वंदेभारत योजना में जिन पायलटों ने दिया था देशभक्ति का परिचय, उन्हें सरकार से ईनाम में मिली बेरोजगारी और भुखमरी!
- कोरोना के खतरे के बीच भी अपनी ड्यूटी पर तैनात रहे पायलट, लाखों भारतीयों को लाए स्वदेश
- अब उन्हें बिना वेतन पर अवकाश पर जाने और वेतन में भारी कटौती जैसे निर्णयों का करना पड़ रहा सामना
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एयर इंडिया के पायलट्स ने ‘बिना वेतन छुट्टी पर जाने’ और ‘वेतन में कटौती’ के फैसलों पर गंभीर आपत्ति जताई है। एयर इंडिया की एग्जीक्यूटिव पायलट्स एसोसिएशन ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को गुरुवार को एक पत्र लिखते हुए कहा कि कोविड-19 के महामारी काल में जिस समय पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अपना कर्तव्य निर्वाह किया है और देश सेवा को सबसे आगे रखा है, उनके लिए इस तरह का निर्णय लेना बेहद तकलीफदेह है। इससे न सिर्फ पायलट्स का मनोबल टूटा है, बल्कि इससे एयर इंडिया के विनिवेश की संभावनाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।
पायलटों ने कहा है कि कोविड काल में जब लोगों की जान पर खतरा था, उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को दांव पर रखकर सरकार की वंदे भारत योजना को पूरी करने में अपनी भूमिका निभाई। ऐसा करने के दौरान स्वयं पायलट्स के साथ-साथ उनके परिवार के लोगों को कोरोना संक्रमण होने का खतरा था, लेकिन पायलट्स ने अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देकर अपने इस राष्ट्रीय कर्तव्य का निर्वाह किया।
इस दौरान अपनी ड्यूटी निभाते हुए कम से कम 60 पायलट्स कोरोना संक्रमित हुए और एक पायलट काे पूरे परिवार को भी कोरोना हो गया, लेकिन उनके इस बेहद कीमती योगदान को भुलाते हुए उनको पांच साल बिना वेतन के छुट्टी पर भेजे जाने और उनकी वेतन कटौती का कष्टप्रद निर्णय ले लिया गया।
सबसे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि ऐसा निर्णय लेते हुए पायलट्स संगठनों को बिलकुल भी भरोसे में नहीं लिया गया जबकि उनके हितों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले उन्हें भरोसे में लिया जाना चाहिए था।
पायलट्स ने केवल भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने में अपनी भूमिका नहीं निभाई, बल्कि कार्गो ऑपरेशन को पूर्ण करने में भी अपनी भूमिका निभाई। अपनी इस ड्यूटी को पूरी करने के दौरान भी अनेक पायलट्स कोरोना संक्रमण की चपेट में आये। इसके बाद भी वे अपनी ड्यूटी से पीछे नहीं हटे और अपने राष्ट्रीय दायित्व को निभाया।
उनके इस साहस का ही परिणाम हुआ कि अन्य साथी एयर लाइन्स के पायलट्स भी अपनी सेवाएं देने के लिए स्वयं को तैयार कर पाए। लेकिन इन पायलट्स के इस योगदान को भी सरकार ने एक झटके में भुला दिया और उनके हितों के विरुद्ध इतना बड़ा अमानवीय निर्णय ले लिया।
एग्जीक्यूटिव पायलट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैप्टन वी.एन. बम्बोले सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि इस तरह के अमानवीय निर्णय से उनके जैसे हजारों पायलट्स के उस अधिकार का उल्लंघन हुआ है, जिसके तहत वे इस आपदकाल में विशेष सहायता पाने के हकदार थे।
पत्र में कहा गया है कि इस निर्णय से एयर इंडिया को भारी संख्या में ऐसे मुकदमों का सभी सामना करना पड़ सकता है जो प्रभावित लोगों की तरफ से दायर किये जा सकते हैं। इससे एयर इंडिया के संभावित विनिवेश को भी भारी चोट पहुंचेगी क्योंकि स्वाभाविक तौर पर ये सभी वाद संभावित नई कंपनी के हिस्से चले जाएंगे। संगठन ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस तरह के निर्णयों को वापस लेने की अपील की है।