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Amar Ujala Batras: डिजिटल युग में वीडियो-गेम में फंसे बच्चे, अभिभावकों के लिए कितनी चुनौती? देखें पॉडकास्ट
Sat, 28 Feb 2026 08:10 PM IST
Kirtivardhan Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Sat, 28 Feb 2026 08:10 PM IST
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बतरस में मोबाइल के दुष्प्रभावों पर चर्चा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई डिजिटल युग की चुनौतियों की। दरअसल, आधुनिक समय में जिस तरह मोबाइल का प्रसार बढ़ा, वैसे-वैसे हर उम्र वर्ग के लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं। आलम यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रील्स और मोबाइल पर ऑनलाइन गेम्स ने अब वयस्कों और बच्चों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। इनका प्रभाव भी इस कदर बढ़ा है कि लोग अपने आपको नुकसान पहुंचाने तक के लिए तैयार हो जाते हैं।
एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में डिजिटल दुनिया के बच्चों पर पड़ते प्रभाव को लेकर दो मेहमानों से स्टूडियो में चर्चा की और जाना कि आखिर यह समस्या कितनी गंभीर है और इसका सामना कैसे किया जा सकता है।
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
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एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में डिजिटल दुनिया के बच्चों पर पड़ते प्रभाव को लेकर दो मेहमानों से स्टूडियो में चर्चा की और जाना कि आखिर यह समस्या कितनी गंभीर है और इसका सामना कैसे किया जा सकता है।
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
अमर उजाला के स्टूडियो में इस डोमेन से जुड़े जिन दो विशेषज्ञों से बात की गई, उनमें पैरेंटिंग एक्सपर्ट हिमांशु गौड़ और चाइल्ड साइकाएट्रिस्ट दीपक कौल शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- डिजिटल युग में अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है? वीडियो और गेम्स की लत का बच्चों के व्यवहार पर कैसा असर होता है? स्क्रीन टाइम पर अभिभावकों का व्यवहार कैसा होना चाहिए? गेम खेलना और लत लग जाना अभिभावक कैसे पहचानें? वर्किंग पेरेंट्स बच्चों से स्क्रीन को लेकर व्यवहार कैसे रखें?
इतना ही नहीं विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि गेम बनाने वाले बच्चों की कौन सी साइकोलॉजी पर काम करते हैं? स्क्रीन के लिए बच्चे और पेरेंट्स के बीच टकराव को कैसे रोकें? गेम को लेकर बच्चों का मनोविज्ञान कैसे प्रभावित होता है? स्क्रीन टाइम कम करने पर बच्चों के चिड़चिड़ेपन को कैसे संभालें? इसके अलावा क्या पेरेंटिंग का कोई सही नियम कुछ हो सकता है?
इतना ही नहीं विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि गेम बनाने वाले बच्चों की कौन सी साइकोलॉजी पर काम करते हैं? स्क्रीन के लिए बच्चे और पेरेंट्स के बीच टकराव को कैसे रोकें? गेम को लेकर बच्चों का मनोविज्ञान कैसे प्रभावित होता है? स्क्रीन टाइम कम करने पर बच्चों के चिड़चिड़ेपन को कैसे संभालें? इसके अलावा क्या पेरेंटिंग का कोई सही नियम कुछ हो सकता है?