मुलायम की इच्छा को पोषित करना चाहते हैं अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव की इच्छा को पोषित करना चाहते हैं। 5 अक्टूबर से आगरा में प्रस्तावित राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन में वह मुलायम सिंह यादव के साथ चाचा शिवपाल की भी उपस्थिति चाहते हैं।
सूत्र बताते हैं अखिलेश ने यह कदम पिता मुलायम सिंह यादव की सलाह को मानकर उठाया है। मुलायम सिंह यादव ने सम्मेलन में आने के लिए अपनी सहमति दे दी है।
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अखिलेश के करीबी और राज्यसभा सदस्य सांसद का कहना है कि अखिलेश ने चाचा शिवपाल यादव को सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए उन्हें फोन किया। उनसे करीब दस मिनट तक बात की और गिला शिकवा दूर करने का प्रयास किया। यदि ऐसा होता है तो एक बार उत्तर प्रदेश के इस राजनीतिक परिवार में दरार खत्म हो जाएगी और एकता का रास्ता आगे बढ़ जाएगा।
शिवपाल को भी पता है कि अलग पार्टी बनाना कितना मुश्किल है
1992 में समाजवादी पार्टी का गठन करने वाले मुलायम सिंह यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह कोई नई पार्टी नहीं बनाएंगे। मुलायम सिंह के इस बयान के बाद शिवपाल एक तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं।
शिवपाल को भी पता है कि अलग पार्टी बनाना, उसे खड़ा करना कितना मुश्किल है। वह भी बिना मुलायम सिंह यादव के। इसमें जोखिम भी है और सफलता की संभावना भी क्षीण है। वहीं किसी भी पुराने राजनीतिक दल का सदस्य बनने की राह कांटो भरी ही है। लेकिन पिछले साल से अखिलेश और प्रो. राम गोपाल के साथ हुआ मनभेद भी उनको साल रहा है।
अखिलेश का रास्ता पूरी तरह साफ
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का रास्ता अब निष्कंटक है। वह पहली बार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।
अभी तक यह सम्मान मुलायम सिंह के पास रहता था, लेकिन पिछले साल जनेश्वर मिश्र पार्क में पार्टी और परिवार के भीतर विवाद बढ़ जाने के बाद सपा के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने सम्मेलन की अध्यक्षता की थी।
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मुलायम सिंह यादव को इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाकर अखिलेश को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। इस तरह से सच्चे अर्थों में अखिलेश मुलायम सिंह यादव के वारिस के तौर पर पार्टी में स्थापित हो चुके हैं।
एकता का महत्व तो है
समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों, वर्गो, समाज और लोगों के सहयोग से समाजवादी पार्टी आगे बढ़ी थी। मुलायम सिंह यादव ने बेनी बाबू, आजम, जनेश्वर के साथ पार्टी को धार दी थी।
शिवपाल ने दिन-रात मेहनत की थी। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इसलिए सभी के एकजुट होने का महत्व है। इससे जहां पार्टी के समर्थकों का भ्रम दूर होगा, वहीं आगे के राजनीतिक अभियान को दिशा दी जा सकेगी।
वैसे भी 5 अक्टूबर के राष्ट्रीय सम्मेलन में समाजवादी पार्टी के नये कलेवर का आगाज हो जाएगा। यह सम्मेलन जहां अखिलेश यादव की अध्यक्षता में होगा। इस तरह से अखिलेश पर भी सबको साथ लेकर चलने का दबाव बढ़ जाएगा।