अगस्ता को काली सूची से बाहर करवाने वाले की हो रही खोज
- एक ताकतवर पूर्व राजनयिक की ओर है शक की सुई
- अपनी सरकार में अगस्ता का रास्ता साफ होने पर मोदी नाराज
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अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घूस कांड में भाजपा के निशाने पर भले ही कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता हों, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय इस छानबीन में जुटा है कि
इस दागी कंपनी को काली सूची से हटाने और इसे रक्षा सौदों की प्रक्रिया में शामिल करने के पीछे कौन था।
सरकारी एजेंसियों के शक के दायरे में भारतीय विदेश सेवा के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो वाजपेयी सरकार और मनमोहन सरकार दोनों में बेहद प्रभावशाली रहे हैं और मौजूदा सरकार के एक शक्तिशाली मंत्री से भी उनके बेहद करीबी रिश्ते हैं। यह जानकारी देने वाले शीर्ष स्तरीय खुफिया सूत्रों ने बताया कि भारतीय विदेश सेवा के एक पूर्व अधिकारी जो कभी रक्षा मंत्रालय में भी तैनात रह चुके हैं, उनकी रक्षा उपकरण बनाने वाली कई बड़ी कंपनियों के साथ खासी निकटता है। उक्त अधिकारी संयुक्त राष्ट्र और लंदन में भी तैनात रह चुके हैं। लंदन जिसे हथियार सौदागरों का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय केंद्र माना जाता है, यहां तैनाती के दौरान उक्त पूर्व राजनयिक ने हथियार कारोबारियों और उनके एजेंटों के साथ अपने रिश्ते बना लिए थे।
सेवानिवृत्ति के बाद उक्त राजनयिक देश में रक्षा सौदों की लॉबिंग में खासे सक्रिय हो गए। रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय में अपने संपर्कों का लाभ उठाकर उक्त पूर्व राजनयिक ने रक्षा उपकरण निर्माता कंपनियों का रास्ता आसान करने में अहम भूमिका निभाई। सूत्र बताते हैं कि जांच एजेंसियों को शक है कि उक्त पूर्व राजनयिक ने अगस्ता वेस्टलैंड की भी मदद करके उसे काली सूची से बाहर निकालने और मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शामिल करवाने में सरकार में अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया।
अपनी सरकार में अगस्ता का रास्ता साफ होने पर मोदी नाराज
बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे लेकर खासे गंभीर हैं कि उनकी सरकार के समय इस दागी कंपनी को कैसे इस तरह की सहूलियतें दी गईं। क्योंकि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घूस कांड को कांग्रेस के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनाने की सरकार और भाजपा की रणनीति को इस तथ्य ने कमजोर कर दिया कि इस दागी कंपनी को काली सूची में डालने की प्रक्रिया यूपीए सरकार ने शुरु की और मोदी सरकार के समय इसे काली सूची में पहले डाला गया फिर महज दो महीने से भी कम वक्त में इसे फिर काली सूची से बाहर करके न सिर्फ मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शामिल किया गया बल्कि नौसेना के लिए हेलीकॉप्टरों की खरीद के सौदै में शामिल होने की इजाजत भी दे दी गई।
कांग्रेस ने अपने बचाव में जहां अपनी सरकार द्वारा इस मामले की सीबीआई जांच शुरु कराने, करार रद्द करने और कंपनी की बैंक गारंटी खुलवा कर दो हजार करोड़ से ज्यादा की रकम वापस लेने के साथ मोदी सरकार के समय अगस्ता वेस्टलैंड को मिली इन सहूलियतों को सबसे बड़ा कवच बनाया है। संसद के दोनों सदनों में बहस के दौरान कांग्रेस ने सरकार पर इसी आधार पर हमला बोला, जिसकी सफाई में सरकार को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा।
सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई एक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी इस बात से खासे असहज थे कि उनकी बिना जानकारी के कुछ ऐसे फैसले भी हो जाते हैं जो सरकार के लिए किरकरी का सबब बनते हैं। इसे लेकर उन्होंने एक कड़ी टिप्पणी भी की।