{"_id":"57ecc4b64f1c1bf431573db1","slug":"ailing-pakistani-youth-queues-up-for-an-indian-heart","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तानी युवक के सीने में धड़केगा हिंदुस्तानी दिल","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
पाकिस्तानी युवक के सीने में धड़केगा हिंदुस्तानी दिल
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 29 Sep 2016 02:35 PM IST
विज्ञापन
परिवार के संग मोहम्मद नासिर
- फोटो : टाइम्स ऑफ इंडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उड़ी हमले के बाद जहां भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है, दोनों देश एक-दूसरे से संबंधों को खत्म करने की बात कर रहें हैं वहीं इन सबसे अनजान एक पाकिस्तानी युवक एक अदद दिल और फेफड़े की तलाश में भारत आया हुआ है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला 24 वर्षीय युवक मोहम्मद नासिर अपनी जान बचाने भारत आया हुआ है। नासिर मुंबई के अंधेरी इलाके के एक अस्पताल में भर्ती है। नासिर के दिल में छेद है और उसे बचाने के लिए एक दिल की जरुरत है। इतना हीं नहीं नासिर को जिंदा रखने के लिए उसके फेफड़ो को भी बदलने की भी जरूरत है।
महाराष्ट्र में अंग प्रत्यारोपण का डेटाबेस रखने वाली समिति जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन कमिटी (जेटीसीसी) के सामने एक अजीबो-गरीब स्थिति बन आई है क्योंकि उनकी सूची में नासिर से पहले कोई भी विदेशी मरीज नहीं था। जेटीसीसी के नियमों के मुताबिक प्रत्यारोपण के लिए अंग उपलब्ध होने पर उसे सबसे पहले भारतीय मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है इसके बाद अगर किसी का अंग मिलता है तो ही उसे मोहम्मद नासिर को दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला 24 वर्षीय युवक मोहम्मद नासिर अपनी जान बचाने भारत आया हुआ है। नासिर मुंबई के अंधेरी इलाके के एक अस्पताल में भर्ती है। नासिर के दिल में छेद है और उसे बचाने के लिए एक दिल की जरुरत है। इतना हीं नहीं नासिर को जिंदा रखने के लिए उसके फेफड़ो को भी बदलने की भी जरूरत है।
विज्ञापन
महाराष्ट्र में अंग प्रत्यारोपण का डेटाबेस रखने वाली समिति जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन कमिटी (जेटीसीसी) के सामने एक अजीबो-गरीब स्थिति बन आई है क्योंकि उनकी सूची में नासिर से पहले कोई भी विदेशी मरीज नहीं था। जेटीसीसी के नियमों के मुताबिक प्रत्यारोपण के लिए अंग उपलब्ध होने पर उसे सबसे पहले भारतीय मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है इसके बाद अगर किसी का अंग मिलता है तो ही उसे मोहम्मद नासिर को दिया जाएगा।
विज्ञापन
दिल मिलने तक भारत में ही रहेगा नासिर का परिवार
मोहम्मद नासिर अपने माता-पिता के साथ दो महीने पहले गृहनगर लाहौर से सीधे मुंबई आया है। दो दिन पहले ही उसके माता-पिता ने हाजी अली दरगाह पर अपने बेटे के लिए जल्दी से ऑगर्न मिले की दुआ मांगी थी। जेटीसीसी के नियमों को जानने के बावजूद नासिर के माता-पिता उनके बेटे को दिल मिलने तक भारत में ही रहने का फैसला किया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में हॉर्ट ट्रांसप्लांट(दिल के प्रत्यारोपण) की सुविधा नहीं है।
बता दें कि कि मोहम्मद नासिर के दिल में छेद है जिसके कारण उसके फेफड़े पर काफी दबाव पड़ रहा है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के हॉर्ट और लंग ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ नंदकिशोर कपाड़िया ने बताया कि मोहम्मद नासिर का फेफड़ा पूरी तरह खराब हो चुका है। हम ऑगर्न मिलने तक नासिर की स्थिति को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में करीब 52 लाख रुपये खर्च होने की उम्मीद है। पाकिस्तानी सरकार ने नासिर के लिए ये राशि मंजूर कर चुकी है।
नासिर की मांग सुमैरा अली ने कहा,' हमें ये पता नहीं था कि नासिर को दिल की बीमारी है। पिछले साल हमें ये जानकारी मिली। डॉक्टरों ने बताया कि नासिर की जान बचाने के लिए ट्रांसप्लानटेंशन ही इसका एकमात्र विकल्प है। हमने फिर इसके लिए जेटीसीसी में पंजीकरण करवाया है।'
बता दें कि कि मोहम्मद नासिर के दिल में छेद है जिसके कारण उसके फेफड़े पर काफी दबाव पड़ रहा है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के हॉर्ट और लंग ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ नंदकिशोर कपाड़िया ने बताया कि मोहम्मद नासिर का फेफड़ा पूरी तरह खराब हो चुका है। हम ऑगर्न मिलने तक नासिर की स्थिति को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में करीब 52 लाख रुपये खर्च होने की उम्मीद है। पाकिस्तानी सरकार ने नासिर के लिए ये राशि मंजूर कर चुकी है।
नासिर की मांग सुमैरा अली ने कहा,' हमें ये पता नहीं था कि नासिर को दिल की बीमारी है। पिछले साल हमें ये जानकारी मिली। डॉक्टरों ने बताया कि नासिर की जान बचाने के लिए ट्रांसप्लानटेंशन ही इसका एकमात्र विकल्प है। हमने फिर इसके लिए जेटीसीसी में पंजीकरण करवाया है।'