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Supreme Court: दिव्यांगों के प्रति अधिक दयालु और संवेदनशील हों एयरपोर्ट कर्मचारी, जानें SC ने ऐसा क्यों कहा

Tue, 12 Nov 2024 07:51 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 12 Nov 2024 07:51 PM IST
सार

देश की सर्वोच्च अदालत ने एक दिव्यांग महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि एयरपोर्ट के कर्मचारियों को दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति अधिक दयालु होने के लिए संवेदनशील बनाया जाना चाहिए और उन्हें नियमित अंतराल पर आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

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Airport staff should be sensitised to be more compassionate towards persons with disabilities: SC
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हवाई अड्डों पर कर्मचारियों को दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति अधिक दयालु होने के लिए संवेदनशील बनाया जाना चाहिए और उन्हें नियमित अंतराल पर आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने व्हीलचेयर पर बैठी एक महिला की तरफ से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की, जिसे कोलकाता हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के लिए बार-बार खड़ा होने के लिए कहा गया था।
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'एयरपोर्ट कर्मचारियों को नियमित पशिक्षण दिया जाना चाहिए'
इस मामले में पीठ ने कहा, हम हवाई अड्डों पर कर्मचारियों को दिव्यांग यात्रियों के प्रति अधिक दयालु होने के लिए संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर अधिक जोर देते हुए रिट याचिका का निपटारा करते हैं। नियमित अंतराल पर आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और इसमें हवाई अड्डों पर यात्रियों के सामने आने वाली समस्याओं में उनकी सहायता करना शामिल होना चाहिए।
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मामले में पूर्व CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किए थे आदेश
शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ की तरफ से पहले ही एक विस्तृत आदेश पारित किया जा चुका है, जिसमें केंद्र को विकलांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच में सुधार के लिए तीन महीने के भीतर अनिवार्य पहुंच मानकों को लागू करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने कहा था, पहुंच की न्यूनतम सीमा बनाने को प्रगतिशील अहसास की वेदी पर नहीं छोड़ा जा सकता है।
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एयरपोर्ट पर महिला को CISF जवान ने तीन बार खड़े होने को कहा था
शीर्ष अदालत गुरुग्राम निवासी आरुषि सिंह की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने कहा था कि कोलकाता हवाई अड्डे पर उनकी सुरक्षा मंजूरी के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक जवान ने उन्हें तीन बार खड़े होने के लिए कहा था। महिला के वकील ने व्हीलचेयर पर बैठे यात्रियों की मदद के लिए हवाई अड्डे पर महिला सुरक्षा गार्ड और सहायक कर्मचारियों की कमी का हवाला दिया था।


एयरपोर्ट पर किसी ने नहीं की महिला की मदद
उनके वकील ने कहा, जब वह यात्रा कर रही थीं, तो उन्होंने सहायता मांगी। लेकिन कोई नहीं आया। जांच के दौरान, उनसे कई बार खड़े होने के लिए कहा गया। उन्होंने पूछा कि वह कुछ मिनटों के लिए खड़ी क्यों नहीं हो सकतीं," उन्होंने आगे कहा कि यात्री 75 प्रतिशत विकलांग थीं। हवाई अड्डों पर सुरक्षा मुख्य रूप से दो एजेंसियों - सीआईएसएफ और राज्य पुलिस की तरफ से प्रदान की जाती है।


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