फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Air Pollution in India Health matters special Opinion Article news

आखिर: नीति या तकनीक से नहीं, साझा जिम्मेदारियों से बदलेगी हवा

Mon, 10 Nov 2025 07:56 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र रितेश पांडेय, पूर्व सांसद
रितेश पांडेय, पूर्व सांसद Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 10 Nov 2025 07:56 AM IST
सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता राजधानियों में सबसे खराब है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 21.8 लाख लोगों की मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जो चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।

विज्ञापन
Air Pollution in India Health matters special Opinion Article news
वायु प्रदूषण - फोटो : Freepik

विस्तार

हमारे देश में वायु प्रदूषण की समस्या न केवल पर्यावरणीय, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या भी बन चुकी है। बरसात का मौसम खत्म होने के साथ ही देश के बड़े हिस्से में, विशेषकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में हवा जहरीली होने लगती है। त्योहारों, पटाखों, पराली जलाने और ठंडी हवाओं की कमी जैसे कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं। आंकड़े बताते हैं कि भारत में आबादी के हिसाब से हवा में पार्टिकुलेट मैटर्स 2.5 की औसत उपस्थिति विश्व में सर्वाधिक है। ये कण फेफड़ों में पहुंच कर हृदय और सांस संबंधी रोगों का कारण बनते हैं।
विज्ञापन


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता राजधानियों में सबसे खराब है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 21.8 लाख लोगों की मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जो चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स ने चेताया है कि उत्तर भारत में रहने वाले लगभग 51 करोड़ लोग अपनी आयु का औसतन 7.6 वर्ष खो सकते हैं। बड़े शहरों में यह औसत और अधिक है। लंबे समय तक प्रदूषित वायु के संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक और हृदय रोग जैसी जानलेवा बीमारियां उत्पन्न होती हैं। जहरीली हवा से आंखों में जलन, खांसी, और सांस फूलने जैसी तात्कालिक समस्याएं तो होती ही हैं, बाद में यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर करती है, जिससे दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन

आर्थिक दृष्टि से भी यह एक बड़ी समस्या है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वायु प्रदूषण से लगभग तीन प्रतिशत यानी करीब सात लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है। हर वर्ष अक्तूबर-नवंबर के दौरान उत्तर भारत में पराली जलाने का सिलसिला दोहराया जाता है। संसाधनों और समय की कमी के कारण किसान फसल कटाई के बाद खेत जल्दी साफ करने के लिए पराली जलाने को मजबूर होते हैं। पंजाब में 2009 का एक कानून किसानों को जून से पहले धान बोने से रोकता है, जिससे कटाई और अगली बुआई के बीच केवल 10 दिन का अंतर रह जाता है। हालांकि सरकारी प्रयास और जागरूकता अभियानों ने पंजाब में कुछ सकारात्मक असर डाला है। चिंताजनक बात यह है कि जहां पंजाब और हरियाणा

में पराली जलाने की घटनाएं कम हो रही हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस साल 15 सितंबर से 21 अक्तूबर के बीच उत्तर प्रदेश में सभी राज्यों से अधिक पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। उपग्रह के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 58 जिलों में पराली जलाने के मामले मिले हैं। वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश को फसल अवशेष प्रबंधन कायक्रम के तहत मात्र 500 करोड़ रुपये की सहायता मिली है, जबकि पंजाब को 1,531 और हरियाणा को 1,006 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। कम वित्तीय सहायता और वैकिल्पक तकनीकों की कमी उत्तर प्रदेश में समस्या को बढ़ा रही है।
 

केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण से मुकाबले के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं। साल 2021 में स्थापित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सक्रिय है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि पराली जलाना नागरिकों के स्वच्छ हवा के अधिकार का उल्लंघन है, लेकिन राजनीतिक दबाव और किसानों के असंतोष के चलते प्रदूषण नियंत्रण की कोशिशें कमजोर हुई हैं।

भारत की वायु प्रदूषण की समस्या मौसम, औद्योगिकीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या और कृषि पद्धतियों के मिश्रण से उपजी जटिल चुनौती है। इसलिए समाधान भी बहुआयामी होने चाहिए। हमें दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन, किसानों को तकनीकी सहायता और वैकल्पिक तकनीक के लिए वित्तीय मदद जैसे उपायों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। लोगों में जागरूकता और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी भी जरूरी है। निगरानी तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। इन प्रयासों से निश्चय ही आगामी वर्षों में भारत वायु प्रदूषण से निपट सकता है।
विज्ञापन

सरकार को दीर्घकालिक और टिकाऊ कृषि नीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें पराली प्रबंधन के लिए मशीनों को सब्सिडी देने का प्रावधान हो। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त निरीक्षण और नियंत्रण लागू होना चाहिए तथा इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उद्योग, ऊर्जा संयंत्र और भवन निर्माण गतिविधियों के लिए कड़े उत्सर्जन मानक लागू होने चाहिए। हमें स्वच्छ ऊर्जा अपनाने को अपनी प्राथिमकता बनाना चाहिए। ध्यान रहे, देश में वायु प्रदूषण सिर्फ नीति या तकनीक अपनाने से नियंत्रित नहीं होगा, बल्कि इसमें स्थायी सुधार लाने के लिए हम सभी को साझा जिम्मेदारी निभानी होगी और अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा। वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर और पुरानी है, इसलिए इसके समाधान में भी समय, संधाधन और अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed