{"_id":"5f1b1d1f1110ce69553e58e8","slug":"air-india-pilots-salary-cuts-and-company-top-management-officials-gets-package-in-crores-now","type":"story","status":"publish","title_hn":"एयर इंडिया की अजब कहानी: पायलटों के वेतन में भारी कटौती, मैनेजमेंट के लोग ले रहे महंगे क्लब का मजा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एयर इंडिया की अजब कहानी: पायलटों के वेतन में भारी कटौती, मैनेजमेंट के लोग ले रहे महंगे क्लब का मजा
Fri, 24 Jul 2020 11:10 PM IST
आसिम खान
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Fri, 24 Jul 2020 11:10 PM IST
विज्ञापन
एयर इंडिया
- फोटो : Air India
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एयर इंडिया के पायलटों ने आरोप लगाया है कि खर्च में कटौती के नाम पर जहां उनके वेतन में भारी कटौती की जा रही है, वहीं संस्थान के टॉप मैनेजमेंट के अधिकारी अभी भी करोड़ों के पैकेज का मजा ले रहे हैं। इतना ही नहीं, एयर इंडिया के खर्च पर अभी भी उन्हें शहर के सबसे महंगे क्लबों की सदस्यता, कार-पेट्रोल और अन्य ढेरों सुविधाएं दी जा रही हैं जिसका हिसाब करोड़ों रुपयों में बनता है।
विज्ञापन
एयर इंडिया पायलटों ने मैनेजमेंट के इस रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई है और कहा है कि खर्च कटौती का असर केवल पायलटों पर गिराना गलत है। पायलटों ने एयर इंडिया मैनेजमेंट से अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। एयर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राजिव बंसल को शुक्रवार को लिखे पत्र में इंडियन पायलट्स गिल्ड ने आरोप लगाया है कि संस्थान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को प्रति माह 140 लीटर पेट्रोल, फंक्शनल डायरेक्टर को 270 लीटर पेट्रोल दिए जाते हैं।
विज्ञापन
इसके आलावा एयर इंडिया के खर्च पर उन्हें लीज पर 63 कारें उपलब्ध कराई जाती हैं जिनकी प्रति वर्ष करोड़ों में खर्च आता है। पायलटों के संगठन ने कहा है कि अगर खर्च में कटौती करनी है तो सबसे पहले इन गैर जरुरी खर्चों को रोका जाना चाहिए। वेतन कटौती का भार भी सबसे पहले उन डायरेक्टर्स पर चलाया जाना चाहिए जिनके अदूरदर्शी फैसलों के कारण एयर इंडिया का घाटा बढ़ता गया। वर्ष 2017 में एयर इंडिया का घाटा बढ़कर 70 हजार करोड़ रूपये तक पहुंच चुका है, जबकि उसके लगभग सालभर पहले यह केवल 48 हजार करोड़ रुपये था।
विज्ञापन
संगठन का आरोप है कि यह घाटा मैनेजमेंट के गलत निर्णयों की वजह से बढ़ रहा है, इसलिए इसकी गाज सबसे पहले उन्हीं पर गिरनी चाहिए। जबकि इसके लिए टॉप अधिकारियों की बजाय उन पायलटों को निशाना बनाया जा रहा है जिन्होंने कोरोना काल में अपनी जान की प्रवाह न करते हुए न सिर्फ लोगों की सेवा की, बल्कि इस दौरान लोगों का आत्मबल भी बनाये रखा। ध्यान देने की बात है कि केंद्र सरकार के वंदे भारत योजना के तहत अब तक आठ लाख से ज्यादा भारतीयों को स्वदेश वापस लाया जा चुका है। इसका श्रेय फ्रंटलाइन वारियर यानी पायलटों को जाता है।
अपनी इस सेवा के दौरान लगभग 60 पायलट कोरोना की चपेट में भी आ गये, लेकिन उन्होंने अपनी या अपने परिवार के लोगों के हितों की बजाय राष्ट्रीय हित को महत्त्व दिया। उनकी इस सेवा के बदले में अब उन्हें बिना वेतन के अवकाश पर जाने का आदेश दिया जा रहा है और वेतन में 40 से 70 फीसदी तक की कटौती का आदेश दिया जा रहा है। पायलटों ने इन फैसलों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।