अयोध्या: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड व जमीयत उलेमा ए हिंद दायर करेगा पुनर्विचार याचिका
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के खिलाफ दिसंबर के पहले सप्ताह में पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्वीट कर यह जानकारी दी।
बोर्ड के सचिव और वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के पुनर्विचार याचिका दायर करने से बोर्ड पर कोई विपरीत कानूनी प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी मुस्लिम संगठन पुनर्विचार याचिका दायर करने को लेकर एक राय रखते हैं।
"Exercising our constitutional right, we are going to file a review petition in the #Babrimasjidcase during the first week of December. Sunni Waqf Board's decision not to pursue the case won't legally affect us. All Muslim organizations are on the same page" @Zafaryab_Jilani:
विज्ञापन विज्ञापन— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) November 27, 2019
वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को पुनर्विचार याचिका न डालने का फैसला लिया। बैठक में बोर्ड के सात में से छह सदस्यों ने याचिका न दाखिल करने पर सहमति जताई जबकि सिर्फ एक सदस्य अब्दुल रज्जाक खान चाहते थे कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह पुनर्विचार याचिका नहीं दाखिल करेंगे। हर किसी के अपने विचार होते हैं। हम उनके फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
जिलानी ने कहा कि मुस्लिम समाज आज भी पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ है। जो भी पुनर्विचार याचिका का विरोध कर रहे हैं वो किसी एक शहर में जाकर मुसलमानों का जलसा बुलाएं और उनकी राय जानें। पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुसलमानों की राय को देखते हुए पुनर्विचार याचिका डालने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि पुनर्विचार याचिका का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। हम दिसंबर के पहले सप्ताह में याचिका दाखिल करेंगे।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी करेगा याचिका दाखिल
वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अगले कुछ दिनों के भीतर पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है। मौलाना अरशद मदनी की अगुवाई वाले जमीयत की ओर से जारी बयान के मुताबिक याचिका का मसौदा तैयार हो गया है। मदनी ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करके उनका इरादा देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का बिल्कुल नहीं है। अदालत ने हमें जो हक दिया है पुनर्विचार विचार याचिका दाखिल करके, उस हक का हम इस्तेमाल कर रहे हैं।