स्मृति शेष अमर सिंहः जिस शिद्दत से अमर ने निभाई दोस्ती, उसी शिद्दत से दुश्मनी भी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Aug 2020 04:05 AM IST
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अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव(फाइल फोटो)
अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव(फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

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सार

  • अमर सिंह को मीडिया में खबरें छपवाने का था हुनर
  • संघ के नाम कर दी 12 करोड़ की संपत्ति
  • राजनेता अमर सिंह से सीधे उलझने से बचते थे

विस्तार

खुद को सार्वजनिक तौर पर मुलायमवादी कहने वाले कद्दावर नेता अमर सिंह नहीं रहे। सिंह ऐसे नेता थे जिसने जिस शिद्दत से दोस्ती निभाई, उतनी ही शिद्दत से दुश्मनी भी। दोनों ही मोर्चों पर रत्ती भर भी कंजूसी नहीं बरती। उत्तर प्रदेश से राजनीति की शुरुआत करने वाले अमर सिंह हमेशा विवादों में रहे मगर इसके बावजूद कई दलों के लिए हमेशा अपरिहार्य भी बने रहे।
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चाहे राजनीति हो या उद्योग या फिर बॉलीवुड। सभी क्षेत्रों में अमर सिंह की समान धाक बनी रही। तीनों क्षेत्रों में अमर सिंह ने दोस्त और दुश्मन खड़े किए।  सिंह ने दोस्ती और दुश्मनी निभाने में किसी सीमा रेखा को आड़े नहीं आने दिया। अपने पूरे करिअर के दौरान अमर सिंह लगातार विवादों में रहे, मगर राजनीति में अपनी जरूरत हमेशा बनाए रखी। कई बार लगा मानो विवाद अमर सिंह का नहीं, बल्कि वे खुद विवादों का पीछा करते हैं।
वह दोस्ती के साथ दुश्मनी निभाने में भी माहिर थे। उन्हें विवादों में पड़ना और जुबानी जंग में उलझना पसंद था। मसलन जब मेगास्टार अमिताभ बच्चन से दोस्ती एक समय ऐसी थी कि उन्हें अमिताभ का अघोषित प्रवक्ता तक कहा गया। मगर जब दोस्ती में दरार आई तो अमर सिंह उसी शिद्दत के साथ दुश्मनी निभाना नहीं भूले।

अमिताभ को पद्मविभूषण मिलने को बॉलीवुड की एक और चर्चित शख्सियत दिलीप कुमार का अपमान बताया। कहा कि जिस अभिनेता पर आपराधिक मामला चल रहा हो, जिसका नाम पनामा पेपर में आया हो, उसे देश का दूसरा सर्वोच्च सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए।



राजनेता सीधे उलझने से बचते थे...
इसी कारण राजनीतिज्ञ अमर सिंह से सीधा उलझने से बचते थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने टैप मामले में अमर सिंह को मजनूं कहा था। सिंह ने पलटवार करते हुए अंबिका सोनी को लैला करार दे दिया था।

मीडिया में खबरें छपवाने का था हुनर
उन्हें पता था कि मीडिया में खबरें कैसे छपवानी है। अपनी इस कला का उपयोग वह अपने दुश्मनों पर निशाना साधने के लिए करते थे। चाहे अंबिका सोनी हों या आजम खां या जया बच्चन। मसलन साल 2016 में जब देश में बीफ पर सियासत गरम थी, तब अमर सिंह ने इसे अपना हथियार बनाया। मानसून सत्र के दौरान संसद भवन परिसर में पत्रकारों से निजी बातचीत में अपने अंदाज में जया पर बीफ और पोर्क खाने का आरोप लगाया। कहा, एक बार एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ग्लासगो गया था। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल जया ने वहां पोर्क के साथ बीफ भी खाया था।

संघ के नाम की 12 करोड़ की संपत्ति
आजमगढ़ में लालगंज के तरवां तहसील के निवासी अमर सिंह ने 22 फरवरी 2019 को अपना तरवा का मकान और जमीन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था सेवा भारती संस्थान के नाम कर दी थी। लालगंज तहसील में उन्होंने अपनी करीब 12 करोड़ की संपत्ति की रजिस्ट्री की थी। अमर के इस कदम को भाजपा से नजदीकी के रूप में देखा गया। यह भी संकेत मिले कि वह भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। 

सभी दलों के बड़े नेताओं से दोस्ती
सभी दलों के बड़े नेताओं से दोस्ती रही। कई दलों ने मदद ली। 2008 में यूपीए-1 की सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाई। तब सांसदों की खरीद के लिए चर्चित कैश फॉर वोट कांड में गिरफ्तार भी हुए। मगर वही अमर सिंह यूपीए-2 सरकार में अपमानित हुए। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद सोनिया गांधी द्वारा आयोजित भोज में उन्हें अवांछित मेहमान घोषित किया गया।

कभी थे मुलायम के दाहिने हाथ...
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के दाहिने हाथ के रूप में उनकी पहचान रही। खास इतने कि मुलायम बिना अमर के कोई फैसला नहीं लेते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों में मुलायम परिवार से इतनी खटास हुई कि सबसे ज्यादा निशाने पर वही अमर सिंह का सपा के ही कद्दावर नेता आजम खान से जबरदस्त टकराव हुआ।

इस टकराव में पहले आजम खां की सपा से विदाई हुई और जब आजम की वापसी हुई तो अमर सिंह की विदाई हो गई। पार्टी में अखिलेश यादव के बढ़ते प्रभाव के कारण सपा में उनका दखल लगातार घटता रहा।
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