कश्मीर: युवाओं को गुमराह करने की कोशिश में तालिबान, नए 'बुरहान' नहीं खड़े होने देंगी सुरक्षा एजेंसियां
पाकिस्तानी आईएसआई द्वारा घाटी में तालिबानी लड़ाकों के अमेरिकी हथियारों के साथ ऐसे वीडियोज और फोटो वायरल कराए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को गुमराह किया जा सके। 'जिहाद आतंक' की इस मुहिम में स्थानीय मौलाना और मौलवियों की मदद ली जा रही है...
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अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को जिस तरह के खुफिया अलर्ट मिल रहे हैं, उसके मद्देनजर खास सतर्कता बरती जा रही है। तालिबान और पाकिस्तान के बीच जो खिचड़ी पक रही है, उसका पहला असर जम्मू-कश्मीर की शांति व्यवस्था पर पड़ सकता है। तालिबान के सहयोग से पाकिस्तान का प्रयास है कि घाटी के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को 'जैश ए मोहम्मद', आतंकी संगठन के बैनर तले हो रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल किया जाए। यानी उन्हें नया ‘बुरहान’ बना दिया जाए। केंद्रीय अर्धसैनिक बल, जांच एवं खुफिया एजेंसियां (आंतरिक एवं बाहरी) और लोकल पुलिस ने तालिबानी लड़ाकों के काले जादू का जवाब देने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। पाकिस्तानी आईएसआई द्वारा घाटी में तालिबानी लड़ाकों के अमेरिकी हथियारों के साथ ऐसे वीडियोज और फोटो वायरल कराए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को गुमराह किया जा सके। 'जिहाद आतंक' की इस मुहिम में स्थानीय मौलाना और मौलवियों की मदद ली जा रही है। जम्मू-कश्मीर में ऐसे वीडियोज को आगे बढ़ने से पहले ही रोका जा सके, इसके लिए थाना स्तर पर विशेष साइबर टीमों का गठन किया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस में आईजी रैंक के एक पुलिस अधिकारी बताते हैं, तालिबान को लेकर पुलिस और दूसरी एजेंसियां सचेत हैं। यह बात सही है कि पाकिस्तान, अब तालिबान की मदद से घाटी में 'बुरहान अशरफ वानी' जैसे युवाओं को खड़ा करना चाहता है। दक्षिण कश्मीर के त्राल का रहने वाला बुरहान, जो हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बन गया था, सुरक्षा बलों ने उसे 2016 के दौरान एक मुठभेड़ में मार गिराया था। उसके बाद घाटी में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ, जिनमें करीब 30 लोगों की मौत हुई थी। आतंकवादी बुरहान वानी के पिता ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के एक स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। बुरहान के पिता का तिरंगा फहराते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। बुरहान वानी को अपना आदर्श मानकर राह से भटके युवाओं को वापस मुख्यधारा में लाने का यह एक प्रयास था। पाकिस्तान जो कुछ करना चाह रहा है, उसका इसी तरह जवाब दिया जाएगा। कोई यह बात नहीं सोच सकता था कि बुरहान के पिता तिरंगा फहराएंगे। बुरहान की मौत के बाद घाटी के सैकड़ों युवाओं ने आतंक के रास्ते पर जाने का मन बनाया था। इनमें से कुछ तो सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए, बाकी पकड़े गए। कई युवाओं ने पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर कर दिया।
अब दोबारा से घाटी के शांत माहौल को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। पाकिस्तानी आईएसआई का प्रयास है कि वह तालिबान लड़ाकों को साथ लेकर घाटी के युवाओं को आतंक के रास्ते पर चलने के लिए तैयार करे। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। जिहाद के नाम पर युवाओं को गुमराह कर उन्हें बंदूक थमा दी जाएगी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। तालिबानी लड़ाकों के ऐसे वीडियो, जिनमें उनके पास अमेरिकी हथियार हैं, उन्हें ही अधिक वायरल किया जा रहा है। इन्हें देखकर युवा कुछ प्रतिक्रिया दें। ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए हर जिले में साइबर इकाई काम कर रही है। किस समूह से वीडियो चला है, उसे ट्रैक किया जा रहा है। डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है, पुलिस की नजरों में, वे सबसे बुरी किस्म के आतंकवादी होते हैं, जो गुमनाम रहते हैं। ऐसे लोग बिना सामने आए युवाओं को बरगलाते हैं। सोशल मीडिया पर झूठ बोला जाता है। आतंकवाद का प्रोत्साहन मिले, ऐसी बातें सोशल मीडिया में फैलाई जाती हैं। पिछले दिनों ऐसे ही पांच संदिग्ध जिहादियों को गिरफ्तार किया गया था।
केंद्र से जम्मू-कश्मीर पुलिस में गए एक दूसरे अधिकारी बताते हैं, अभी स्थिति नियंत्रण में है। सीमा पर भी और घाटी के भीतरी इलाकों में भी आतंकियों पर नकेल कसी जा रही है। आतंकियों की नई भर्ती पर रोक लगी है। स्मार्टफोन के गलत इस्तेमाल को लेकर पुलिस सचेत है। आईएसआई के सफेदपोश मददगार, ओवर ग्राउंड व अंडरग्राउंड वर्करों को भी बाहर निकाला जा रहा है। इंटरनेट पर नजर रखने के लिए विभिन्न जिलों में वालंटियर भर्ती किए जा रहे हैं। ये पुलिस की मदद करेंगे। इनका काम इंटरनेट पर नजर रखना है। कोई भी गलत वीडियो या तोड़फोड़ वाला मैसेज अगर वायरल होता है तो उसकी सूचना जांच एजेंसियों को दे दी जाएगी।
केंद्रीय सुरक्षा बलों के एक अधिकारी ने कहा, पाकिस्तान के साथ तालिबान अपने लड़ाके भेजेगा, अभी ये दूर की बात है। हालांकि जैश ए मोहम्मद को लेकर हम विशेष तौर पर सक्रिय हैं। बॉर्डर से अब निकलना बहुत मुश्किल है। स्मार्ट फेंसिंग पर काम चल रहा है। सैटेलाइट इमेज को लेकर भी एजेंसियां अपने प्रोजेक्ट पर लगी हैं। घाटी में अर्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय में बैठक हुई है। उसके मिनट्स आने के बाद सुरक्षा बदलाव किए जा सकते हैं।