूरत है। भारत में सीएसआर सिखाने की जरूरत नहीं है, ये हमारे इतिहास और परंपरा का हिस्सा है। अग्रोहा के राजा अग्रसेन इसका सशक्त उदाहरण हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार का काम भी सरोकार का होता है। जनता की भलाई को भी सीएसआर माना जा सकता है। अमर उजाला भी अपने क्षेत्र में समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य कर रहा है और अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहित कर रहा है।
रेल मंत्री ने कहा कि भारत में परोपकार की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे तेज करने की और आगे बढ़ाने की जरूरत है। पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्नत ज्योति योजना की शुरुआत की थी। जिससे इस देश के नागरिकों को अफोर्डेबल बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
पीयूष गोयल बोले कि सरकारी कंपनियों ने सीएसआर के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किया है। सीएसआर के सहयोग से एक वर्ष में सरकारी स्कूलों में चार लाख से ज्यादा टॉयलेट बनाए जा सके हैं। 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' फिल्म देखने के बाद मैंने देश के रेलवे स्टेशनों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अच्छे से अच्छे टॉयलेट बनाए जाने का आदेश दिया है।
गोयल ने कहा कि अगले 15 महीनों में देश की सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डंपिंग यार्ड बंद होने की वजह से बनारस में गंदगी बढ़ती जा रही थी। इसको दोबारा शुरू करवाया और अब वहां रोजाना 600 टन कचरा इकट्ठा हो रहा है।
रेलमंत्री ने कहा कि बनारस की गंदगी साफ करने में कई एनजीओ और कंपनियां सीएसआर मदद कर रहे हैं। समाज के लिए कार्य करने वाली कंपनियों को सम्मानित करके अमर उजाला ने एक उत्कृष्ट मिसाल पेश की है। इससे और अधिक संगठन और संस्थान सीएसआर के लिए आगे आएंगे। शोषित, गरीब और वंचित लोगों के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिना प्रोत्साहन के समाज विकास नहीं करता है। सीएसआर के लिए कंपनियों के साथ ही स्थापित लोगों को भी आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए सोचना बहुत जरूरी है। प्रोत्साहन से अनुशासन आता है। गोयल ने कहा कि आज यूथ को प्रेरित करने की ज़रूरत है।
अमर उजाला की ओर से कंपनियों के उक्त प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड - श्री रंजीत सिंह
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड - श्री चेतन वर्मा
धानुका एग्रीटेक लिमिटेड - श्री आरजी अग्रवाल
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन - श्री राजीव शर्मा
गैस एवं प्राकृतिक गैस लिमिटेड - श्री बीसी त्रिपाठी
ओएनजीसी - श्री सुरेश डंडियाल
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बता दें कि अमर उजाला सीएसआर अवार्ड का यह पहला संस्करण है जिसका टाइटल स्पांसर ओएनजीसी है। दिल्ली के होटल शांग्रीला में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय रेल व कोयला मंत्री पीयूष गोयल, संसदीय कार्य एवं सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री विजय गोयल और अमर उजाला के पूर्णकालिक निदेशक प्रबल घोषाल भी उपस्थित रहे।
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इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जल संरक्षण के लिए बहुत काम करने की जरूरत है। भारत में सीएसआर सिखाने की जरूरत नहीं है, ये हमारे इतिहास और परंपरा का हिस्सा है। अग्रोहा के राजा अग्रसेन इसका सशक्त उदाहरण हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार का काम भी सरोकार का होता है। जनता की भलाई को भी सीएसआर माना जा सकता है। अमर उजाला भी अपने क्षेत्र में समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य कर रहा है और अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहित कर रहा है।
रेल मंत्री ने कहा कि भारत में परोपकार की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे तेज करने की और आगे बढ़ाने की जरूरत है। पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्नत ज्योति योजना की शुरुआत की थी। जिससे इस देश के नागरिकों को अफोर्डेबल बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
पीयूष गोयल बोले कि सरकारी कंपनियों ने सीएसआर के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किया है। सीएसआर के सहयोग से एक वर्ष में सरकारी स्कूलों में चार लाख से ज्यादा टॉयलेट बनाए जा सके हैं। 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' फिल्म देखने के बाद मैंने देश के रेलवे स्टेशनों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अच्छे से अच्छे टॉयलेट बनाए जाने का आदेश दिया है।
गोयल ने कहा कि अगले 15 महीनों में देश की सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डंपिंग यार्ड बंद होने की वजह से बनारस में गंदगी बढ़ती जा रही थी। इसको दोबारा शुरू करवाया और अब वहां रोजाना 600 टन कचरा इकट्ठा हो रहा है।
रेलमंत्री ने कहा कि बनारस की गंदगी साफ करने में कई एनजीओ और कंपनियां सीएसआर मदद कर रहे हैं। समाज के लिए कार्य करने वाली कंपनियों को सम्मानित करके अमर उजाला ने एक उत्कृष्ट मिसाल पेश की है। इससे और अधिक संगठन और संस्थान सीएसआर के लिए आगे आएंगे। शोषित, गरीब और वंचित लोगों के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिना प्रोत्साहन के समाज विकास नहीं करता है। सीएसआर के लिए कंपनियों के साथ ही स्थापित लोगों को भी आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए सोचना बहुत जरूरी है। प्रोत्साहन से अनुशासन आता है। गोयल ने कहा कि आज यूथ को प्रेरित करने की ज़रूरत है।
अमर उजाला की ओर से कंपनियों के उक्त प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड - श्री रंजीत सिंह
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड - श्री चेतन वर्मा
धानुका एग्रीटेक लिमिटेड - श्री आरजी अग्रवाल
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन - श्री राजीव शर्मा
गैस एवं प्राकृतिक गैस लिमिटेड - श्री बीसी त्रिपाठी
ओएनजीसी - श्री सुरेश डंडियाल
At @AmarUjalaNews' CSR Awards 2017 where I spoke on how CSR should be more about "Strategy" than "Charity" for sustainable progress for all. pic.twitter.com/oxC5L3rAsS
— Vijay Goel (@VijayGoelBJP) October 30, 2017
सीएसआर का अर्थ और महत्व
बता दें कि सीएसआर का अर्थ है कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी। दूसरे शब्दों में कंपनियों का सामाजिक उत्तरदायित्व। इसके मूल में यह परोपकारी मंशा है कि अपने व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करते हुए समाज की भलाई में भी योगदान किया जाए और यदि ऐसा कोई कंपनी कर रही है तो उसे प्रोत्साहित करने के लिए उसकी पहचान करके उसे सम्मानित भी किया जाए। ये कंपनियां न केवल देश के आर्थिक विकास में योगदान देती हैं बल्कि गरीब परिवारों, स्थानीय समुदायों के उत्थान के साथ-साथ उनके जीवनस्तर के सुधार में अहम योगदान देती हैं।
1. सेल्स में टॉप पर मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। यही नहीं 51 फीसदी शेयर के साथ यह सेल्स में भी टॉप पर है। कंपनी कार बनाने के अलावा डीलरशिप, इंश्योरेंस, कार फाइनेंस, ट्रूवैल्यू जैसे बिजनेस और सीएसआर के तहत अपना ड्राइविंग स्कूल भी देश के कई शहरों में संचालित कर रही है।
2. नवरत्नों में शामिल पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
भारत की नवरत्न कंपनियों में शामिल पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन देश में बनाई गई 50 फीसदी बिजली को ट्रांसमिट करती है। इसके साथ ही यह नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर के जरिए राज्यों को होने वाली बिजली आपूर्ति पर भी निगाह रखती है।
3. दिग्गज एग्रोकेमिकल कंपनी है धानुका
धानुका एग्रीटेक देश की दिग्गज एग्रोकेमिकल कंपनी है। यह कई तरह के कीटनाशकों (हर्बिसाइड्स, इनसेक्टिसाइड्स, मीटिसाइड्स और फंगीसाइड्स) का उत्पादन करती है। कंपनी हर साल 10 मिलियन किसानों को अपने उत्पाद बेचती है, जिसके लिए 75 हजार रिटेलर्स का नेटवर्क है।
4. महारत्न है एनटीपीसी
नेशनल थर्मल पॉवर कारर्पोशन लिमिटेड (एनटीपीसी) भारत की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक महारत्न कंपनी है। 2016 में विश्व की 2000 सबसे बड़ी कंपनियों में एनटीपीसी का 400वां स्थान था। भारत सरकार की इस कंपनी में 89.5 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी 50,750 मेगावॉट बिजली बनाती है। इसके 19 कोयला आधारित और 7 गैस आधारित स्टेशन हैं। ज्वाइंट वेंचर के तहत 9 स्टेशन कोयला आधारित और 11 अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं भी हैं।
5. सबसे बड़ा आईपीओ जारी करने वाली कंपनी है पीएफसी
पावर फाइनेंस कार्पोरेशन (पीएफसी) एक वित्तीय कंपनी है, जो बिजली कंपनियों को प्रोजेक्ट खड़ा करने में आर्थिक मदद करती है। केंद्र सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली इस कंपनी ने 2007 में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ जारी किया था। कंपनी को केपीएमजी और आईएसओ की तरफ से अवॉर्ड व सर्टिफिकेट मिल चुका है। फिलहाल यह नवरत्न कंपनी में शुमार है।
6. दुनिया में है गेल की चमक
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) महारत्न कंपनियों में शुमार है। गेल नेचुरल गैस, लिक्विड हाइड्रोकॉर्बन, एलपीजी ट्रांसमिशन, पेट्रोकेमिकल, पीएनजी, सीएनजी की सप्लाई और बिजली बनाने के उपक्रम में है। इसके पास अभी विश्व की सबसे बड़ी एलपीजी और नेचुरल गैस पाइपलाइन का नेटवर्क है।
7. फॉर्च्यून 500 में 335वें नंबर पर ओएनजीसी
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी है। यह फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की लिस्ट में 335वें स्थान पर है। यह भारत में कच्चे तेल के कुल उत्पादन में 77 फीसदी और गैस के उत्पादन में 81 फीसदी का योगदान करती है।
यह सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे अधिक लाभ अर्जित करने वाली कंपनी है। भारत सरकार की इसमें 74.14 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके स्वामित्व में एक 11000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन है, जिसका परिचालन यह खुद करती है। मार्च 2007 तक इसका मार्केट कैप देश में सबसे ज्यादा था।
1. सेल्स में टॉप पर मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। यही नहीं 51 फीसदी शेयर के साथ यह सेल्स में भी टॉप पर है। कंपनी कार बनाने के अलावा डीलरशिप, इंश्योरेंस, कार फाइनेंस, ट्रूवैल्यू जैसे बिजनेस और सीएसआर के तहत अपना ड्राइविंग स्कूल भी देश के कई शहरों में संचालित कर रही है।
2. नवरत्नों में शामिल पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
भारत की नवरत्न कंपनियों में शामिल पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन देश में बनाई गई 50 फीसदी बिजली को ट्रांसमिट करती है। इसके साथ ही यह नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर के जरिए राज्यों को होने वाली बिजली आपूर्ति पर भी निगाह रखती है।
3. दिग्गज एग्रोकेमिकल कंपनी है धानुका
धानुका एग्रीटेक देश की दिग्गज एग्रोकेमिकल कंपनी है। यह कई तरह के कीटनाशकों (हर्बिसाइड्स, इनसेक्टिसाइड्स, मीटिसाइड्स और फंगीसाइड्स) का उत्पादन करती है। कंपनी हर साल 10 मिलियन किसानों को अपने उत्पाद बेचती है, जिसके लिए 75 हजार रिटेलर्स का नेटवर्क है।
4. महारत्न है एनटीपीसी
नेशनल थर्मल पॉवर कारर्पोशन लिमिटेड (एनटीपीसी) भारत की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक महारत्न कंपनी है। 2016 में विश्व की 2000 सबसे बड़ी कंपनियों में एनटीपीसी का 400वां स्थान था। भारत सरकार की इस कंपनी में 89.5 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी 50,750 मेगावॉट बिजली बनाती है। इसके 19 कोयला आधारित और 7 गैस आधारित स्टेशन हैं। ज्वाइंट वेंचर के तहत 9 स्टेशन कोयला आधारित और 11 अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं भी हैं।
5. सबसे बड़ा आईपीओ जारी करने वाली कंपनी है पीएफसी
पावर फाइनेंस कार्पोरेशन (पीएफसी) एक वित्तीय कंपनी है, जो बिजली कंपनियों को प्रोजेक्ट खड़ा करने में आर्थिक मदद करती है। केंद्र सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली इस कंपनी ने 2007 में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ जारी किया था। कंपनी को केपीएमजी और आईएसओ की तरफ से अवॉर्ड व सर्टिफिकेट मिल चुका है। फिलहाल यह नवरत्न कंपनी में शुमार है।
6. दुनिया में है गेल की चमक
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) महारत्न कंपनियों में शुमार है। गेल नेचुरल गैस, लिक्विड हाइड्रोकॉर्बन, एलपीजी ट्रांसमिशन, पेट्रोकेमिकल, पीएनजी, सीएनजी की सप्लाई और बिजली बनाने के उपक्रम में है। इसके पास अभी विश्व की सबसे बड़ी एलपीजी और नेचुरल गैस पाइपलाइन का नेटवर्क है।
7. फॉर्च्यून 500 में 335वें नंबर पर ओएनजीसी
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी है। यह फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की लिस्ट में 335वें स्थान पर है। यह भारत में कच्चे तेल के कुल उत्पादन में 77 फीसदी और गैस के उत्पादन में 81 फीसदी का योगदान करती है।
यह सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे अधिक लाभ अर्जित करने वाली कंपनी है। भारत सरकार की इसमें 74.14 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके स्वामित्व में एक 11000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन है, जिसका परिचालन यह खुद करती है। मार्च 2007 तक इसका मार्केट कैप देश में सबसे ज्यादा था।