UP: सुरक्षा के बाद अर्थव्यवस्था पर छवि मजबूत कर रहे सीएम योगी आदित्यनाथ, सिंगापुर दौरा क्यों महत्वपूर्ण?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि अपराध पर नियंत्रण करने वाले नेता की रही है, लेकिन वे प्रदेश की आर्थिक स्थिति को जिस तरह मजबूत कर रहे हैं, इससे उनकी छवि विकास पुरुष के रूप में भी स्थापित करने में मदद मिलेगी। यह उनकी राष्ट्रीय राजनीतिक पारी के लिए भी महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपराध के मोर्चे पर कठोर रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। उनके शासनकाल में बड़े अपराधियों का खात्मा हुआ है और संगठित अपराध न्यूनतम हो गया है। उनकी इस छवि का लाभ भाजपा को मिलता है और पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने इसी को अपना सबसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। लेकिन पिछले कुछ समय से योगी आदित्यनाथ लगातार विकास और रोजगार के मोर्चे पर मुखरता से बोलते-काम करते दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि वे विकास के मोर्चे पर अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यह छवि उनको विकासवादी राजनेता के तौर पर स्थापित करने और उनकी राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक पारी के लिए महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बड़े समझौते
वर्तमान सिंगापुर दौरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों से बड़े व्यापारिक निवेश के समझौते किए हैं। इससे उत्तर प्रदेश में न केवल निवेश आएगा, बल्कि 20 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी मिलेगी। यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप से 6,650 करोड़ रुपये के निवेश के तीन महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। ये समझौते ग्रुप हाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और हाइपर स्केल डेटा सेंटर क्षेत्रों के लिए हैं। इनसे 20 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे। जेवर एयरपोर्ट के करीब 3500 करोड़ की लागत से अंतरराष्ट्रीय थीम आधारित टाउनशिप विकसित करने पर सहमति बनी हैं। इसमें 12,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर 650 करोड़ रुपये की लागत से लॉजिस्टिक्स पार्क बनेगा जिसमें 7,500 रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर भी दृष्टि
इसी तरह के कुछ अन्य समझौते भी किए गए हैं जिनसे भारी मात्रा में निवेश आने और नौकरियों के निर्माण की संभावनाएं पैदा हुई हैं। इनमें हाउसिंग, बैंकिंग, सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र और सेवा आधारित सेक्टर शामिल हैं। इस तरह के निवेशों से प्रदेश की तस्वीर बदलेगी। सीएम ने प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और बायोगैस सहित ऊर्जा के अन्य गैर पारंपरिक क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तलाशी हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण इनकी चार्जिंग और बैटरी स्टोरेज की क्षमता भविष्य में देश और पूरी दुनिया के सामने बड़ी चिंता का विषय बनकर सामने आने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर दौरे में इसे भी प्रमुखता दी है और नई तकनीक से प्रदेश में इनके निर्माण की नींव भी रखी है।
भविष्य में भी न पिछड़ने पाए उत्तर प्रदेश
कमोबेश पूरे भारत, विशेषकर हिंदी पट्टी के राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार के बारे में अब तक यही धारणा रही है कि ये प्रदेश केवल मजदूर सप्लाई करने का काम करते हैं, और विकास-तकनीक में पीछे रह जाते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस तरह प्रदेश में सेमीकंडक्टर निर्माण, ग्लोबल डाटा सेंटर, अंतरराष्ट्रीय स्तर की टाउनशिप विकसित करने जैसे निवेश के समझौते कर रहे हैं, उससे यह स्थापित होता है कि वे ऐसे माहौल का निर्माण करना चाहते हैं जिससे उत्तर प्रदेश भविष्य में भी विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए।
सीएम योगी ने हमेशा दी विकास को प्राथमिकता
उत्तर प्रदेश भाजपा नेता सुप्रिया सिंह भदौरिया ने अमर उजाला से कहा कि विकास और रोजगार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हमेशा से प्राथमिकता में रहा है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर सबसे निचले स्तर पर है। लोगों को अपने घरों के आसपास ही रोजगार मिल रहा है जिसके कारण पलायन पर भी लगाम लगी है।
उन्होंने कहा कि इसी बजट में यह साफ हुआ है कि काशी-अयोध्या का विकास करके सरकार ने हजारों करोड़ रुपये की आय प्राप्त की है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है, और सरकार को प्राप्त आय से पूरे प्रदेश के विकास में सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की इसी प्राथमिकता का परिणाम है कि प्रदेश की जनता लगातार उनके साथ खड़ी हुई है। भाजपा नेता ने दावा किया कि 2027 में भी भाजपा दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाएगी।