गुरुग्राम : मीट की दुकानें बंद करने के फैसले पर भड़के ओवैसी, पूछा- क्या शुक्रवार को बंद रहेंगी शराब की दुकानें?
- गुरुग्राम में हर मंगलवार को मीट की दुकान बंद रहेंगी, नगर निगम का फैसला
- फैसले पर भड़के ओवैसी, पूछा - क्या शुक्रवार को शराब की दुकानें करेंगे बंद
- लाखों भारतीयों का खाना है मीट, इसे अशुद्ध की तरह नहीं देखा जा सकता - ओवैसी
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गुरुग्राम में अब हर मंगलवार को मीट की दुकानें बंद रहेंगी। गुरुग्राम नगर निगम के इस फैसले पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार किया है। एक ट्वीट में ओवैसी ने कहा कि मीट लाखों भारतीयों का खाना है और इसे किसी अशुद्ध सामान की तरह नहीं देखा जा सकता है।
हाल ही में गुरुग्राम नगर निगम की हुई सामान्य बैठक में यह फैसला लिया गया कि मंगलवार को शहर में सभी मीट की दुकानें बंद रहेंगी। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो यह बैठक के एजेंडे का हिस्सा नहीं था लेकिन कथित तौर पर कुछ पार्षदों की ओर से हिंदू भावनाओं के आहत होने का हवाला दिए जाने के बाद यह फैसला लिया गया।
इस फैसले पर सवाल खड़े करते हुए ओवैसी ने ट्वीट किया कि कोई भी शख्स अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहा है, इस पर किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं। लोग मीट खरीद, बेच और खा रहे हैं, वो आपको जबरदस्ती हिस्सा लेने के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं। औवेसी ने आगे कहा कि इस तर्क के आधार पर शुक्रवार को शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए। मांस लाखों भारतीयों का खाना है और इसे किसी अशुद्ध सामान की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
How can beliefs get hurt by what other people are doing in their private lives? People are buying, selling or eating meat, they’re not forcing you to partake
By this logic, close alcohol shops on Friday?
Meat is food for millions of Indians. Cannot treat it as something impure https://t.co/oY0eh0ZknT— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) March 19, 2021
मंगलवार को गुरुग्राम नगर निगम की सामान्य बैठक में यह फैसला लिया गया। गुरुग्राम की मेयर मधु आजाद ने कहा कि नगर निगम के तहत आने वाली सभी मीट की दुकानें मंगलवार को बंद रहेंगी। हालांकि बैठक में एमसीजी आयुक्त विनय प्रताप ने कहा कि भोजन एक स्वतंत्र विकल्प है।
इसके बाद भी निगम की बैठक में यह प्रस्ताव पास हो गया। एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए विनय प्रताप ने कहा कि मेरे विचार में, खाना एक स्वतंत्र प्रक्रिया है। मैं खाता हूं, मेरी पत्नी नहीं खाती, ये हमारी स्वतंत्र सोच है, इसके लिए हम एक-दूसरे को मजबूर नहीं कर सकते। मांस की दुकान बंद करने के अलावा नगर निगम ने दुकान की लाइसेंस फीस को पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का फैसला किया है।