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सहयोगियों को पसंद नहीं आ रही भाजपा की रामधुन, विकास के एजेंडे पर ही आम चुनाव में उतरना चाहते हैं

Mon, 24 Dec 2018 04:56 AM IST
तिवारी अभिषेक हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: तिवारी अभिषेक Updated Mon, 24 Dec 2018 04:56 AM IST
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Allies in NDA want to contest Lok Sabha elections on the development agenda instead of Ram temple
Nitish kumar, Ram vilas Paswan

आगामी आम चुनाव में भले ही भाजपा और संघ परिवार राम मंदिर के मुद्दे को तूल देते दिख रहे हैं, मगर राजग में शामिल सहयोगी दलों को ऐन चुनाव के मौके पर बजाई जा रही राम नाम की धुन पसंद नहीं आ रही। इस मुद्दे पर अपना दल, लोजपा, आरपीआई के बाद अब जदयू ने सार्वजनिक तौर पर भाजपा को आगाह कर दिया है।

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ये सभी दल राम मंदिर के बदले विकास के एजेंडे पर लोकसभा चुनाव में उतरना चाहते हैं। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने रविवार को साफ कर दिया कि अगले चुनाव में राजग का एजेंडा राम मंदिर नहीं विकास है। लोजपा सूत्रों के मुताबिक उनकी पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सीट बंटवारे पर हुई मैराथन बैठक के दौरान साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी राम मंदिर के एजेंडे से कतई सहमत नहीं है।
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इसके बाद अपना दल कोटे की केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा था कि राजग का मुख्य चुनावी मुद्दा विकास है। अगर राम मंदिर के लिए अध्यादेश या कानून बनाने की बात आई तो उनकी पार्टी इस संबंध में बैठक कर निर्णय लेगी। आरपीआई के मुखिया और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले भी राम मंदिर की जगह विकास को राजग का प्रमुख एजेंडा बता चुके हैं। 
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बिहार में राजग में सीट बंटवारे पर सहमति के बाद अब इस मुद्दे पर नीतीश ने सार्वजनिक तौर पर भाजपा नेतृत्व को आगाह किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगले चुनाव में राजग का एजेंडा विकास है ना कि राम मंदिर। जदयू के एक महासचिव के मुताबिक अगर भाजपा ने राम मंदिर मुद्दे को आगे किया तो पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा हो जाएगी।  

 

भाजपा में असमंजस 

इस मुद्दे पर भाजपा में असमंजस है। पहले पार्टी की रणनीति राज्यसभा में निजी बिल के माध्यम से राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव लाने की थी। मगर बाद में इस आशय की घोषणा करने वाले सांसद राकेश सिन्हा ने चुप्पी साध ली। पार्टी के सांसद संसदीय दल में राम मंदिर के लिए कानून की मांग कर रहे हैं, जबकि खुद पार्टी अध्यक्ष शाह ने विहिप और संघ के अध्यादेश या कानून बनाने की मांग पर कहा था कि पार्टी इस मुद्दे पर जनवरी के अंत में होने वाली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार करेगी। गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर शाह ने दो दिन पूर्व संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी बंद कमरे में बात की है। 

घेर रही है शिवसेना तो अकाली चुप 
मुख्य सहयोगियों में शिवसेना जिसने अगला लोकसभा चुनाव अलग लडने का फैसला किया है, उसने हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा का पेच कसने की रणनीति बनाई है। जबकि दूसरी सहयोगी अकाली  दल चुप है। शिवसेना खुल कर राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाने या कानून बनाने का मांग कर रही है। इसी रणनीति के तहत शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे के अयोध्या के बाद अब काशी की यात्रा करने की घोषणा की है।

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