उत्तर प्रदेश: भाजपा ने करीब-करीब सुलझा लिया अंदरूनी विवाद, संघ की दखल के बाद मामला पटरी पर लौटा!
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को देखते हुए संघ ने पूरा सहयोग देने की रणनीति बनानी शुरू की है। इसी तरह से भाजपा के नेताओं को कार्यकर्ताओं में उत्साह भरकर तथा उन्हें जानकारियों से अवगत कराकर गांव-गांव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र सरकार के कामकाज को लोगों तक पहुंचाए...
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विस्तार
लखनऊ में तीन दिन से संघ, भाजपा और योगी सरकार के बीच में मैराथन बैठक चल रही है। अब इस बैठक के नतीजे आने की बारी है। खबर है कि राज्य के भाजपा प्रभारी राधामोहन सिंह और भाजपा के संगठन मंत्री बीएल संतोष अपने अभियान में सफल रहे हैं। वह जल्द ही अच्छी सूचनाओं के साथ दिल्ली में होंगे। संघ, भाजपा और मुख्यमंत्री योगी की सरकार, तीनों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अनुभवों से सबक लेकर 'संघे शक्ति' की थीम पर 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का मन बनाया है। सभी स्तर पर मतभेद मिटाने की कोशिश हुई है। इसकी बानगी तीन जुलाई को संपन्न होने वाले विधानसभा चुनाव में दिखने के आसार हैं।
प्रदेश भाजपा में सारे विवाद सुलझाने के लिए संघ और भाजपा ने लखनऊ में दल, बल के साथ तीन दिन का डेरा जमाने का निर्णय लिया। प्रदेश पार्टी मुख्यालय, निराला नगर स्थित संघ कार्यालय, मुख्यमंत्री आवास और उप मुख्यमंत्री आवास तक बैठकों, मेल मिलाप के कई दौर चले। प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अब सबकुछ ठीक हो जाना चाहिए। वह एक लाइन और इस्तेमाल करते हैं। कहते हैं कि संघ ने गंभीरता के साथ रुचि दिखाई है। इससे पूरे प्रदेश में सकारात्मक संदेश गया है। प्रयागराज से आने वाले संघ के एक नेता ने कहा कि अब तो किसी को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उनकी सरकार के कामकाज तथा उनके चेहरे को लेकर कोई संदेह भी नहीं रहना चाहिए। सच पूछिए तो इतने बड़े पैमाने पर ही प्रयास की जरूरत थी।
किसने लिया आपसी मनभेद मिटाने की कोशिशों में हिस्सा
इस अभियान में हर मोर्चे से नेताओं ने हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश के प्रभारी राधामोहन सिंह, संगठन मंत्री बीएल संतोष तीन दिन पहले लखनऊ पहुंचे थे। इनके अलावा संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, क्षेत्र प्रचारकों में अनिल और महेन्द्र के साथ कोर कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, संगठन मंत्री सुनील बंसल और पूर्व भाजपा अध्यक्ष के साथ साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य तथा राज्य सरकार के अन्य मंत्री पूरी कवायद में सक्रिय रहे। इस दल बल के सामने तीन बड़ी चुनौतियां थीं। पहली चुनौती थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रति अंदरूनी नाराजगी दूर करके सभी नेताओं को उनके पक्ष में लाना, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य आदि के बयानों से पैदा हुई भ्रम की स्थिति को भी दूर करना, खासकर योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद को एक ध्रुव पर ले आना। इसे साधने के लिए शीर्ष नेताओं ने केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर उनके पुत्र और पुत्रवधू को आशीर्वाद देने का कार्यक्रम रखा। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिनेश शर्मा भी गए।
दूसरी बड़ी चुनौती पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, नेताओं में पैदा हुई विभिन्न स्थितियां थीं। तीसरी चुनौती संगठन के स्तर पर सवालों का समाधान था। बताते हैं कि प्रदेश के एक पूर्व अध्यक्ष ने तो मीटिंग के दौरान सवालों की झड़ी भी लगा दी। भ्रम की स्थिति, मंत्रिमंडल विस्तार जैसी स्थिति समेत अन्य मामलों पर योगी सरकार को कठघरे में रखा। इसी तरह से कुछ मंत्रियों, विधायकों या नेताओं के भी सवाल थे। समझा जा रहा है कि इन सभी सवालों का जवाब संघ, भाजपा और सरकार ने दे दिया है। तमाम नेताओं से एकजुट होकर काम करने और योगी सरकार के कामकाज को घर-घर पहुंचाकर चुनाव तैयारी करने को कहा गया है। विधानसभा चुनाव 2022 में चेहरा जैसे सवाल और भ्रम की स्थिति पैदा करने से बचने की सलाह दी गई है। ब्लॉक, तहसील, जिला स्तर पर तमाम प्रयासों को तेजी से शुरू करके सकारात्मक वातावरण निर्माण में जुटने का संदेश दिया गया है।
नेताओं ने कहा आलोचना ही नहीं, इस पर भी गौर कीजिए
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सांस्कृतिक क्षेत्र में अच्छा काम किया है। नवंबर तक बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर तैयार हो जाने की उम्मीद है। अयोध्या में राममंदिर निर्माण तीव्रगति से चल रहा है। अयोध्या में दीपावली, मथुरा, बरसाने में होली, सावन के महीने में कावड़ यात्रा जैसे तमाम प्रयासों के जरिए गोरखपुर से गाजियाबाद तक सांस्कृतिक प्रयास की दृष्टि से सब ठीक चल रहा है। प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसी है। कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है। प्रदेश सरकार ने किसान पथ समेत अन्य मार्गों आदि के जरिए विकास को बढ़ाया है। रणनीतिकारों ने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, विकास, कानून व्यवस्था की स्थिति तथा राज्य सरकार के कामकाज को जनता के बीच ले जाने, इसे भुनाने और उन्हें इससे जोड़ने की जरूरत है। संगठन मंत्री बीएल संतोष ने अपने संबोधन के दौरान भी कहा कि सबकुछ अकेले सरकार नहीं कर सकती। इसे जनता के बीच ले जाने, सकारात्मक वातावरण बनाने का काम हम सभी का भी है। सूत्र बताते हैं कि इसे लेकर रणनीतिकारों ने कई नेताओं, मंत्रियों, पार्टी के पदाधिकारियों से उनके योगदान के बारे में पूछा। कहा भी सिर्फ आलोचना ही नहीं होनी चाहिए। प्रयास भी होना चाहिए।
सामने है पंचायत चुनाव, अगले साल विधानसभा चुनाव
संघ, भाजपा और सरकार के रणनीतिकारों ने 2017 के विधानसभा चुनाव और उसकी रणनीति को याद किया। यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ा गया था। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग तथा समाज के अन्य तबके को जोड़कर पार्टी 311 और सहयोगियों के साथ 325 सीटें लाई थी। रणनीति में इसी पर जोर दिया गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की स्थिति से बचने की सलाह दी गई। अगले साल चुनाव है। तीन जुलाई को जिला पंचायत चुनाव है। इस चुनाव में 73 जिले की सीटों पर भाजपा उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। दो सीटें अपना दल को देने की योजना है। इसे केंद्र में रखकर प्रयास होना चाहिए। अगले साल विधानसभा चुनाव को देखते हुए ब्लाक, तहसील, जिला स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने की पहल होनी चाहिए।
सब अपना अपना करें काम
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को देखते हुए संघ ने पूरा सहयोग देने की रणनीति बनानी शुरू की है। इसी तरह से भाजपा के नेताओं को कार्यकर्ताओं में उत्साह भरकर तथा उन्हें जानकारियों से अवगत कराकर गांव-गांव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र सरकार के कामकाज को लोगों तक पहुंचाए। इसी तरह से राज्य सरकार के मंत्री, विधायक, सांसद, केन्द्रीय मंत्री सभी जनता से जुड़ने को विशेष वरीयता दें।
घोषणा पत्र पर भी होगा अमल, राममंदिर निर्माण महत्वपूर्ण
तीन दिन की बैठक में राज्य सरकार के कामकाज की भी समीक्षा हुई। इसमें 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले लाए गए संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) को लेकर भी चर्चा हुई। बताते हैं कि राज्य सरकार ने इसमें किए गए अधिकांश वादे पूरे करने की जानकारी दी है। कुछ वादे रह गए हैं, उन्हें भी यथाशीघ्र पूरा करने का भरोसा दिलाया गया है। संघ के पदाधिकारी राम मंदिर निर्माण और राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई भूमि तथा मीडिया में आ रही खबरों को लेकर काफी चिंतित दिखाई दिए। एक वरिष्ठ नेता के अनुसार यह विषय गंभीर और संवेदनशील भी है। इधर विशेष सावधानी बरतने के उपाय किए जा सकते हैं।
दिल्ली लौटकर बढ़ जाएगा संगठन मंत्री बीएल संतोष का काम
लखनऊ से दिल्ली लौटने के बाद संगठन मंत्री बीएल संतोष का काम काफी बढ़ जाने की उम्मीद है। वह केंद्रीय मुख्यालय लौटने के बाद प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह के साथ भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से चर्चा करेंगे उन्हें विस्तृत रिपोर्ट देंगे। समझा जा रहा है कि संगठन मंत्री केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी भेंट कर सकते हैं। क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश में मैराथन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए कई स्तर पर केन्द्रीय नेताओं से भी राय-मशविरा करना तथा उनकी मंजूरी लेना होगा। जिससे कि एक लक्ष्य को केन्द्र में रखकर सफलता सुनिश्चित की जा सके।